इन दिनों में एक लंबी ऐतिहासिक बायोपिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों के बीच धीरे-धीरे अपनी जगह बना रही है. सर सैयद अहमद खान की बायोपिक Sir Syed Ahmad Khan: The Messiah के थिएटर रिलीज़ के सीमित दायरे के बाद ओटीटी पर आने के साथ एक नया दर्शक वर्ग मिला है, खासतौर पर वे लोग जो इतिहास और जीवनीपरक सिनेमा में रुचि रखते हैं.
ऐसे समय में जब मुख्यधारा का सिनेमा बड़े बजट और फ्रेंचाइज़ मॉडल पर टिका हुआ है, लगभग पांच घंटे की यह उर्दू-हिंदी फिल्म एक अलग तरह का सिनेमाई प्रयोग मानी जा रही है. दो भागों में बनी इस फिल्म में 19वीं सदी के सामाजिक और बौद्धिक परिवेश को विस्तार से दिखाने की कोशिश की गई है जो आमतौर पर मुख्यधारा फिल्मों में कम देखने को मिलता है.
Sir Syed Ahmad Khan: The Messiah फिलहाल Apple TV+ और Google Play Movies पर उपलब्ध है.
फिल्म का निर्माण शोएब चौधरी और परवीन अख्तर अली ने किया है. इसकी कहानी ‘हयात-ए-जावेद’ से प्रेरित है, जिसे अल्ताफ हुसैन हाली ने लिखा था. फिल्म में सर सैयद अहमद खान के जीवन, 1857 के बाद के सामाजिक बदलावों और आधुनिक शिक्षा को लेकर उनके प्रयासों को केंद्र में रखा गया है.
इतिहासकारों के अनुसार 19वीं सदी के उत्तरार्ध में सर सैयद ने आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए कई संस्थागत पहल कीं, जिनमें मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना प्रमुख थी. यही संस्थान आगे चलकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना और भारतीय उपमहाद्वीप में आधुनिक शिक्षा के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा.
इस फिल्म का प्रीमियर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कैनेडी हॉल में आयोजित किया गया था जहां विश्वविद्यालय प्रशासन की मौजूदगी में इसे प्रदर्शित किया गया. यह आयोजन फिल्म के विषय के अनुरूप प्रतीकात्मक महत्व भी रखता है.
फिल्म की स्टारकास्ट में ज़रीना वहाब, दीपक पराशर और आरिफ जकारिया जैसे कलाकार शामिल हैं जिन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए कहानी को आगे बढ़ाया है.
निर्देशक शोएब चौधरी ने इस फिल्म में निर्देशन के साथ-साथ सह-लेखन और मुख्य भूमिका भी निभाई है. सीमित संसाधनों और लंबे शोध के आधार पर तैयार यह प्रोजेक्ट स्वतंत्र सिनेमा के उस हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है जहां विषय की प्राथमिकता व्यावसायिक समीकरणों से अलग रखी जाती है.
फिल्म के निर्माण में ऐतिहासिक सेट्स, परिधानों और प्रोस्थेटिक मेकअप का इस्तेमाल किया गया है जिससे अलग-अलग समयखंडों को विश्वसनीय तरीके से दिखाने की कोशिश की गई है. हालांकि इसकी लंबी अवधि और गंभीर विषयवस्तु इसे मुख्यधारा के मनोरंजन से अलग एक विशेष दर्शक वर्ग तक सीमित भी करती है.
डिजिटल रिलीज़ के बाद फिल्म को धीरे-धीरे दर्शक मिल रहे हैं. ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव के साथ ऐसी फिल्मों को भी स्पेस मिल रहा है जिन्हें पारंपरिक बॉक्स ऑफिस पर सीमित अवसर मिल पाते हैं. हाल के वर्षों में ऐतिहासिक और बायोपिक कंटेंट के लिए दर्शकों की रुचि बढ़ने का रुझान भी देखा गया है, जिसका फायदा इस फिल्म को मिल रहा है.
कुल मिलाकर Sir Syed Ahmad Khan: The Messiah को मिल रही प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट की विविधता बढ़ रही है और अलग विषयों पर बनी फिल्मों के लिए भी दर्शक मौजूद हैं- भले ही उनकी संख्या सीमित ही क्यों न हो.

