भ्रष्ट पुलिस अधि‍कारियों को खोज रही योगी की पुलिस

योगी सरकार की कड़ाई के चलते न केवल बड़े पैमाने पर भ्रष्ट पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई है बल्कि‍ भ्रष्ट आइपीएस अधि‍कारियों को भगोड़ा घोषि‍त कर उनपर इनाम भी रखा गया है.

नई भर्ती एक महिला कांस्टेबल को दिसंबर, 2019 में प्रशस्ति पत्र देते योगी (एएनआइ)
नई भर्ती एक महिला कांस्टेबल को दिसंबर, 2019 में प्रशस्ति पत्र देते योगी (एएनआइ)

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़े पुलिस अधि‍कारियों को भी नहीं बख्शा है. यही वजह है कि योगी सरकार की कड़ाई के चलते न केवल बड़े पैमाने पर भ्रष्ट पुलिस कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है बल्कि‍ आइपीएस अधि‍कारियों को भगोड़ा घोषि‍त कर उनपर इनाम भी रखा गया है. महोबा जिले के निलंबित एसपी मणिलाल पाटीदार क्रशर कारोबारी की मौत के मामले में न सिर्फ भगोड़ा घोषित हैं, बल्कि पुलिस उनकी सरगर्मी से तलाश भी कर रही है. भ्रष्टाचार के संगीन मामले में डीआइजी अरविंद सेन और डीआइजी दिनेश चंद्र दुबे निलंबित किए जा चुके हैं. अगस्त में हुए कानपुर के बहुचर्चित बिकरू कांड में पुलिसकर्मियों ने ही खुद अपनों की ही मुखबिरी की और पूरे महकमे को शर्मसार किया था. बिकरू कांड में सात पुलिसकर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. ऐसी घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गड़बड़ी करने वाले पुलिस अधि‍कारियों और कर्मचारियों पर बेहद सख्त हुए हैं. इस वर्ष एक जनवरी से 31 अक्तूबर के बीच भ्रष्टाचार की शिकायतों पर पुलिसकर्मियों के विरुद्ध 42 मुकदमे दर्ज किए गए हैं. वर्ष 2020 भ्रष्ट पुलिसकर्म‍ियों पर कार्रवाई के लिए भी जाना जाएगा. इस वर्ष आठ आइपीएस अधिकारी अलग-अलग मामलों में निलंबित किए गए हैं. भ्रष्टाचार के ही मामले में आइपीएस अधिकारी हिमांशु कुमार व डॉ.अजय पाल शर्मा के विरुद्ध विजिलेंस मुकदमा दर्ज कर विवेचना कर रही है.

भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने 10 दिसंबर को सीबीसीआइडी के पूर्व एसपी और निलंबित डीआइजी अरविंद सेन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है. सेन पर पशुपालन विभाग में आपूर्ति के नाम पर इंदौर के व्यापारी से करोड़ों रुपये हड़पने के आरोपियों को बचाने के लिए 35 लाख रुपये लेने के आरोप हैं. भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश संदीप गुप्ता ने अपने आदेश में कहा कि सेन लगातार फरार चल रहे हैं और पुलिस की पकड़ से दूर हैं, लिहाजा उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाए. इससे पहले अरविंद सेन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग वाली अर्जी दी गई थी.

विवेचक श्वेता श्रीवास्तव ने कोर्ट में कहा कि इंदौर के व्यापारी और वादी मंजीत सिंह भाटिया उर्फ रिंकू ने 13 जून को हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. इसमें कहा गया था कि अप्रैल 2018 में उनके छोटे भाई के दोस्त वैभव शुक्ला अपने साथी संतोष शर्मा के साथ इंदौर स्थित आवास पर आए और बताया कि पशुपालन मंत्री के करीबी और उपनिदेशक पशुपालन एसके मित्तल व्यापारी को गेहूं, आटा, शक्कर और दाल की सप्लाई का ठेका देना चाहते हैं. आरोपियों ने वादी से 9 करोड़ 72 लाख 12 हजार रुपये लेकर कथित मित्तल से मुलाकात कराई और टेंडर मिलने की सूचना दी, लेकिन ऑनलाइन टेंडर में उसका नाम नहीं था. कोर्ट को बताया गया कि विवेचक ने मुख्य आरोपी आशीष राय से पूछताछ की तो उसने बताया कि जब अरविंद सेन आजमगढ़ में एसपी थे, उसकी तबसे जान-पहचान है. वादी मंजीत भाटिया जब उस पर दबाव बनाने लगा तो आशीष ने अरविंद सेन से मुलाकात की. सेन ने मामला मैनेज करने के लिए 50 लाख रुपये मांगे, लेकिन डील 35 लाख में तय हुई, इसमें 5 लाख रुपये अरविंद सेन के खाते में जमा कराए गए और शेष पैसा बाद में नकद दिया था.

