कन्या पूजन नहीं, ‘कोरोनानाशक पूजन’ किया योगी ने
गत वर्ष रामनवमी पर कन्या पूजन करते योगी आदित्यनाथ, कन्या पूजन नहीं, ‘कोरोनानाशक पूजन’ किया योगी ने

उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद भी योगी आदित्यनाथ ने गोरक्षपीठ की परंपरा को पूरी तरह निभा रहे थे. यही वजह थी कि 19 मार्च, 2017 में यूपी के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद लगातार तीन वर्ष चैत्र रामनवमी पर गोरखपुर में कन्या पूजन करने योगी आदित्यानथ की तस्वीरों ने सुर्खियां बटोरी थीं. लेकिन वर्ष 2020 की रामनवमी कोरोना संक्रमण के साए में थी.
समय की जरूरत को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ गोरखपुर न जाकर रामनवमी में लखनऊ में थे. गत वर्षों में रामनवमी पर जिस वक्त योगी आदित्यनाथ ने कन्या पूजन किया था इस बार करीब-करीब उसी समय लखनऊ के पांच कालीदास मार्ग स्थित सरकारी आवास पर मुख्यमंत्री अपनी टीम के 11 वरिष्ठ आइएएस अफसरों के साथ कोरोना से निबटने की योजना तैयार कर रहे थे.
इस बैठक में योगी आदित्यनाथ ने निर्णय लिया कि प्रदेश सरकार ग़रीबों, वृद्घ एवं विधवा महिलाओं, दिव्यांगों, अशक्तों के खातों में कुल मिलाकर 850 करोड़ रूपए एक क्लिक में भेजेगी. मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार बताते हैं “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी नवरात्रि में पूरे नौ दिन व्रत रहे.
इस बार रामनवमी के दिन उन्होंने हवन-पूजा तो की लेकिन कोरोना संकट के चलते कन्या पूजन से परहेज किया. सरकारी आवास पर सुबह ठीक दस बजे उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर कोरोना संकट से निबटने की योजनाओं की समीक्षा की. यह भी एक तरह का कोरोना नाशक पूजन था जो देश-प्रदेश की जनता के लिए बहुत जरूरी था.”
गोरक्षपीठ के लिए नवरात्रि बेहद खास है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पीठ के पीठाधीश्वर भी हैं. पहले दिन से ही वहां अनुष्ठान शुरू हो जाता है.
सारी व्यवस्था मठ के पहली मंजिल पर ही होती है. परंपरा है कि इस दौरान पीठाधीश्वर और उनके उत्तराधिकारी मठ से नीचे नहीं उतरते. पूजा के बाद रूटीन के काम और खास मुलाकातें ऊपर ही होती हैं. समापन नवमी के दिन कन्या पूजन से होता है. जिसे पीठ के उत्तराधिकरी या पीठाधीश्वर करते हैं. वर्षों से योगी आदित्यनाथ इस परंपरा को निभाते रहे हैं. इस बार कोरोना के कारण लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों के अनुपालन में उन्होंने कन्या पूजन भी नहीं किया.
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