डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट से डरे उद्योगपति
ग्रेटर नोएडा के कासना औद्योगिक क्षेत्र में कर्मचारी के कोरोना पाजिटिव पाए जाने के बाद प्रशासन संबंधित फैक्ट्री सील कर दी है.

ग्रेटर नोएडा के कासना औद्योगिक क्षेत्र में कर्मचारी के कोरोना पाजिटिव पाए जाने के बाद प्रशासन संबंधित फैक्ट्री सील कर दी है. साथ ही संबंधित फैक्ट्री मालिक पर एफआइआर कराने की कवायद ने उद्योग संचालकों का दहशत में ला दिया है.
उद्यमियों का कहना है कि आवश्यक वस्तु के उत्पादन में लगी फैक्ट्री का कोई कर्मचारी अगर तमाम एहतियात के बाद भी कोरोना पाजिटिव मिलता है तो उसमें उद्यमी की क्या गलती है? उद्यमी का मकसद किसी को संक्रमित करना नहीं है. ऐसे में फैक्ट्री को सील करना और उद्यमी पर कानूनी कार्रवाई को लोग गलत ठहरा रहे हैं. असल में ‘डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट-2005’ के कड़े प्रावधानों के चलते उद्योगपति दहशत में हैं.
फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों कर्मचारियों की इस कानून के तहत जांच अनिवार्य है. इसके तहत अगर फैक्ट्री में कोई भी मजदूर कोरोना पाजिटिव मिलता है तो उसके लिए फैक्ट्री चलाने वाला जिम्मेदार माना जाएगा. इस कानून का उल्लंघन करने वाले फैक्ट्री संचालक को एक साल जेल और जुर्माने का प्रावधान है.
ऐसे में गोरखपुर इंडस्ट्रियल एरिया के करीब दो दर्जन से अधिक फैक्ट्री संचालकों ने अपनी यूनिट चलाने में असमर्थता जताई है. ये उद्यमी फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों की कोरोना संबंधी जांच रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पालीमर्स चेन रिएक्शन आरटीपीसीआर कराए बिना काम शुरू कराने पर चिंतित हैं.
चेंबर आफ इंडस्ट्रीज के महासचिव प्रवीण मोदी बताते हैं “गोरखपुर इंडस्ट्रियल एरिया के सभी उद्यमी डरे हुए हैं. डाक्टर की तैनाती न होने से फैक्ट्री में काम करने वाले किसी भी वर्कर की आरटीपीसीआर जांच नहीं हो सकी है.” उधर गोरखपुर के कमिश्नर जयंत नर्लिकर बताते हैं कि उद्योग चालू होने के दौरान तीन से चार बार मजदूरों और कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा. इसके लिए थर्मल स्कैनर मंगाए गए हैं.
***