इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग जोन बनेंगे नोएडा-ग्रेटर नोएडा-यमुना एक्सप्रेसवे
राज्य सरकार नई इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2020 का खाका खींच रही है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र को तेजी से बढ़ावा देने की कार्ययोजना पर काम हो रहा है.

चीन में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के बाद बड़े पैमाने पर वहां लगी फैक्ट्रियों के दूसरे देशों में पलायन करने की तैयारी है. इसी आहट पाते ही प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भी इन कंपनियों को यूपी में आकर्षित करने की तैयारी में जुट गई है. राज्य सरकार नई इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2020 का खाका खींच रही है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र को तेजी से बढ़ावा देने की कार्ययोजना पर काम हो रहा है. इसके लिए पूरे नोएडा-ग्रेटर नोएडा-यमुना एक्सप्रेसवे, लखनऊ-कानपुर-उन्नाव और बुंदेलखंड को इलेक्ट्रानिक मैन्युफैक्चरिंग जोन के रूप में चिन्हित करने की योजना है.
राज्य सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग जोन के जरिए करीब 40 हजार करोड़ रुपए का निवेश और चार लाख नौकरी आने की उम्मीद लगाई है. यह नई पॉलिसी उस इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी का मेकओवर है जिसे योगी सरकार ने वर्ष 2017 में लॉन्च किया था. इसके अलावा प्रदेश सरकार जेवर एयरपोर्ट के समीप इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग पार्क स्थापित करने की योजना भी तैयार कर रही है. इस पार्क में चीन से उद्योग हटाने वाली कंपनियों को बसाने के लिए आकर्षक लाभ दिए जाएंगे. उद्योग विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि नए बनने वाले जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास इलेक्ट्रॉनिक सिटी बसाने की योजना एक सधी रणनीति का हिस्सा है. विश्व में शायद ही कोई जगह हो जहां इस तरह के नए बन रहे अंतरराट्रीय हवाई अड्डे के पास इतनी जमीन हो जहां पर इलेक्ट्रॉनिक सिटी बसाइ जा सके.
नई बन रहीं पॉलिसी में इलेक्ट्रानिक मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को दो सौ करोड़ रुपये के निवेश पर दस करोड़ का इनसेंटिव देने की तैयारी की जा रही है. इसके अलावा दो सौ करोड़ से एक हजार करोड़ रुपए का निवेश करने पर अधिकतम इनसेंटिव दिया जाएगा. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए जमीन का इंतजाम करने के लिए भी सरकार सब्सिडी का प्रावधान करने की योजना बना रही है.
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