परमबीर ‌सिंह का उत्थान और पतन

अंबानी को धमकी के मामले की उचित ढंग से पड़ताल न कराने के लिए आलोचना का शिकार हुए मुंबई पुलिस आयुक्त को हाल में पद से हटा दिया गया. उनके करियर के उत्थान और पतन का जायजा.

परमबीर सिंह (फोटोः अंशुमान पोयरेकर/एचटी फोटो)
परमबीर सिंह (फोटोः अंशुमान पोयरेकर/एचटी फोटो)

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 17 मार्च को परमबीर ‌सिंह को मुंबई पुलिस के आयुक्त के प्रतिष्ठित पद से स्थानांतरित कर दिया. मुकेश अंबानी को धमकी के मामले की ठीक से जांच न करवाने की वजह से उनकी आलोचना हो रही थी. परमबीर ‌सिंह की जगह 1987 बैच के आइपीएस अधिकारी हेमंत नगराले को नियुक्त किया गया है. ऐंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक रजनीश शेठ कार्यकारी पुलिस महानिदेशक के तौर पर नगराले की जगह लेंगे. इस बीच परमबीर सिंह को अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण होम गार्ड्स का डीजी नियुक्त किया गया है. माना जाता है कि परमबीर सिंह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार की पसंद थे, जिन्होंने ठाकरे को नगराले की वरिष्ठता को नजरअंदाज करते हुए 1 मार्च, 2020 को परमबीर सिंह को नियुक्त करने के लिए राजी कर लिया था.

अंबानी के मुंबई स्थित आवास पर 25 फरवरी को विस्फोटक लदी गाड़ी खड़ी करना, उसके बाद गाड़ी के मालिक की हत्या और फिर इस मामले में भूमिका के लिए क्राइम ब्रांच के पुलिस अधिकारी सचिन वाझे की गिरफ्तारी—यह सब परमबीर सिंह के मुंबई पुलिस प्रमुख रहते हुआ और पुलिस की काफी किरकिरी हो रही है. पिछली बार मुंबई पुलिस इतने बड़े विवाद में 2003 में तब आ गई थी जब पुलिस आयुक्त आर.एस. शर्मा को गिरफ्तार किया गया था. उन पर फर्जी स्टांप पेपर मामले में मुख्य अभियुक्त अब्दुल करीम तेलगी को कथित तौर पर बचाने का आरोप लगा था. (शर्मा 2007 में सबूतों के अभाव में बरी कर दिए गए.)

गौरवशाली दौर

परमबीर सिंह 2008 में आतंकवाद रोधी दस्ते के अतिरिक्त आयुक्त के रूप में सुर्खियों में आए. मालेगांव विस्फोट मामले की जांच के बाद उन्होंने दो प्रमुख अभियुक्तों—साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित—को गिरफ्तार करके वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छा गए. साध्वी प्रज्ञा के परिवार ने आरोप लगाया कि उन्होंने हिरासत के दौरान खुद उनको शारीरिक यातना दी और उन्हें गलत ढंग से इस मामले में शामिल कर दिया. परमबीर सिंह ने 2015 में उस समय फिर अपनी काबिलियत साबित की जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने उन्हें थाणे का पुलिस आयुक्त नियुक्त किया. उनके मातहत थाणे पुलिस ने फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल रैकेट, फर्जी सिम कार्ड घोटाला और यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय नार्कोटिक्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने समेत कई मामलों को सुलझाया. परमबीर सिंह ने ही 2019 में पुणे में एल्गार परिषद मामले में पांच एक्टिविस्ट को गिरफ्तार किया, जिसमें सरकार के खिलाफ 31 दिसंबर, 2017 को भड़काऊ भाषण दिए गए थे. इससे उनकी खूब वाहवाही हुई.

एक नजर मुंबई पर

परमबीर सिंह हमेशा से मुंबई पुलिस का आयुक्त बनना चाहते थे. उन्होंने पत्रकारों के साथ बातचीत में इसकी ओर बार-बार जिक्र किया. फड़णवीस ने जब 2019 में तत्कालीन आयुक्त संजय बर्वे को तीन महीने का सेवा विस्तार दिया तो बताया जाता है कि परमबीर ‌सिंह गुस्से से भड़क गए थे और अपने घर के बर्तनों को तोड़ दिया था.

जब परमबीर ‌सिंह की इच्छा पूरी हुई तो पूरा देश कोविड की चपेट में आ चुका था. उन्होंने पहला हाइ-प्रोफाइल सितंबर 2020 में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या का मामला हैंडल किया. इस मामले में एफआइआर दर्ज न करने को लेकर काफी बहस हुई, लेकिन जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने इस मामले में कुछ भी संदेहास्पद नहीं पाया तो परमबीर सिंह की परेशानी कम हुई.

बिखर गए हालात

परमबीर सिंह पर अब आरोप है कि वे वाझे को बचा रहे थे. वाझे फिलहाल राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की हिरासत में हैं. एनआइए ने दावा किया है कि वाझे अपनी अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए मर्सिडीज कार—जिसमें उन्हें पांच लाख रुपए और नोट गिनने की मशीन मिली—का इस्तेमाल कर रहे थे. इस कार को वे आयुक्त के दफ्तर में खड़ी करते थे.

एक वरिष्ठ मंत्री का कहना है कि वाझे अपने विभाग के प्रमुख संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) मिलिंद भारांबे को नजरअंदाज करके सीधे परमबीर सिंह को रिपोर्ट करते थे. फड़णवीस का कहना है कि महाराष्ट्र विकास आघाड़ी का कोई नेता अंबानी के खिलाफ साजिश रच रहा है. उन्होंने 17 मार्च को दिल्ली में कहा, ‘‘परमबीर सिंह और सचिव वाझे छोटे लोग हैं. सरकार का कोई व्यक्ति उन्हें नियंत्रित कर रहा था.’’

नई चुनौतियां

नगराले का काम स्पष्ट है. मुंबई पुलिस के 1987 बैच में शामिल होने से पहले उन्होंने वीआरसीई नागपुर में मेकैनिकल इंजीनियरिंग का प्रशिक्षण लिया. वे 26 नवंबर, 2008 की रात को मुंबई हमले के दौरान वारदात की जगह पहुंचने वाले पहले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी थे. तब एमएसईबी के सतर्कता निदेशक नगराले अपनी सरकारी पिस्तौल लेकर लिपोल्ड कैफे पहुंच गए. आतंकी इस लोकप्रिय फूड जॉइंट पर अंधाधुंध फायरिंग करते हुए ताज महल होटल में घुस गए. नगराले पुलिस के जवानों को लेकर होटल में चले गए और आधी रात को नौसेना के मरीन कमांडो के आने तक वहीं डटे रहे. सरकार के एक सूत्र का कहना है कि ठाकरे ने नगराले को मुंबई पुलिस की छवि ठीक करने और उत्साह बढ़ाने को प्राथमिकता देने के लिए कहा है.

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