यूपी में आइसोलेशन वार्ड में अब सेल्फी लेंगे डॉक्टर
वरिष्ठ डॉक्टरों को अब पूरे एहतियात के साथ आइसोलेशन वार्डों में जाना अनिवार्य हो गया है. डॉक्टरों को वार्ड में जाकर अपने कैमरे से सेल्फी लेकर व्हाट्सऐप के जरिए अस्पताल के इंचार्ज को भेजनी होगी.

उत्तर प्रदेश में सरकारी कोविड अस्पतालों कोरोना संक्रमित के इलाज में लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों पर शिकंजा कसा है. कई जगह से ऐसी शिकायतें आ रही थीं कि सुरक्षा के सारे सामान मिलने के बाद भी डॉक्टर कोविड अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में नहीं जाकर पैरामेडिकल कर्मचारियों और सफाई कर्मचारियों के जरिए मरीजों की जांच कर रहे हैं. प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अब इन डॉक्टरों की निगरानी के लिए नए नियम जारी किए हैं.
वरिष्ठ डॉक्टरों को अब पूरे एहतियात के साथ आइसोलेशन वार्डों में जाना अनिवार्य हो गया है. डॉक्टरों को वार्ड में जाकर अपने कैमरे से एक सेल्फी लेकर व्हाट्सऐप के जरिए अस्पताल के इंचार्ज को भेजनी होगी. इंचार्ज इसे आगे अधिकारियों को भेजेगा. कोविड अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड में जाकर डॉक्टरों को सभी को मरीजों का हालचाल पूछना होगा. लक्षण जानने होंगे. लक्षणों को जानने के बाद उनके लिए दवाएं लिखनी होंगी, जो नर्स लाकर देंगी.
दूसरे बड़े बदलाव के तहत अब डॉक्टरों का क्वारंटीन समय कम कर दिया गया है. पहले डॉक्टर सात दिन काम करने के बाद 14 दिन पैसिव क्वारंटीन (होटल) में रहते थे. बाद में घर जाते थे. इसके बाद ऐक्टिव क्वारंटीन (ड्यूटी) की समय सीमा बढ़ाकर 14 दिन की गई है. इन दिनों डॉक्टरों को गेस्ट हाउस या होटलों में रखा गया. इसके बाद 14 दिन तक पैसिव क्वारंटीन में रखा गया. यानि क्वारंटीन का समय कुल 28 दिन था. अब इसे भी बदल दिया गया है. अब डॉक्टर ड्यूटी के आखिरी यानी 14वें दिन कोविड की जांच कराएंगे. टेस्ट निगेटिव आने पर उन्हें दो दिन के लिए घर भेज दिया जाएगा. यहां आराम करने के बाद उन्हें फिर ड्यूटी पर आना होगा. हालांकि इस बार उन्हें कोविड एरिया में ड्यूटी नहीं दी जाएगी. 14 दिन बाद उन्हें जरूरत के मुताबिक, कोविड एरिया में वापस भेजा जा सकता है.
सरकार ने पैरामेडिकल स्टाफ की जिम्मेदारी भी नए सिरे से तय की है. कोविड अस्पताल में तैनात नर्स हर दो घंटे बाद मरीजों का एसपीओटू टेस्ट (ऑक्सीजन का परीक्षण) करेंगी. अगर रीडिंग कम आई तो मरीज को ऑक्सीजन उपलब्ध कराएंगी. ऐसे मरीज पर लगातार निगरानी रखी जाएगी. हर दो घंटे की रीडिंग लगातार नोट की जाएगी. एक दिन में ऑक्सीजन का फ्लो देखने के बाद डॉक्टर इलाज की दिशा तय करेंगे.
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