दुनिया की सबसे बड़ी ड्यूटी फ्री कॉलोनी बनाने के पीछे चीन का क्या मकसद है?

चीन ने सिंगापुर से 50 गुना बड़े हैनान द्वीप क्षेत्र को पूरी तरह से ट्रेड फ्री करने का फैसला किया है

चीन ने हैनान द्वीप को किया टैरिफ फ्री
चीन ने हैनान द्वीप को किया टैरिफ फ्री

एक ओर अमेरिका दुनिया भर से आने वाले सामानों पर टैरिफ लगा रहा है. वहीं, दूसरी ओर चीन ने सिंगापुर से 50 गुना ज्यादा बड़े हैनान क्षेत्र को टैरिफ फ्री करने का फैसला किया है.

इसके लिए चीन हैनान द्वीप पर 113 अरब डॉलर का मुक्त व्यापार प्रयोग करेगा. ऐसा करके चीन इसे देश का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र, और एकमात्र मुक्त व्यापार बंदरगाह के रूप में इसे विकसित करेगा.

चीन ने इस फैसले से ना सिर्फ दुनिया को हैरान किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि वह टेक्नोलॉजी और व्यापार के क्षेत्र में अनोखे तरीकों से प्रयोग कर रहा है.

इस द्वीप का अपना कस्टम और टैक्स डिपार्टमेंट

दिसंबर 2025 में चीन ने हैनान द्वीप में विशेष सीमा शुल्क अभियान शुरू किया है, जिसके तहत 74 फीसद वस्तुओं पर किसी भी तरह से कोई टैरिफ नहीं लगेगा. दिल्ली से 25 गुना बड़े और बेल्जियम के बराबर इस द्वीप का अब अपना कस्टम, टैक्स और रेगुलेटरी सिस्टम होगा.

हांगकांग स्थित एशिया टाइम्स ने रिपोर्ट किया है कि चीन में 22 फ्री-ट्रेड जोन हैं, लेकिन हैनान खास होने वाला है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें एक एकीकृत फ्री ट्रेड पोर्ट (FTP) होगा, जिसका अपना कस्टम, टैक्स और रेगुलेटरी सिस्टम होगा.

अधिकांश मुक्त व्यापार क्षेत्र अपने शहर तक ही सीमित रहते हैं और स्थानीय उद्योगों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन हैनान पूरे इलाके में व्यापार का बड़ा केंद्र बन सकता है.

चीन के इस फैसले का क्या असर होगा?

एशिया टाइम्स के मुताबिक, चीन का टैरिफ फ्री यह द्वीप दूसरे देशों के लिए कुछ बेहतरीन सौदे पेश कर सकता है, जैसे कि आईफोन यहां 100 डॉलर तक सस्ता हो सकता है. 

अब तक, हैनान अपने समुद्र तटों और रिसॉर्ट्स के लिए जाना जाता था, लेकिन बीजिंग के मुक्त व्यापार क्षेत्र (FTZ) फैसले के कारण यह द्वीप चीनी बाजार के लिए सबसे आकर्षक प्रवेश द्वारों में से एक बन सकता है.

चीनी सरकारी समाचार एजेंसी ने पिछले सपताह सरकार के इस कदम की घोषणा करते हुए हैनान को क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड पोर्ट बताया, जो विदेशी वस्तुओं के अधिक मुक्त प्रवेश, शून्य-टैरिफ और व्यापार को बढ़ावा देने वाली सभी परिस्थिति उपलब्ध करवाता है.

निवेश का बड़ा केंद्र बन रहा है हैनान

विदेशी कंपनियां पहले से ही हैनान में निवेश बढ़ा रही हैं. हांगकांग स्थित बैस्टिल पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, द्वीप पर नई सीमा शुल्क पहल के पहले दिन सीमेंस एनर्जी ने हैनान में एक सहायक कंपनी स्थापित की. इसके साथ ही इस कंपनी ने यहां यांगपु आर्थिक विकास क्षेत्र में एक गैस टरबाइन असेंबली बेस और सेवा केंद्र का निर्माण शुरू किया.

