हाल के दिनों में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे जोरदार बिगुल फूंकने वाले शख्स का नाम है हंसराज गंगाराम अहीर. महाराष्ट्र के चंद्रपुर से बीजेपी सांसद अहीर ने यूपीए सरकार पर निजी कंपनियों को कोयला ब्लॉक ‘मुफ्त’ में देने का आरोप लगाया था. अपने तथ्यों पर भरोसा करते हुए अहीर ने केंद्रीय सतर्कता आयोग और कैग में जांच के लिए याचिका डाली. सीवीसी में उन्हीं की शिकायत पर सीबीआइ इस मामले की जांच कर रही है.
अहीर ने इंडिया टुडे को बताया, ‘’सरकार ने उनकी बैंक गारंटी को भी भुनाने की जहमत नहीं उठाई, इसकी बजाए उसने कंपनियों को गारंटी वापस लेकर पतली गली से निकल जाने का मौका दिया.’’
हंसराज इस मामले पर पड़ी धूल साफ करने में जुटे हैं. वे कहते हैं, ‘’खान और खनिज (विकास व नियमन) कानून 1957 में संशोधन की अधिसूचना के बाद भी तीन और खदानें निजी कंपनियों को दी गईं.’’ अहीर के निशाने पर फिलहाल कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल हैं, जिन पर उन्होंने मई, 2009 के बाद स्क्रीनिंग कमेटी से मंजूरी के बगैर 35 ब्लॉक आवंटित करने का आरोप लगाया है.
कोयले के मामले में संपन्न इलाके चंद्रपुर से तीसरी बार सांसद चुनकर आए अहीर चाहते हैं कि अब तक सरकारी और निजी इकाइयों को दिए गए कुल 196 ब्लॉकों का आवंटन रद्द हो क्योंकि उनके मुताबिक, सभी ब्लॉकों के आवंटन ‘’मुफ्त और मनमाने ढंग से किए गए हैं.’’
वे कोयले और स्टील पर संसदीय समिति के 2004 से ही सदस्य हैं. इसने उनकी बड़ी मदद की है. वे कहते हैं, ‘’2005 में एक बैठक के दौरान कोयला मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि कोल इंडिया अपनी क्षमता के हिसाब से उत्पादन करने में अक्षम रहा है और इस अंतर को पूरा करने के लिए निजी कंपनियों को लाना होगा. लेकिन निजी कंपनियों को कोयला ब्लॉक मुफ्त में दिए जा रहे थे. तभी मैंने इस मामले की तह तक जाने का फैसला किया.’’
अहीर ने 26 दिसंबर, 2006 को अपनी पहली चिट्ठी कोयला आवंटन पर वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को लिखी और इसे प्रधानमंत्री और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया को भी भेजा. वे बताते हैं, ‘’मैंने पूछा था कि क्या लाभार्थियों को कैप्टिव कोयला ब्लॉकों के एवज में उपकर और रॉयल्टी देने को कहा गया है.” अहीर ने केंद्रीय सतर्कता आयोग को अपना पहला पत्र 2009 में लिखा, जिसमें कुल आवंटित 196 कोयला ब्लॉकों के जांच की मांग की. इसके बाद 16 नवंबर, 2010 को वे अपनी लड़ाई कैग के दफ्तर लेकर गए और आवंटन के लेखा परीक्षण की मांग कर डाली.
वे कहते हैं, ‘’इसके बाद मैंने एनडीए के 40 सांसदों के दस्तखत किए एक पत्र को भेजा. उस पत्र में पूरे मामले की जांच की मांग की गई थी.’’
कोल ब्लॉकों के आवंटन में घोटाले को उजागर करने वाले अहीर अब भूल चुके हैं कि इस मामले पर उन्होंने प्रधानमंत्री को कितने पत्र लिखे थे. वे याद करते हैं, ‘’मेरे पास 13 चिट्ठियों के तो रिकॉर्ड हैं, लेकिन संख्या इससे ज्यादा है.”

