जब किसी युवा और शारीरिक रूप से सक्रिय व्यक्ति को हार्ट की गंभीर बीमारी का पता चलता है, तो यह उसके साथ-साथ सभी के लिए हैरत भरी खबर होती है. ऐसे व्यक्ति में स्वास्थ्य संबंधी कोई स्पष्ट समस्या नहीं दिखती.
ज्यादातर लोग मानते हैं कि फिट रहने, सक्रिय रहने और अच्छा खाने से हार्ट अच्छी स्थिति में रहता है. लेकिन कार्डियोमायोपैथी जैसी कुछ हार्ट की बीमारियां चुपचाप विकसित हो सकती हैं. यह उन व्यक्तियों में भी हो सकती हैं जो स्वस्थ दिखाई देते हैं.
फिट होना हार्ट की सभी बीमारियों को नहीं रोकता है. विशेष रूप से वे बीमारियां जो बनावट (structural) या अनुवांशिक (genetic) मूल की होती हैं. इस बारे में हमने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित मणिपाल अस्पताल में सलाहकार-कार्डियोलॉजी डॉ. गीतेश गोविल से बात की. उन्होंने इससे जुड़े सभी सवालों का विस्तार से जवाब दिया :
कार्डियोमायोपैथी क्या है?
कार्डियोमायोपैथी एक ऐसी बीमारी है जो हार्ट की मांसपेशियों को सख्त, बड़ा या मोटा कर देती है. इससे ऊतकों (tissue) पर निशान पड़ सकते हैं और रक्त को आसानी से पंप करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इसके परिणामस्वरूप लोगों को थकान, सांस की तकलीफ या धड़कन तेज महसूस हो सकती है. हार्ट की मांसपेशियों में ये बदलाव कई छिपी हुई स्थितियों के कारण भी हो सकते हैं. जैसे हार्ट की सूजन, हार्ट को प्रभावित करने वाले संक्रमण, ऑटोइम्यून स्थितियां, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल. ये कारक हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देते लेकिन धीरे-धीरे हार्ट के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं.
युवाओं के भी इसका शिकार बनने की संभावना क्यों होती है?
युवा और स्वस्थ व्यक्तियों में कार्डियोमायोपैथी अक्सर जेनेटिक वजहों होती है. विशेष रूप से विरासत में मिली स्थितियां जैसे हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी, जिनका पता लक्षण दिखने तक नहीं चल पाता. वायरल संक्रमण भी हार्ट की मांसपेशियों की सूजन (मायोकार्डिटिस) को ट्रिगर कर सकते हैं. यह बाद में कार्डियोमायोपैथी में बदल सकता है. इसके अतिरिक्त, कुछ मामलों में ऑटोइम्यून रिएक्शन और अज्ञात कारण भूमिका निभाते हैं. एथलीटों में, गहन शारीरिक प्रशिक्षण हार्ट की बनावट संबंधी असामान्यताओं को छुपा सकता है. तनाव के दौरान यह जोखिम भरा हो सकता है.
जोखिम पैदा करने वाले दूसरे कारक क्या हैं?
कुछ स्थितियां और जीवन की घटनाएं चुपचाप जोखिम बढ़ा सकती हैं:
- पारिवारिक इतिहास : पारिवारिक इतिहास हार्ट की मांसपेशियों में विरासत में मिली कमजोरी की ओर इशारा कर सकता है. यह समय के साथ सामने आ सकती है.
- व्यक्तिगत इतिहास: हार्ट को पहले हुई क्षति समय के साथ मांसपेशियों को कमजोर कर सकती है.
- शराब का लंबे समय तक सेवन या नशीले पदार्थों का दुरुपयोग: लंबे समय तक उपयोग धीरे-धीरे हार्ट की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है और कार्यों को प्रभावित कर सकता है.
- तनाव: तीव्र भावनात्मक तनाव अस्थाई रूप से हार्ट को प्रभावित कर सकता है.
- रेडिएशन या कीमोथेरेपी: ये उपचार कभी-कभी समय के साथ हार्ट की मांसपेशियों को प्रभावित कर सकते हैं.
- 30 से अधिक बीएमआई (BMI): अतिरिक्त वजन हार्ट पर लगातार दबाव डाल सकता है.
कार्डियोमायोपैथी का इलाज कैसे करें?
कार्डियोमायोपैथी अक्सर स्पष्ट शुरुआती संकेतों के बिना विकसित होती है. इसकी पहचान आमतौर पर सीटी स्कैन, इकोकार्डियोग्राम और इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम जैसे परीक्षणों के माध्यम से की जाती है. ये परीक्षण हार्ट की बनावट और कामकाज में बदलाव का पता लगाने में मदद करते हैं. कुछ मामलों में कारण समझने के लिए आगे की इमेजिंग या जेनेटिक परीक्षण किए जाते हैं.
शुरुआती चरणों में, पेसमेकर, इंप्लांटेबल डिफिब्रिलेटर और कार्डिएक रीसिंक्रोनाइज़ेशन थेरेपी (CRT) जैसे उपकरणों का उपयोग किया जाता है. ये हार्ट की लय को नियंत्रित करने और हार्ट की धड़कन के समन्वय में सुधार करने के लिए उपयोग किए जाते हैं. जैसे-जैसे स्थिति बढ़ती है और बनावट संबंधी समस्याएं अधिक स्पष्ट हो जाती हैं, सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है.
इनमें सेप्टल मायक्टोमी शामिल है. यह एक प्रक्रिया है जो रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए हार्ट की मोटी मांसपेशियों के एक हिस्से को हटा देती है. इसमें माइट्रल वॉल्व की मरम्मत भी शामिल है. यह वॉल्व के काम करने के तरीके को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करता है ताकि हार्ट के माध्यम से रक्त का संचार सुचारू हो सके. अधिक उन्नत चरणों में, जब हार्ट प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम नहीं होता है, तो हार्ट ट्रांसप्लांट पर विचार किया जा सकता है.
युवा और फिट होना हमेशा कार्डियोमायोपैथी जैसी हार्ट की बीमारियों से सुरक्षा की गारंटी नहीं देता. छिपे हुए अनुवांशिक कारक, पिछले संक्रमण या अज्ञात कारण चुपचाप हार्ट को प्रभावित कर सकते हैं. असामान्य लक्षणों पर ध्यान देना और समय पर डॉक्टर से कंसल्ट करना जीवन रक्षक हो सकता है. विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए जो खुद को कम जोखिम वाला मानते हैं.

