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'हॉलिडे इम्यूनिटी डिप' क्या है जिससे छुट्टियों में बढ़ जाती हैं बच्चों की बीमारियां?

कई माता-पिता एक पैटर्न देखते हैं कि छुट्टियों के दौरान या उसके तुरंत बाद बच्चों को ज्यादा खांसी, पेट का संक्रमण, थकान या एलर्जी की समस्या होने लगती है

सांकेतिक फोटो
अपडेटेड 8 जून , 2026

बच्चों के लिए गर्मियों की छुट्टियां आमतौर पर परिवार के साथ सैर-सपाटे, देर रात तक जागने, बाहर खाना खाने और कुछ समय के लिए स्कूल की दिनचर्या से दूर रहने का मौका होती हैं. ये अनुभव बच्चों के सामाजिक विकास और भावनात्मक संतुलन के लिए फायदेमंद होते हैं. लेकिन बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि दिनचर्या में गड़बड़ी के कुछ ऐसे स्वास्थ्य प्रभाव भी हो सकते हैं जो तुरंत नजर नहीं आते.

कई माता-पिता एक पैटर्न देखते हैं कि छुट्टियों के दौरान या उसके तुरंत बाद बच्चों को ज्यादा खांसी, पेट का संक्रमण, थकान या एलर्जी की समस्या होने लगती है. इसे कुछ लोग ‘हॉलिडे इम्यूनिटी डिप’ भी कहते हैं. बेंगलुरु के डॉ. राजीव एम.आर., वरिष्ठ सलाहकार-जनरल पीडियाट्रिक्स, बताते हैं कि यह वास्तव में क्या है.

दिनचर्या क्यों महत्वपूर्ण है

बच्चे नियमित दिनचर्या में बेहतर रहते हैं. समय पर सोना, संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी पीना, शारीरिक गतिविधियां और रोजमर्रा की तय आदतें स्वस्थ विकास और बेहतर प्रतिरक्षा प्रणाली में मदद करती हैं.

लेकिन छुट्टियों के दौरान सोने का समय बिगड़ जाता है, स्क्रीन टाइम बढ़ जाता है और खाने-पीने का समय भी बदल जाता है. बच्चे पौष्टिक घर के खाने की जगह प्रोसेस्ड स्नैक्स, मीठे पेय और रेस्तरां का खाना ज्यादा खाने लगते हैं.

कुछ समय बाद ये छोटे बदलाव कम ऊर्जा, पेट की परेशानी या शरीर की सामान्य शारीरिक और पर्यावरणीय चुनौतियों से उबरने की क्षमता में कमी के रूप में दिख सकते हैं. जब कई अच्छी आदतें एक साथ प्रभावित होती हैं तो बच्चों में सामान्य संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है.

नई जगह, नए कीटाणु

गर्मी की छुट्टियों में यात्रा बच्चों को नई जगहों, अलग मौसम, भीड़भाड़ वाले हवाई अड्डों, सार्वजनिक परिवहन, होटलों, स्विमिंग पूलों और विभिन्न पर्यटन स्थलों तक ले जाती है.

नई जगहें अपने आप में खतरनाक नहीं होतीं. लेकिन वहां वायरस, बैक्टीरिया और एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों के संपर्क में आने की संभावना बढ़ जाती है. इससे सांस और पेट संबंधी संक्रमणों का खतरा भी बढ़ जाता है.

इसके अलावा यात्रा के दौरान पेट खराब होना, फूड पॉइजनिंग और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं, खासकर गर्मियों में.

नींद और इम्यूनिटी

छुट्टियों के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली चीजों में से एक नींद है. बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त नींद इम्यून सिस्टम को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

नींद के दौरान शरीर महत्वपूर्ण हार्मोन और इम्यूनिटी से जुड़े अणुओं (immune-signalling molecules) जारी करता है. ये संक्रमणों से बचाने और शरीर को ठीक होने में मदद करते हैं.

देर रात तक जागना, लंबी यात्राएं और जेट लैग नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं. कुछ दिनों की खराब नींद भी बच्चों के मूड, ध्यान, भूख और बीमारियों से लड़ने की क्षमता पर असर डाल सकती है.

छुट्टियों से लौटने के बाद अत्यधिक थके हुए दिखने वाले बच्चों को सामान्य नींद की दिनचर्या में लौटने में कई दिन लग सकते हैं.

गर्मी और शरीर में पानी की कमी

यात्रा का मतलब अक्सर ज्यादा समय बाहर बिताना, घूमना-फिरना और योजना से अधिक समय तक गर्मी में रहना होता है.

बच्चों में वयस्कों की तुलना में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक होता है. हल्का डिहाइड्रेशन भी सिरदर्द, थकान, कब्ज, चिड़चिड़ापन और खेलने-कूदने की क्षमता में कमी का कारण बन सकता है.

अक्सर माता-पिता भोजन पर तो ध्यान देते हैं लेकिन पर्याप्त पानी पीने पर उतना ध्यान नहीं देते.

स्वास्थ्य और मस्ती साथ-साथ चल सकते हैं

डॉक्टरों का कहना है कि परिवार छुट्टियों के आनंद और स्वस्थ दिनचर्या के बीच अच्छा संतुलन बनाए रख सकते हैं. इसके लिए कुछ छोटे कदम काफी हैं. जैसे नियमित नींद का समय, पर्याप्त पानी पीना, स्वस्थ स्नैक्स खाना और हाथों की सफाई का ध्यान रखना.

इसके अलावा गतिविधियों के बीच थोड़ा आराम करने का समय भी रखना चाहिए. ये साधारण आदतें व्यस्त छुट्टियों के दौरान भी संक्रमण के खतरे को कम कर सकती हैं.

मकसद छुट्टियों का सारा आनंद खत्म करना नहीं है. बल्कि कुछ जरूरी स्वास्थ्य आदतों को बनाए रखना है. संतुलित दृष्टिकोण अपनाने से बच्चे छुट्टियों का पूरा आनंद ले सकते हैं, तरोताजा महसूस करते हुए घर लौट सकते हैं और अपनी सामान्य दिनचर्या में आसानी से वापस आ सकते हैं.

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