दुनिया भर में धमाल मचाएंगे यूपी में बने मोबाइल

पिछले ढाई वर्षों के दौरान यूपी में एक ‘इन्वेस्टर्स समिट’ और दो ‘ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी’ करवा चुके औद्योगिक विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री सतीश महाना अगले वर्ष लखनऊ में ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ कराने का खाका खींचने में व्यस्त हैं. अगले वर्ष अक्टूबर माह में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ के लिए सतीश महाना की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ 24 दिसंबर को बैठक होनी है. लखनऊ में विधानभवन स्थित अपने कक्ष में अधिकारियों के साथ बैठक की तैयारियों में जुटे सतीश महाना ने 23 दिसंबर की शाम ‘इंडिया टुडे’ के असिस्टेंट एडिटर आशीष मिश्र से बातचीत की.

फोटोः आशीष मिश्र
फोटोः आशीष मिश्र

पिछले ढाई वर्षों के दौरान यूपी में एक ‘इन्वेस्टर्स समिट’ और दो ‘ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी’ करवा चुके औद्योगिक विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री सतीश महाना अगले वर्ष लखनऊ में ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ कराने का खाका खींचने में व्यस्त हैं. अगले वर्ष अक्टूबर माह में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ के लिए सतीश महाना की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ 24 दिसंबर को बैठक होनी है. लखनऊ में विधानभवन स्थित अपने कक्ष में अधिकारियों के साथ बैठक की तैयारियों में जुटे सतीश महाना ने 23 दिसंबर की शाम ‘इंडिया टुडे’ के असिस्टेंट एडिटर आशीष मिश्र से बातचीत की.

-यूपी में उद्योगों के लिए बने महौल को आप कैसा आंकते हैं? 

पिछली सरकारों में यूपी में उद्योगों के लिए कोई महौल नहीं था. हमारी सरकार ने जीरो से नहीं माइनस से शुरुआत की है. उद्योगपतियों को यह विश्वास दिलाना कि यूपी निवेश के लिए एक अच्छा ‘डेस्टीनेशन’ हो सकता है, यह एक बड़ी चुनौती थी. बसपा सरकार में तो रिलायंस के स्टोर ही लूट लिए गए थे. मंत्री बनने के बाद जब मैं रिलायंस के मालिक मुकेश अंबानी से मिला तो वह बोले कि उन्होंने कसम खाई है कि वह यूपी में निवेश नहीं करेंगे. 

भाजपा सरकार ने कानून व्यवस्था, बिजली व्यवस्था ठीक की. हमने अन्य प्रदेशों में उद्योगों के लिए नीति बनाई. जीएसटी से भी यूपी में निवेश का माहौल बना. हर प्रदेश में टैक्स की दरें समान हो गईं. इससे शुरुआत हुई. हमारी सरकार एक ‘इन्वेस्टर्स समिट’ और दो ‘ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी’ कर सकी है. पिछले एक साल में हमने चार बार उन उद्योगपतियों के साथ बैठक की जो ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में शामिल हुए थे. उद्योगपतियों की सहूलियतों के लिए हमारी सरकार निवेश मित्र लेकर आई. डिफेंस कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे का नेटवर्क जो बनरहा है उसने यूपी में निवेश का महौल तैयार किया है.

-उद्योगपतियों को सहूलियतें देने में आपकी सरकार के अधिकारी अड़ंगा लगा रहे हैं?

जो अधिकारी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं उनपर सख्त कार्रवाई की गई है. यूपी में उद्योगों के लिए महौल बनाने में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है. डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में सरकार 25 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है. कोई दूसरा राज्य इतनी सब्सिडी नहीं दे रहा है. पूरे प्रदेश में कहीं भी डिफेंस इंडस्ट्री लगाने पर सरकार रजिस्ट्रेशन फीस में 100 फीसदी की छूट दे रही है. रिसर्च एंड डेवलेपमेंट और ट्रांसपोर्ट के लिए भी सहूलिएतें देने का निर्णय सरकार ने लिया है. बड़े उद्योगपतियों के लिए यह मायने नहीं रखता कि उन्हें कितनी सब्सिडी मिल रही है उनके लिए मायने यह है कि उद्योगों के जरूरी काम कितनी आसानी से हो जा रहे हैं. इसके लिए सरकार ने ‘ईज ऑफ डुइंग बिजनेस’ के तहत कई तरह की योजनाएं शुरू की हैं. 

-इन्वेस्टर्स समिट और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी का नतीजा जमीन पर नहीं दिख रहा है?

सरकार ने 81 इंडस्ट्री की ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की थी इनमें से 36 का कामर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो गया है. तीन इंडस्ट्री वापस चली गई. ये नियम से ज्यादा सहूलियतें मांग रही थीं. बाकी में निर्माण कार्य चल रहा है.

-किस समय तक यूपी हुआ निवेश स्पष्ट दिखने लगेगा? 

इसकी कोई डेडलाइन नहीं होती है. यह कोई सरकारी काम नहीं है जो एक महीने में खत्म कर देंगे. जो उद्योगपति पैसा लगा रहा है वह भी जल्द से जल्द  इसका रिटर्न चाहता है. हां, सरकारी स्तर पर स्वीकृतियां, लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने में कोई विलंब नहीं हो रहा है.

