scorecardresearch

Gen Z को खूब भा रहे लैब-ग्रोन डायमंड लेकिन सिर्फ कीमत इसकी वजह नहीं!

पिछली पीढ़ियों ने हीरों को विरासत के रूप में देखा तो Gen Z उन्हें सेल्फ एक्सप्रेशन का जरिया मानती है

The 7.5-carat lab-grown green diamond gifted to US First Lady Jill Biden is manufactured by a Surat-based diamond manufacturing company.
सांकेतिक फोटो
अपडेटेड 6 मई , 2026

हीरे हमेशा क्लास, परंपरा और विरासत से जुड़े रहे हैं. इन्हें शादियों, वर्षगांठों, जीवन में एक बार आने वाले मील के पत्थर या सहेज कर रखी गई विरासती चीजों के रूप में देखा जाता था. इन्हें खास मौकों पर ही बाहर निकाला जाता था और फिर वापस रख दिया जाता था.

Gen-Z इस कहानी को दोबारा लिख रहा है. वे हीरे पहनने या खरीदने के लिए किसी खास मौके का इंतजार नहीं करना चाहते. हीरे उनके जीवन का हिस्सा बन गए हैं. इन्हें सहज और स्टाइलिश तरीके से पहना जा रहा है. दरअसल ये लैब-ग्रोन (प्रयोगशाला में विकसित) हीरे हैं.

भारत में उपलब्ध न्यूयॉर्क स्थित लग्जरी फाइन ज्वेलरी ब्रांड 'वर्लास' के स्पोक्सपर्सन कहते हैं, "लैब-ग्रोन डायमंड्स स्टेटस सिंबल बन गए हैं क्योंकि वे एक सोच-समझकर किए गए चुनाव को दिखाते हैं. आज यह केवल किसी चीज़ का मालिक होने के बारे में नहीं है. यह इस बारे में है कि आप उसे क्यों खरीद रहे हैं."

लैब-ग्रोन डायमंड पैसे के पारंपरिक पैमानों (जैसे कैरेट साइज, कीमत और स्रोत) से हटकर कुछ अधिक गहरा होने की ओर इशारा करते हैं. Gen-Z को इस बात में कम दिलचस्पी है कि हीरे की कीमत क्या है. उनकी दिलचस्पी इस बात में ज्यादा है कि वह हीरा किस बात का प्रतीक है. इसका नतीजा एक नए प्रकार की लग्जरी है जो व्यक्तिगत, उद्देश्यपूर्ण और आत्मविश्वास से भरी लगती है.

'रिया डायमंड्स' के संस्थापक और सीईओ प्रपंज एस.के. कोटा भी कुछ यही कहते हैं, "लैब में तैयार हीरा जागरूकता, नई तकनीक तक पहुंच और स्मार्ट लग्जरी की ओर विकास का प्रतिनिधित्व करता है. आज स्टेटस में खरीदारी का कारण भी शामिल है, न कि केवल उत्पाद."

जो बात लैब-ग्रोन हीरों को Gen-Z के लिए विशेष रूप से आकर्षक बनाती है, वह है इनकी कीमतें जो कतई डराने वाली नहीं हैं. इन्हें बंद करके रखने की जरूरत नहीं है. इसके बजाय, इन्हें अक्सर और बिना ज्यादा सोचे-समझे पहना जाता है. लैब-ग्रोन हीरे खान से निकलने वाले पत्थरों जैसी ही चमक और बनावट देते हैं. लेकिन इनकी वैल्यू फॉर मनी बहुत है. इससे युवा खरीदार डिजाइन, आकार और कारीगरी को प्राथमिकता दे पाते हैं. कोटा कहते हैं, "बिना किसी समझौते के अपनी पसंद की चीज़ खरीदने की क्षमता एक मुख्य प्रेरक कारक है."

अगर पिछली पीढ़ियों ने हीरों को विरासत के रूप में देखा, तो Gen-Z उन्हें आत्म-अभिव्यक्ति के रूप में देखती है. खुद के लिए खरीदारी करने की संस्कृति बढ़ रही है. अब जूलरी केवल उपहार में नहीं दी जाती बल्कि चुनी जाती है. अक्सर यह सामाजिक उपलब्धियों के बजाय व्यक्तिगत उपलब्धियों को मनाने के लिए खरीदी जाती है.

