हिंदी में गणित पढ़ाएगा आइआइटी कानपुर
आइआइटी कानपुर के गणित विभाग ने ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग (दूरस्थ शिक्षा) से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए गणित के लेक्चर आसान हिंदी में तैयार किए हैं.

अंग्रेजी भाषा में गणित पढ़ने में दिक्कत महसूस करने वाले छात्रों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. अब वे बेहद सामान्य हिंदी भाषा में गणित पढ़ सकेंगे और वह भी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी आइआइटी के विशेषज्ञों से. आइआइटी कानपुर के गणित विभाग ने ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग (दूरस्थ शिक्षा) से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए गणित के लेक्चर आसान हिंदी में तैयार किए हैं. एक स्टेटिस्टिक्स और दूसरा आर-सॉफ्टवेयर पर आधारित है. इसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से संचालित किए जा रहे फ्री टू एयर स्वयं प्रभा चैनल पर देखा जा सकता है. दोनों वीडियो की पूरी सीरीज 40-40 घंटे की है. इसका प्रसारण एक-एक घंटे का होगा.
हिंदी में लेक्चर तैयार करने वाले आइआइटी कानपुर के गणित विभाग के प्रो. शलभ कुमार ने बताया कि पूरी तरह से हिंदी में लेक्चर की सीरीज तैयार करने में खासी मशक्कत करनी पड़ी. पूरे लॉकडाउन का उन्होंने बखूबी उपयोग किया है. अंग्रेजी मीडियम के छात्रों को दिक्कत न आए, उसके लिए उसके बारे में अंग्रेजी में भी बताया गया है. यह 12 से लेकर बीटेक और एमटेक के छात्रों के लिए उपयोगी रहेगा. प्रो. शलभ के मुताबिक, स्टेटिस्टिक्स और आर-सॉफ्टवेयर की सहायता से छात्र किसी भी तरह की घटना, स्थिति का सटीक आकलन कर सकेंगे. उन्हें मौसम, बीमारी, वर्षा, प्रदूषण, अन्य की कई वर्षों बाद की जानकारी हासिल करने में आसानी रहेगी. आर-सॉफ्टवेयर का सबसे अधिक उपयोग किया जा रहा है. यह इंटरनेट पर निश्शुल्क उपलब्ध है. इसकी सहायता से मैथमेटिकल मॉडलिंग की जा सकती है.
इसके अलावा आइआइटी कानपुर ऑनलाइन बैंक खातों से रकम उड़ाने वाले या फिर ई-मेल या सोशल साइट्स को हैक करने वाले साइबर अपराधियों पर नकेल कसने की योजना भी बना रहा है. उनसे निपटने के लिए संस्थान में साइबर सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब की स्थापना की जाएगी. यहां साइबर अपराधियों के अपराध के तरीकों को मात देने की तकनीक विकसित की जाएगी. हब के लिए केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी से 150 करोड़ रुपये की मदद मिल रही है. भवन निर्माण और मशीनों के लिए 60 करोड़ रुपये की राशि मिल चुकी है. यहां मोबाइल, लैपटॉप, सोशल अकाउंट, बैंक अकाउंट, आधार नंबर, ऑनलाइन बैंकिंग सिस्टम को मजबूत करने पर काम होगा. यहां स्कूल, कॉलेज और अन्य इंजीनियरिंग संस्थानों के आइडिया और प्रोटोटाइप मॉडल का उद्यमिता विकास कराया जाएगा. हब में कई कंपनियां आएंगी और संस्थान के साथ साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में काम करेंगी. छात्रों के आइडिया और प्रोजेक्ट की फंडिंग की जाएगी. इससे साइबर अपराधों पर नियंत्रण लगेगा.
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