-सरकारी नियम भी कई उद्योगों के स्थापना में आड़े आ रहे हैं? 

सरकार की पॉलिसी है कि वह नोएडा ग्रेटर नोएडा में उद्योगों को स्टांप ड्यूटी में 50 फीसदी की ही छूट दे सकती है. पतंजलि सौ फीसदी की मांग कर रही है. अब इसका प्रस्ताव कैबिनेट में लाकर जरूरी व्यवस्था कराएंगे. ऐसे ही हमने टीसीएस, पेप्सिको जैसी कंपनियों को यूपी में निवेश करने के लिए मनाया है.

-यूपी में उद्योगों के लिए माहौल न होने से यहां के प्रतिभाशाली इंजीनियर व अन्य छात्र दूसरे प्रदेशों में नौकरी के लिए चले गए. क्या ऐसे लोगों को यूपी में लाने का कोई प्रयास होगा? 

हम उद्योगपतियों के लिए ऐसी कोई बाध्यता लागू नहीं कर सकते हैं. सरकार पर बड़ा दबाव पड़ा कि वह अपनी नीति में ऐसी व्यवस्था करे कि उद्योगों में यूपी के रहने वालों को ही नौकरियों में प्राथमिकता मिले. सरकार ऐसा नहीं कर सकती है. हम केवल उद्योगपतियों को सलाह दे सकते हैं.

-किस क्षेत्र में उद्योगपतियों ने रुचि दिखाई है?

उपभोक्ता बाजार की दृष्टिï से यूपी देश में सबसे बड़ा है. आईटी सेक्टर की कई कंपनियां यहां अपने सेंटर स्थापित करने जा रही हैं. फर्नीचर बनाने वाली कंपनी ‘आइकिया’ नोएडा में देश का सबसे बड़ा शोरूम खोल रही है. पश्चिम में कोसी, मथुरा में फूडप्रोसेसिंग, पूर्वांचल में सीमेंट के उद्योग स्थापित करने के लिए कंपनियां आगे आई हैं. 

बिजली क्षेत्र में बहुत सारे उद्योगपति निवेश करना चाहते हैं लेकिन सरकार की एक सीमा है. इतनी सारी बिजली हम रखेंगे कहां? ग्रिड की भी तो एक निर्धारित क्षमता है. सब कंपनियों से पॉवर परचेज एग्रीमेंट नहीं कर सकते हैं. अयोध्या का मसला हल होने के बाद यहां पर होटल लगाने के लिए कई कंपनियों ने संपर्क किया है. प्रदेश में टूरिज्म से जुड़े उद्योगों के लिए बहुत अच्छा अवसर है. विश्व में मोबाइल बनाने वाली सभी बड़ी कंपनियों को हमने यूपी में यूनिट लगाने के लिए जगह दी है. नोएडा देश का सबसे बड़ा ‘मोबाइल मेनुफैक्चरिंग हब’ बनकर उभर रहा है. यहां पर सैंमसंग ने विश्व की सबसे बड़ी मोबाइल मेनुफैक्चरिंग यूनिट लगाई है जहां साल भर में 12 करोड़ मोबाइल बनेंगे. कई देशों की तो आबादी भी 12 करोड़ नहीं है. यूपी के मोबाइल दुनिया भर में धमक दिखाएंगे.

सरकार इलेक्ट्रॉनिक गाडिय़ों को बढ़ावा दे रही है लेकिन इसके लिए जरूरी इंतजाम ही नहीं है?

नई व्यवस्था बनाने में थोड़ा समय लगता है. इलेक्ट्रॉनिक बसों के लिए सरकार 40 लाख रुपए की सब्सिडी दे रही है. यूपी में स्मार्ट सिटी के तहत दस शहरों में एक हजार इलेक्ट्रानिक बसें चलाने को अनुमति दी है. इलेक्ट्रानिक वाहनों में सबसे ज्यादा बैटरी की चार्जिंग की चुनौती है. सरकार कई स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन की स्थापना करने जा रही है. सरकार इसके लिए सब्सिडी भी देगी.

-ज्यादा सब्सिडी देने से सरकार की आमदनी ही कम होगी?

उद्योगों से जीएसटी के रूप में जो टैक्स मिलेगा उसमें से ही एक हिस्सा सब्सिडी के रूप में वापस कर दिया जाएगा. इसमें सरकार का कोई नुकसान नहीं है. हम उद्योगों को जो बिजली बेच रहे हैं उससे कमाई तो कर रहे हैं. इसके बदले उद्योग रोजगार देंगे. जब उद्योग ही नहीं होंगे तो किसी को कुछ भी नहीं मिलेगा.

-हिंसा नागरिकता पर हिंसा से नुकसान नहीं होगा

हिंसा में शामिल लोग सबका नुकसान कर रहे हैं. इससे यूपी में आने वाले निवेश पर असर तो पड़ेगा. सरकार महौल खराब करने वालों से सख्ती से निपट रही है.

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