वर्लास के स्पोक्सपर्सन कहते हैं, "खुद को उपहार देने और व्यक्तिगत मील के पत्थर मनाने की ओर बदलाव आया है. उपभोक्ता 'आधुनिक विरासत' बना रहे हैं. ये चीजें उनकी उनकी व्यक्तिगत कहानियों को दिखाती हैं और कल अगली पीढ़ी को सौंपी जा सकती हैं."

यही कारण है कि लोग अब भारी और खास मौकों वाले डिजाइन के बजाय हल्के और तरह-तरह के गहनों की ओर बढ़ रहे हैं. ये हर जगह आसानी से पहने जा सकते हैं. इसमें स्टैकेबल रिंग्स, मिनिमल सॉलिटेयर और डिजाइन-आधारित आकृतियां शामिल हैं. ये गहने बोर्डरूम और पार्टी दोनों जगह अच्छे लगते हैं.

टिकाऊपन और नैतिकता लैब-ग्रोन हीरों के आकर्षण में भूमिका निभाते हैं, लेकिन केवल अकेले नहीं. Gen-Z के लिए यह मूल्यों और सुंदरता के बीच चुनाव करने के बारे में नहीं है. वे दोनों की अपेक्षा करते हैं. वे डिजाइन या गुणवत्ता से समझौता किए बिना जिम्मेदार सोर्सिंग चाहते हैं. यही मेल लैब-ग्रोन हीरों को इतना प्रासंगिक बनाता है.

कोटा सहमत हैं, लेकिन एक व्यावहारिक बात जोड़ते हैं: "हालांकि नैतिकता मायने रखती है, लेकिन डिजाइन, गुणवत्ता और मूल्य ही आखिरकार खरीदारी को बढ़ावा देते हैं." दूसरे शब्दों में, यह दिखने में, भावनात्मक रूप से और आर्थिक रूप से सही महसूस होना चाहिए.

सोशल मीडिया ने इस बदलाव को तेज करने में अहम भूमिका निभाई है. प्लेटफॉर्म्स ने जानकारी तक पहुंच को आसान बना दिया है. इससे उपभोक्ता पहले की तुलना में बेहतर रिसर्च, तुलना और अपने विकल्पों की पुष्टि कर सकते हैं. वर्लास के स्पोक्सपर्सन के मुताबिक, "सोशल मीडिया ने लैब-ग्रोन हीरों को एक विकल्प के बजाय एक मुख्यधारा की पसंद के रूप में स्थापित किया है."

इस बीच, इन्फ्लुएंसर्स ने आकांक्षाओं को फिर से परिभाषित किया है. उन्होंने दिखाया है कि कैसे हीरों को कैजुअल तरीके से स्टाइल किया जा सकता है. इन्हें स्वतंत्र रूप से खरीदा जा सकता है और रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल किया जा सकता. अगर कोई ऐसी चीज़ है जिससे Gen-Z समझौता नहीं करता, तो वह है स्पष्टता. वे जानना चाहते हैं कि वे क्या खरीद रहे हैं, यह कहां से आता है, इसकी कीमत कैसे तय की जाती है और क्या चीज़ इसे मूल्यवान बनाती है.

दिलचस्प बात यह है कि लैब-ग्रोन हीरे पूरी तरह से प्राकृतिक हीरों की जगह नहीं ले रहे हैं. इसके बजाय, दोनों अपनी जगह बना रहे हैं. रोजमर्रा के पहनने, खुद के लिए खरीदारी और डिजाइन वाले गहनों के लिए लैब-ग्रोन तेजी से पहली पसंद बन रहा है. शादियों और विरासत के पलों के लिए प्राकृतिक हीरे अभी भी भावनात्मक महत्व रखते हैं. वर्लास के स्पोक्सपर्सन के मुताबिक, "यह एक हाइब्रिड भविष्य है. प्रत्येक का एक अलग उद्देश्य है."

Advertisement
Advertisement