मालिक बोला, हवाई जहाज का टिकट, ज्यादा सैलरी लो और वापस आ जाओ

फैक्ट्रियों के मालिक मजदूरों से पिछला बकाया दिलाने के साथ ही नौकरी का ऑफर देकर उन्हें वापस लौटने का ऑफर दे रहे हैं. परिवार और पेट से मजबूर कई मजदूर वापस जाने भी लगे हैं.

प्रतीकात्मक फोटो/मनीष अग्निहोत्री
प्रतीकात्मक फोटो/मनीष अग्निहोत्री

प्रयागराज में नवाबगंज के रहने वाले रामकिशन मौर्य नवी मुंबई में कपड़े को डाइ करने वाली एक फैक्ट्री में काम करते थे. वे 12 हजार रुपए महीने कमाते थे. लॉकडाउन में जब फैक्ट्री बंद हो गई तो रामकिशन श्रमिक स्पेशल ट्रेन के जरिए 15 मई को परिवार समेत अपने गांव नवाबगंज लौट आए. यहां के प्राथमिक विद्यालय में बने क्वारंटीन सेंटर में चौदह दिन रहने के बाद रामकिशन नए सिरे से आजीविका के साधनों की तलाश में जुटे हैं.

अब पिछले एक हफ्ते से रोज नवी मुंबई स्थित फैक्ट्री के मालिक का फोन रामकिशन के पास लगातार आ रहा है. रामकिशन बताते हैं,“अनलाक-1 लागू होने के बाद नवी मुंबई में कपड़ा रंगने की फैक्ट्री भी दोबारा शुरू हो गई है. फैक्ट्री के मालिक रोज फोन करके वापस लौटने को कह रहा है. इसके लिए वह हवाई जहाज का टिकट और अधिक सैलरी देने की बात भी कर रहा है.” रामकिशन ही नहीं नवाबगंज में रहने वाले एक दर्जन से अधिक लोग नवी मुंबई स्थित कपड़ा रंगने वाली फैक्ट्री में काम कर रहे थे. ये सभी वापस अपने घरों पर लौट आए हैं और अब फैक्ट्ररी मालिक की ओर से वापस लौटने के लिए लुभावने ऑफर दिए जा रहे हैं.

इसी तरह गोरखपुर के रहने वाले दिनेश पासवान सूरत की एक कंपनी में पेंटर का काम करते थे. लॉकडाउन के बाद सबकुछ बंद हो जाने के बाद खाने के लाले पड़ने लगे, कुछ नहीं सूझा तो वे सब छोड़ श्रमिक स्पेशल से जैसे-तैसे गोरखपुर पहुंच गए. एक महीने बाद उन्हें कोई काम नहीं मिला. दिनेश ने दो दिन सब्जी बेची लेकिन 100 रुपये भी नहीं कमा पा रहे थे. इसी बीच सूरत वाले सेठ का फोन दिनेश के पास आ गया जिसने बताया कि वहां (सूरत) में काम शुरू हो गया है, वापस आ जाओ. सेठ ने भरोसा दिया कि उसका पिछला बकाया 9 हजार रुपये तो मिलेंगे ही दोबारा से काम मिल जाएगा. दिनेश परिवार और पेट से मजबूर थे इसलिए उन्होंने वापस जाने का मन बना लिया और टिकट कटा कर ट्रेन पकड़ ली.

दिनेश की ही तरह सूरत और अहमदाबाद में काम करने वाले दर्जनों श्रमिक अब वापस जाने लगे हैं. ये सभी वे ही हैं जो बीते दिनों श्रमिक स्पेशल से गोरखपुर समेत पूर्वांचल के जिले में आए थे. मजदूरों की वापसी अनायास ही नहीं है. फैक्ट्रियों के मालिक मजदूरों से पिछला बकाया दिलाने के साथ ही नौकरी का ऑफर देकर वापस लौटने का आफर दे रहे हैं. यूपी में अबतक 32 लाख से अधिक मजदूर दूसरे प्रदेशों से पहुंचे हैं. इन मजदूरों में मुंबई, पंजाब, गुजरात से आने वालों की संख्या बहुत अधिक है. अनलाक-1 के बाद इन राज्यों में फैक्ट्रियां खुलने के बाद मजदूरों की मांग बढ़ने लगी है.

उधर राज्य सरकार भी इन मजदूरों को प्रदेश में रोके रखने के जतन में लगी है. मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने प्रत्येक जनपद में एक रोजगार समिति का गठन करने के निर्देश दिए हैं. समिति द्वारा सेक्टरवार रोजगार सृजन की संभावनाओं को चिन्हित किया जाएगा. इसके बाद बाहर से लौटे हुए प्रवासी मजदूरों व कारीगरों को उनके कौशल और जरूरत के मुताबिक रोजगार मुहैया कराया जाएगा. यह समिति यह अध्ययन करेगी कि आगामी छह माह में जिलों में किस क्षेत्र में कितना रोजगार सृजन किया जा सकता है. समिति संबंधित मंडलायुक्तों को एक सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी. मुख्य सचिव ने इससे संबंधित पत्र सभी मंडलायुक्तों को भेजा है.

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