scorecardresearch

AI करेगा बीमारी से पहले इलाज! 2026 में हेल्थकेयर को लेकर ये होंगे नए ट्रेंड

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में AI-आधारित निगरानी और व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल में इस साल कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
अपडेटेड 15 जनवरी , 2026

2026 में स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी बदलावों की बात कर रहे हैं. इन विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों के शरीर, दिमाग और इलाज के तरीकों में इस साल कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

AI-आधारित डायग्नोसिस से लेकर बीमारियों की रोकथाम वाली देखभाल की आदतों में अहम बदलाव नजर आएंगे. ऐसे में हम जानने की कोशिश करते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं में विशेषज्ञ किन 5 प्रमुख बदलावों की बात कर रहे हैं.

पर्सनलाइज्ड हेल्थ सिस्टम

2026 का सबसे बड़ा ट्रेंड यह है कि अब बीमारी के बाद इलाज करने के बजाय, पहले ही किसी बीमारी के रोकथाम पर जोर दिया जाएगा. हर व्यक्ति के हिसाब से उसे होने वाले किसी भी संभावित बीमारी से पहले ही उसके रोकथाम के लिए प्रयास शुरू हो जाएंगे.

यही कारण है कि हेल्थ सिस्टम और आम लोग किसी संभावित बीमारी से बचने के लिए अब कई तौर-तरीके अपनाने लगे हैं. जैसे- कुछ लोग वेलनेस मेंबरशिप ले रहे हैं, जो एक प्रकार का प्री-पेड प्लान है. इससे आपको स्पा, जिम, या हेल्थकेयर सेवाओं पर छूट और विशेष लाभ मिलता है, ताकि आप नियमित रूप से अपनी सेहत का ख्याल रख सकें.

इतना ही नहीं एडवांस्ड बायोमार्कर ट्रैकिंग पर भी लोग ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. यह एक तरह की खास टेक्नोलॉजी है, जो त्वचा के नीचे शरीर में प्रमुख बायोमार्करों को मापते हैं. इससे वह किसी बीमारी या शरीर में होने वाले किसी बदलाव को लेकर पहले ही संकेत दे देते हैं. इसके आधार पर लोग बचाव या रोकथाम करते हैं.

पुराने समय में साल में एक बार चेक-अप और ब्लड टेस्ट सिर्फ बीमारी देखने के लिए होते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है. आज के समय में कई ऐसे टूल्स हैं, जिनसे डॉक्टर या व्यक्ति खुद अपनी सेहत की जांच कर अपने हिसाब से प्लान बना सके. ताकि गंभीर बीमारी होने से बहुत पहले ही खतरे का पता चल जाए. इससे पूरे समाज में रोकथाम वाली स्वास्थ्य देखभाल को अपनाने की संस्कृति बढ़ रही है.

AI के जरिए देखभाल

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 2026 एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा, जब AI रोजमर्रा की स्वास्थ्य प्रक्रियाओं का अभिन्न अंग बन जाएगी. अब आने वाले समय में AI किसी मरीज के इलाज से लेकर उनके रिपोर्ट्स आदि डॉक्यूमेंट्स को पढ़कर किसी भी जोखिम को पहले ही पता लगाने में सक्षम हैं.

इतना ही नहीं स्मार्ट अंगूठियों और घड़ियों में लगे AI अब हमारे शरीर में इंसुलिन लेवल या हार्ट बीट के आधार पर हमें बताने में सक्षम हैं कि हमारे शरीर में कहीं किसी चीज की बैलेंस बिगड़ तो नहीं रही है. इससे निगरानी के साथ ही साथ इलाज में भी सहायता मिल रही है. साथ ही लोगों को समय पर सही इलाज मिल रहा है. कई बार तो समय से पहले ही लोग AI टूल्स से जानकारी मिलने पर रोकथाम के जरिए होने वाले खतरों से बच जाते हैं.

डायबिटीज संबंधी बीमारी की देखरेख

पहले डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए दी जाने वाली दवाएं, सिर्फ शुगर कंट्रोल करने के लिए थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब ये दवाएं वजन कम करने के साथ ही दिल-किडनी-लीवर की सेहत सुधारने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रही हैं.

अब डायबिटीज मरीजों का उपचार सिर्फ दवा के जरिए नहीं, बल्कि सुनियोजित आहार और जीवनशैली संबंधी उपायों के साथ मोटापा, पोषण आदि पर कंट्रोल कर किया जा रहा है. अब लोग भी पहले से ज्यादा सतर्क हैं, उन्हें पता है कि किन वजहों से वे इन बीमारियों के शिकार होते हैं. यही कारण है कि स्वास्थ्य के बारे में लोगों की अपेक्षाएं बदल रही हैं. यह बदलाव पोषक तत्वों से भरपूर भोजन, अनुकूलित आहार और डायबिटीज कंट्रोल वाली दवाएं तीनों पर ध्यान केंद्रीत करने के लिए प्रेरित कर रहा है.

नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र की देखभाल

पहले शारीरिक स्वास्थ्य ही सुर्खियों में रहता था, लेकिन अब 2026 में मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका तंत्र की देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है. खासकर युवा वयस्कों में बहुत ज्यादा तनाव, बर्नआउट (थकान और जलन) की शिकायतें हैं, जिसकी वजह से भावनात्मक मजबूती, तनाव कम करने और दिमाग की स्पष्टता पर फोकस बढ़ रहा है.

लोग अब तनाव कम करने के लिए सांस की एक्सरसाइज, सोमैटिक प्रैक्टिसेज और काम-काज के दफ्तर में मेंटल हेल्थ डेज़, काउंसलिंग, स्ट्रेस रिडक्शन रूम्स आदि का सहारा लेते हैं. 2026 में मानसिक सेहत का तरीका अब क्राइसिस आने पर इलाज करने वाला नहीं रहा ,बल्कि रोकथाम वाला हो गया है. मतलब, रोज़ाना छोटी-छोटी आदतें बनाकर तनाव को पहले से कंट्रोल करना, नर्वस सिस्टम को बैलेंस करना आदि पर आधारित हो गया है.

फंक्शनल न्यूट्रिशन का बढ़ता क्रेज

2026 में न्यूट्रिशन के ट्रेंड्स अब सिर्फ कैलोरी, प्रोटीन, कार्ब्स, फैट तक सीमित नहीं रह गए हैं. अब फोकस फंक्शनल न्यूट्रिशन पर है यानी ऐसे खाने पर जो पूरी सेहत को सपोर्ट करे. खासकर आंतों की सेहत को सपोर्ट करे. डाइटरी फाइबर (रेशा), फर्मेंटेड फूड्स- जैसे दही, छाछ, किमची, सॉर्क्राउट, कोम्बुचा, केफिर अब बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं. इसकी प्रमुख वजह ये है कि पूरे शरीर के इकोसिस्टम को बेहतर करने वाले अप्रोच अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं.

ये चीजें इम्यूनिटी, मूड कंट्रोल और मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद करती हैं. यह बदलाव इसलिए है क्योंकि लोग अब ऐसे फूड प्रोडक्ट्स चाहते हैं जो एक साथ कई फायदे दें. साथ ही ऐसे फूड्स जो रोजाना की डाइट में आसानी से फिट हो जाएं, और मल्टी-बेनिफिट फूड्स हों.

Advertisement
Advertisement