उत्तर प्रदेश की गन्ना पट्टी में किसके हिस्से आएगी मिठास?
उत्तर प्रदेश की राजनीति देश के सिंहासन पर बैठने वाले की किस्मत तय करती है. लेकिन पश्चिम उत्तर प्रदेश यानी गन्ना बेल्ट में राजनीति का अलग ही मिजाज़ है. देखिए सीटवार सपा-बसपा बनाम भाजपा की टक्कर का समीकरणः

उत्तर प्रदेश की राजनीति देश के सिंहासन पर बैठने वाले की किस्मत तय करती है. लेकिन पश्चिम उत्तर प्रदेश यानी गन्ना बेल्ट में राजनीति का अलग ही मिजाज़ है. भाजपा से टक्कर लेने के लिए सपा-बसपा ने गठजोड़ करके सीटों का बंटवारा किया, तो पश्चिम उत्तर प्रदेश में आऩे वाली 22 लोकसभा सीटों में से ज्यादातर सीटें बहुजन समाज पार्टी के खाते में गई है. 11 सीटों पर बहुजन समाज पार्टी (गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, मेरठ-हापुड़, बुलंदशहर, आगरा, फतेहपुर सीकरी, सहारनपुर, अमरोहा, बिजनौर, नगीना और अलीगढ़) चुनाव लड़ेगी. जबकि 8 सीटों पर समाजवादी पार्टी (हाथरस, कैराना, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, मैनपुरी, फिरोजाबाद और एटा) और बाकी की 3 सीटें राष्ट्रीय लोक दल (बागपत, मुजफ्फरनगर और मथुरा) के हिस्से में गई है.
सपा-बसपा गठबंधन में तीसरी पार्टी के रूप में राष्ट्रीय लोकदल का प्रवेश हुआ है. सपा-बसपा गठबंधन ने रालोद को पहले 2 सीटें देने की बात कही थी, जिस पर अजित सिंह राज़ी नहीं थे. वो चार सीटों की लगातार मांग रहे थे. इसको लेकर बुधवार को रालोद नेता जयंत चौधरी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ लखनऊ में बैठक हुई थी. इसी दौरान सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय हुआ, जिसमें रालोद को बागपत, मथुरा और मुजफ्फरनगर सीटें देना तय हुआ है. इस तरह से रालोद को तीसरी सीट सपा को अपने कोटे से देनी होगी.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश कि कमान ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंपी है. सिंधिया ने अभी सीटों के बंटवारे पर कोई बयान नहीं दिया है पर कांग्रेस महान दल के नेता कैशव देव मौर्या से गठबंधन कर यह इशारा दिया है कि कांग्रेस भी तैयारी में पीछे नहीं है.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पांच मुख्य लोकसभा सीटें मेरठ, मुज़फ्फरनगर, सहारनपूर, गाज़ियाबाद और बिजनोर है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सैनी, कश्यप, गुर्जर, जाट, कोरी, जोगी, बिंद, प्रजापति समेत 30 ओबीसी जातीया है जिन्होनें भजपा की जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी. लेकिन इस बार युवाओं और किसानो में सूलगती नराज़गी, मुस्लिम-अनूसूचित मतों का एक साथ आना, विपक्षी घेराबंदी और भाजपा के अंदरुनी घमासान से भगवा खेमा परेशान है.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुख्य लोकसभा सीटों आकलन करने पर भाजपा पहले पायदन पर रही, लेकिन सपा-बसपा को 2014 लोकसभा चुनाव में बहुत कम हाशिए से हार का मुंह देखना पड़ा. आंकड़ो को आसानी समझने के लिए मुख्य लोकसभा सीटों के 2014 लोकसभा चुनाव के आंकड़ो को अलग-अलग करके देखा गया है.
मेरठ लोकसभा क्षेत्र में भाजपा को 47.86 फीसदी वोट शेयर मिला, बसपा को 27 फीसदी वोट शेयर मिला, सपा को 19.01 फीसदी वोट शेयर और कांग्रेस को 3.85 फीसदी वोट शेयर मिला. सपा-बसपा का वोट शेयर 46.01 रहा जो कि भाजपा से 0.85 फीसदी कम था.
मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा ने 58.98 फीसदी वोट शेयर पर कब्ज़ा किया वहीं बसपा 22.77 फीसदी वोट शेयर पर और सपा 14.52 फीसदी वोट शेयर पर सिमटी. यहा सपा-बसपा का वोट शेयर 37.29 ही रहा.
बिजनौर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा ने 45.92 फीसदी वोट शेयर से बाज़ी जीती . सपा का वोट शेयर 26.51 फीसदी और बसपा का वोट शेयर 21.70 फीसदी रहा जो कि कुल मिलाकर 48.21 फीसदी भाजपा के वोट शेयर 2.27 फीसदी अधिक था.
सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा ने जीत तो दर्ज की, लेकिन विपक्षी दलो भी बहुत कम अंतर से पीछे रहे. भाजपा का वोट शेयर 39.59 फीसदी रहा कांग्रेस का वोट शेयर 34.14 फीसदी था. बसपा वोट शेयर 19.67 रहा और सपा तो 4.42 फीसदी वोट शेयर पर ही सिमट गई.
गाज़ियाबाद लोकसभा क्षेत्र में भाजपा ने 56.50 फीसदी वोट शेयर के साथ अपना परचम लहराया और कांग्रेस 14.24 फीसदी वोट शेयर, बसपा 12.89 फीसदी वोट शेयर और सपा 7.97 फीसदी वोट शेयर के हार का स्वाद चखा.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा औपचारिक तोर पर गठबंधन और सीटों का ऐलान कर चुकी है जो भाजपा को 2019 लोकसभा चुनाव में कड़ी चुनौती दे सकता है क्योकि भाजपा के पास 2014 लोकसभा चुनाव में 80 में से 71 सीटें (वर्तमान में 68 सीटें) है. भाजपा ने 2018 में अपनी 3 लोकसभा सीटें फूलपुर, कैराना और गोरखपुर गठबंधन के कारण ही खोई थी और 2014 लोकसभा चुनाव के आंकड़ो के मुताबिक सपा-बसपा दोनों का कुल वोट या तो भाजपा से आगे रही है या बहुत कम अंतर से हारी है. यानी, चुनाव में अंकगणित के हिसाब से नतीजे आए तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए खतरे की घंटी बज गई है.
(आकील हुसैन आइटीएमआइ के छात्र हैं और इंडिया टुडे में प्रशिक्षु हैं)
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