उधर, महोबा के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत के मामले में भगोड़ा घोषित हो चुके पूर्व एसपी मणिलाल पाटीदार की तलाश में महोबा की आठ टीमों के साथ एसटीएफ भी पिछले करीब तीन महीने से हर संभावित स्थान पर दबिशें दे रही हैं. क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी ने पूर्व एसपी मणिलाल पाटीदार पर छह लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए सात सितंबर को सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल किया था. आठ सितंबर को उनके गले में गोली लग गई थी और 13 सितंबर को उनकी मौत हो गई थी. मामले में मृतक के भाई रविकांत ने पूर्व एसपी, पूर्व एसओ, सिपाही व दो व्यापारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था. एसआइटी की जांच में आत्महत्या का मामला सामने आने पर आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करने की धाराएं जोड़ी गई हैं. इस मामले में चार आरोपी जेल जा चुके हैं, पूर्व एसपी की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो सकी है. पाटीदार पर इनाम की राशि 50 हजार की जा चुकी है. क्रशर कारोबारी इंद्रकात त्रिपाठी मामले में पूर्व एसपी मणिलाल पाटीदार फरार चल रहे हैं, जबकि पूर्व थानाध्यक्ष देवेंद्र शुक्ला, सिपाही अरुण यादव, व्यापारी सुरेश सोनी व ब्रह्मदत्त जेल में बंद हैं.

पाटीदार की तलाश में राजस्थान व लखनऊ समेत कई स्थानों पर दबिश देने के बाद मिली सूचना के आधार पर यूपी की पुलिस टीम ने 8 दिसंबर को कर्नाटक में जाकर दबिश दी. पुलिस के एक बड़े अफसर का कहना है कि सूचना मिली थी कि आरोपी एसपी कर्नाटक पहुंच गया है. जानकारी के मुताबिक, उसके दोस्त ने उसे पनाह दी थी. आरोपी की दोस्त से बातचीत होने का भी पता चला है. टीम की पूछताछ में दोस्त आरोपी के बारे में ठोस जानकारी नहीं दे सका. आरोपी एसपी के परिजनों, दोस्त से लगातार पुलिस टीम संपर्क में है. अभी तक मणिलाल पाटीदार  का पता नहीं चला है.

पूर्व एसपी की गिरफ्तारी को लेकर अब स्पेशल टीम गठित करने की तैयारी शुरू हो गई है, ताकि फरार आइपीएस को जल्द गिरफ्तार किया जा सके. प्रयागराज जोन के एडीजी प्रेम प्रकाश ने बताया, “ पूर्व एसपी की तलाश में पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं अफसरों से बातचीत कर स्पेशल टीम बनाई जाएगी.”

भ्रष्टाचार के प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस की नीति के कारण इन मामलों में इंस्पेक्टर से लेकर सिपाही तक पर कार्रवाई डेढ़ गुना अधिक हुई है. वर्ष 2019 में भ्रष्टाचार के मामलों में 160 दोषी अराजपत्रित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की गई थी, जबकि इस वर्ष 250 दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई का चाबुक चला है.

इस साल 31 अक्तूबर तक भ्रष्टाचार के मामले में पुलिसकर्मियों के विरुद्ध 42 मुकदमे दर्ज किए गए हैं और चार पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त भी किया गया. 52 पुलिसकर्मियों को परिनिंदा प्रवष्टि दी गई है. इसके अलावा पुलिस दुर्व्यवहार की शिकायतों में कार्रवाई का दायरा करीब दो गुना बढ़ा है. वर्ष 2019 में पुलिस दुर्व्यवहार के मामलों में 106 दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई हुई थी, जबकि इस वर्ष 263 दोषी पुलिसकर्मियों पर दंडात्मक कार्रवाई की गई है. पुलिस दुर्व्यवहार के 12 मामलों में एफआइआर दर्ज कराए जाने के साथ ही एक आरोपित पुलिसकर्मी को सेवा से बर्खास्त भी किया गया. यूपी के डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी कहते हैं, “पुलिसकर्मियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार से लेकर अन्य शिकायतों तक को पूरी गंभीरता से लेकर जांच कराई जा रही है. दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की गई है. किसी भी मामले में दोषी पुलिसकर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा.”

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