ईपीएफओ से जुड़ी राहतें कितने काम की?
कोविड-19 के असर से अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सरकार की ओर से घोषित 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से जुड़ी राहतें भी शामिल हैं. कर्मचारी के स्तर पर ईपीएफओ से जुड़ी दो प्रमुख राहतें दी गई हैं. पर यह आपके कितने काम की हैं?

कोविड-19 के असर से अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सरकार की ओर से घोषित 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से जुड़ी राहतें भी शामिल हैं. कर्मचारी के स्तर पर ईपीएफओ से जुड़ी दो प्रमुख राहतें दी गई हैं.
पहली, कोई भी कर्मचारी तीन महीने की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते के बराबर या फंड में जमा राशि का 75 फीसदी, दोनों में जो कम हो उतना पैसा निकाल सकता है.
दूसरी, नियोक्ता और कर्मचारी दोनों के 12 प्रतिशत के सांविधिक योगदान को कम कर 10 प्रतिशत कर दिया गया.
क्या आपको मिलेगी राहत?
ये राहतें उन्हीं कर्मचारी और नियोक्ता के लिए दी गई हैं, जिन संस्थानों में 100 से कम कर्मचारी और 90 फीसदी कर्मचारियों की तनख्वाह 15,000 से कम है. यानी अगर आपकी कंपनी में 100 से ज्यादा कर्मचारी हैं और आपका मूल वेतन इससे ऊपर है और ये राहतें आपके किसी काम की नहीं.
क्या है इन दोनों कदमों का मकसद?
लॉकडाउन के कारण प्रभावित आर्थिक गतिविधियों के बीच 12 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों की नौकरी जाने का अनुमान है. ऐसे में लोगों की आय टूटने पर उन्हें नकदी मिल सके, इसके लिए सरकार ने ईपीएफओ फंड में से पैसा निकालने की अनुमति दी है. ईपीएफओ के जनसंपर्क अधिकारी (दिल्ली वेस्ट) राकेश धर द्विवेदी बताते हैं, ''लॉकडाउन के दौरान भी ईपीएफओ के सभी दफ्तर कामकाज कर रहे हैं और कोविड-19 से जुड़े दावों को प्राथमिकता से निपटा रहे हैं.'' लॉकडाउन के दौरान 12 लाख सदस्यों ने 3360 करोड़ रुपए की निकासी की है.
इसके अलावा दूसरी राहत जिसमें अंशदान को घटाकर 12 से 10 फीसदी किया गया है, यहां सरकार की कोशिश लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा छोड़ने की है. सैलरी में से जब कटने वाला पीएफ कम हो जाएगा तो लोगों की टेक होम सैलरी (हाथ में आने वाला वेतन) बढ़ जाएगा. जिससे वे खर्च करने के लिए प्रेरित होंगे और इससे अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने में मदद मिलेगी.
लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि सैलरी से कटने वाले ईपीएफ पर आयकर की धारा 80 सी की छूट मिलती है. अब अगर बचत न करके यह पैसा आपके हाथ में आएगा तो आपकी टैक्स देनदारी बढ़ जाएगी. या फिर आपको टैक्स बचाने के लिए दूसरे विकल्पों में निवेश करना होगा. श्रम मंत्रालय का अनुमान है कि इससे करीब 79 लाख कर्मचारियों और 3.8 लाख नियोक्ताओं को लाभ होगा।
चार्टर्ड एकाउटेंट अंकित गुप्ता बताते हैं, ''पीएफ में जो पैसा निकालने वाली राहत है उस पर कोई टैक्स देनदारी नहीं बनेगी क्योंकि पीएफ एग्जैम्प्ट कैटेगरी में हैं यानी जिनकी निकासी पर कोई टैक्स नहीं लगता. लेकिन ईपीएफ में कम अंशदान से जो लोगों के हाथ में पैसा आएगा उस पर टैक्स देनदारी उस स्थिति में बनेगी जब उनकी सालाना करयोग्य आय पांच लाख रूपए से ऊपर होगी.''
ईपीएफ से जुड़ी राहतों का लाभ लेना चाहिए?
सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर जितेंद्र सोलंकी कहते हैं, ''यदि ईपीएफ के अलावा आपके पास कोई और विकल्प मौजूद है तो सलाह यही होगी कि इस राशि को न छुएं.'' अन्यथा रिटायरमेंट के समय आपको मिलने वाला पैसा कम हो जाएगा और ईपीएफ का ही एक हिस्सा पेंशन खाते में जाता है. यानी पेंशन की राशि भी कम हो जाएगी. सोलंकी आगे कहते हैं, ''यदि आपके आप ऐसा कोई और निवेश नहीं जहां से नकदी तत्काल मिल सके तो आप ये राहतें ले लीजिए लेकिन जब आपकी आय सुचारू हो जाए तो वॉलंटरी पीएफ का विकल्प चुनकर अंशदान को बढ़ा दें, जिससे आप अपने रिटायरमेंट कॉर्पस को पूरा कर पाएंगे.'' ईपीएफ पर मिलने वाले रिटर्न की दर निश्चित होती है और टैक्स बचत में भी उपयोगी साबित होता है.
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