पिछले पांच वर्षों में हैनान में लगभग 14.6 अरब डॉलर का विदेशी निवेश हुआ है, जो औसतन 14.6 फीसद वार्षिक दर से बढ़ रहा है. बैस्टिल पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस  दौरान, 8,000 से अधिक विदेशी कंपनियों ने पूरे द्वीप में अपना केंद्र स्थापित किया है. 2020 से इस द्वीप ने 176 देशों और क्षेत्रों के निवेशकों को भी आकर्षित किया है.

फ्री टैरिफ के जरिए चीन हैनान को कैसे आगे बढ़ा रहा है?

हैनान के नए सीमा शुल्क यानी टैरिफ फ्री व्यापार के नियम कई मायनों में व्यापार को आसान और सस्ता बनाते हैं. सबसे पहले, सभी टैरिफ कैटेगरी में छूट प्राप्त वस्तुओं का हिस्सा 21 फीसद से बढ़कर लगभग 74 फीसद हो जाता है, जिसमें अधिकांश औद्योगिक उपकरण और आवश्यक कच्चा माल शामिल हैं. इससे आयातकों की लागत में लगभग 20 फीसद की कटौती हो सकती है.

इसके अलावा, 30 फीसदी लोकल वैल्यू रूल भी यहां लागू है. इसका अर्थ है कि जिस प्रोडक्ट का कम-से-कम 30 फीसद हिस्सा हैनान में बना हो या यहां उस चीज की प्रोसेसिंग हुई हो. वे चीन के मुख्य भूमि यानी चीन के बाकी हिस्से में ड्यूटी फ्री होंगे. इसका मतलब यह है कि चीन चाहता है कि हैनान द्वीप विनिर्माण और सप्लाई चेन के लिहाज से बड़ा केंद्र बने.

हैनान में रजिस्टर्ड और काम करने वाली कंपनियां चीन के बाकी हिस्से की कंपनियों के 25 फीसद और हांगकांग की कंपनियों के 16.5 फीसद की तुलना में केवल 15 फीसद कॉर्पोरेट टैक्स का भुगतान करती हैं. यहां खारे पानी को मीठा बनाने वाली कंपनियों से लेकर स्पेस लॉन्चिंग और फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के प्लांट हैं.  

रिपोर्ट्स बताती हैं कि चीन ने यहां के कामगारों को सबसे बड़ी रियायत दी है. हैनान की टैलेंट कैटलॉग में सूचीबद्ध यहां काम करने वाले कुशल पेशेवरों को केवल 15 फीसद आयकर देना होगा, जो चीन की 45 फीसद की उच्चतम दर से काफी कम है.

इस तरह चीन सरकार इस क्षेत्र में उत्पादकता को कम करने वाली प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर यहां से सीमा पार व्यापार में तेजी लाने की कोशिश कर रही है.

घटते FDI के बीच चीन का साहसिक कदम

इस कदम से चीन को लेकर बाजार के विचार बदले हैं और मजबूत पूंजी प्रवाह के कारण 22 दिसंबर को चीन और हांगकांग के शेयरों में तेजी आई. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हैनान में दिए गए एक भाषण में चीनी उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग ने स्थानीय अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इस मुक्त व्यापार बंदरगाह (FTP) को चीन के वैश्विक खुलेपन के नए युग के प्रवेश द्वार के रूप में बदल दें.

पोलित ब्यूरो के सदस्य और चीन के शीर्ष आर्थिक अधिकारियों में से एक लिफेंग ने इस परियोजना को कम्युनिस्ट पार्टी के जरिए देश और दुनिया की समग्र स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया एक प्रमुख रणनीतिक फैसला बताया है.

बीजिंग के इस कदम (हैनान को दुनिया का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड पोर्ट बनाने) से उम्मीद की जा रही है कि 2025 की पहली तीन तिमाहियों में चीन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में दर्ज 10 फीसद से ज्यादा की गिरावट को पलटा जा सके. यही वजह है कि इस फैसले को 2026 के लिए चीन की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक माना जा रहा है. वे

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