कुछ काम जो सुप्रीम कोर्ट के जज नहीं कर सकते
सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कांफ्रेंस करके बहस छेड़ दी है. जानिए कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ ही वह और क्या नहीं कर सकते. इनमें किसी संगठन का चुनाव लड़ना और शेयर ट्रेडिंग करना भी शामिल

सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीशों का 12 जनवरी को मीडिया से बात करभारत के मुख्य न्यायाधीश पर आरोप लगाना देश-दुनिया में बहस का सबसे बड़ा मुद्दाबना हुआ है. भारत में जजों के आचार व्यवहार के लिए कोई नियम-कानून नहीं है और न हीसंविधान इस पर कुछ कहता है, लेकिन 7 मई 1997 को सुप्रीम कोर्ट नेरिस्टेटमेंट अ़ॉफ वैल्यू अॉफ जूडिशियल लाइफ नाम से एक चार्टर अंगीकार किया था, जिसे 1999 में चीफ जस्टिस कांफ्रेंस मेें सुप्रीम कोर्ट समेत सभीहाइकोर्ट में लागू करने का निर्णय लिया गया. इसी के आधार पर जजों काआचार-व्यवहार तय होता आया है.
जहां तक जजों के नेताओं से मिलने का सवाल है तो इसपर ही नहीं राजनीतिक मसलों पर राय देने पर भी मनाही है. औपचारिक अवसरों या समारोहमें जज नेताओं से मिलते हैं. सुप्रीम कोर्ट के एक जज के घर पर एक नेता के पहुंचनेकी घटना पर कानूनविद् सोली सोराबजी का कहना है कि ये पूरी तरह गलत है.
चार्टर के मुताबिक, जजों के न करने योग्य काम कुछ इस तरह हैंः
1. उच्च न्यायपालिका केसदस्यों का व्यवहार ऐसा होना चाहिए जिससे लोगों का न्यायपालिका के प्रति धारणाखराब न होती हो. जज मीडिया से बातचीत नहीं करेगा. मीडिया को इंटरव्यू नहीं देगा. वहअपने फैसले के जरिए बोलेगा.
2. बार के सदस्यों औरवकीलों से घनिष्ठ संबंध नहीं रखेगा
3. शेयर बाजार या ऐसीही किसी गतिविधि में हिस्सा नहीं लेगा
4. जिन कंपनियों मेंउसने पैसा लगाया है उसके केस नहीं सुनेगा
5. जज किसी खुली बहसमें हिस्सा नहीं लेगा. न ही वह जनता से जुड़े मुद्दों या राजनीतिक मुद्दों पर रायजाहिर करेगा. साथ ही ऐसे मुद्दों पर भी राय जाहिर नहीं करेगा जो कोर्ट में लंबितहैं या विचार के लिए आने वाले हैं.
6. जज किसी क्लब, संगठन का चुनाव नहीं लड़ेगा.
7. जज अपने मित्रोंऔर पारिवारिक रिश्तेदारों के अलावा किसी से कोई गिफ्ट नहीं लेगा.
8. ऐसे केसों कीसुनवाई नहीं करेगा जिसमें उसके मित्र-रिश्तेदार शामिल हों.
फिलहाल चार्टर के प्रावधान से ही जजों का व्यवहार तय होता है. इसकेअलावा न्यायिक जवाबदेही विधेयक जरूर संसद में लाया गया लेकिन सरकार का वह प्रयाससिरे नहीं चढ़ सका.

