वरिष्ठता नहीं गुणवत्ता से होगा लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव
संकेत हैं कि वरिष्ठता के आधार पर खुद को लोकसभा अध्यक्ष बनने के योग्य मान रहे भाजपा नेताओं निराशा हाथ लग सकती है.

लोकसभा अध्यक्ष चुने जाने की उम्मीद में बैठे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चौंका सकते हैं. भाजपा संसदीय दल की बैठक में उन्होंने जिस तरह से गुणवत्ता, निपुणता और तत्परता पर सबसे अधिक फोकस करने का मंत्र सांसदों को दिया है उससे साफ है कि सिर्फ वरिष्ठता ही जिम्मेदारी सौंपने का एकमात्र पैमाना प्रधानमंत्री के लिए नहीं है. ऐसे में अपनी वरिष्ठता के आधार पर खुद को लोकसभा अध्यक्ष बनने के योग्य मान रहे भाजपा नेताओं निराशा हाथ लग सकती है.
लोकसभा का नया अध्यक्ष 19 तारीख तक चुना जाना है. भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में मेनका गांघी, राधा मोहन सिंह, वीरेंद्र कुमार (प्रोटेम स्पीकर), पंकज चौधरी, मनसुख भाई वसावा, अनंत हेगड़े जैसे वरिष्ठ नेता हैं जिनके नाम की चर्चा वरिष्ठता के आधार पर लोकसभा अध्यक्ष के रूप में पार्टी में हो रही है. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि निश्चित रूप से ये सभी वरिष्ठ सांसद हैं और संसदीय कार्य का इन्हें काफी अनुभव भी है.
लेकिन कई ऐसे नेता हैं जो वरिष्ठता के आधार पर भले योग्यता नहीं रखते हों लेकिन संसदीय नियमों, कायदों, परंपराओं की उन्हें अच्छी जानकारी है. कुछ ऐसे नेता हैं जो लोकसभा के लिए पहली या दूसरी बार चुने गए हैं लेकिन राज्यसभा में वह पहले रहे हैं.
भाजपा सूत्रों का कहना है कि दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री तथा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह किसी ऐसे व्यक्ति को लोकसभा अध्यक्ष बनाने में रुचि रखेंगे जो सदन की कार्यवाही ठीक प्रकार से संचालित कर सके. अध्यक्ष का व्यक्तित्व ऐसा हो कि उसके निष्पक्षता को लेकर संदेह न हो और जिसका सभी दल के लोग सम्मान करते हों.
मोदी और शाह की पहली कोशिश यह होगी कि सदन में ज्यादा से ज्यादा काम हो सके और कम से कम व्यवधान सदन में हो. ऐसे में मोदी शायद ऐसे व्यक्ति पर भरोसा कर सकते हैं जो इन पैमानों पर खरा उतरता हो.
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