लॉकडाउन डायरीः जापान में सोशल डिस्टेंसिंग बना कोरोना के खिलाफ मजबूत हथियार
जापान में इस बीमारी के कम फैलने का एक बड़ा कारण जापानियों द्वारा मास्क पहनने और भीड़ से बचने की आदत को माना जा सकता है. पौने चार करोड़ से अधिक आबादी वाले तोक्यो को छोड़कर यह बात लगभग पूरे जापान पर लागू हो सकती है.

वेदप्रकाश सिंह/ लॉकडाउन डायरीः उन्नीस
यह लेख लिखते समय तक पूरी दुनिया में 16 लाख से अधिक लोग कोरोना की महामारी से ग्रस्त हो चुके हैं और रोज यह आंकड़ा बढ़ रहा है. संसार भर में एक लाख से अधिक लोग अब तक मारे जा चुके हैं. भारत में 12 अप्रैल तक साढ़े सात हजार से ज्यादा लोग इससे ग्रस्त हो चुके हैं और दो सौ से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
जापान में भारत से पहले कोरोना से ग्रस्त पहला मरीज सामने आया था. 10 जनवरी को चीन से जापान के कानागावा प्रीफेक्चर लौटे व्यक्ति को सबसे पहले कोरोना वायरस से ग्रस्त देखा गया. वहीं, भारत में चीन से केरल के त्रिसुर लौटे व्यक्ति को 30 जनवरी को कोरोना वायरस का पहला मरीज बताया गया. लेकिन जापान ने कुछ तो अपनी जांच व्यवस्था के कारण और कुछ अपनी सामाजिक आचरण-व्यवस्था के कारण इसे सीमित कर रखा है.
भारत की ही तरह जापान ने भी अभी तक सभी लोगों की जांच के उपाय पर विचार नहीं किया है. केवल संदिग्ध या संभावित लोगों की ही जांच की जा रही है. अब तक जापान में 6 हजार से अधिक लोग कोरोना से ग्रस्त हो चुके हैं. एक सौ आठ लोगों की मृत्यु हो चुकी है. सबसे ज्यादा तोक्यो में ग्यारह सौ सोलह लोग कोरोना से ग्रस्त हैं. ओसाका शहर दूसरे नम्बर पर है.
सात अप्रैल को जापान ने अपने सात प्रीफेक्चर (राज्यों) में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है. इनमें तोक्यो, ओसाका, साईतामा, चीबा, कानागावा, ह्योगो और फुकुओका शामिल हैं. लेकिन आईची में भी मालूम चला कि आपातकाल लागू कर दिया गया है.
भारत में लगे लॉकडाउन और जापान के कुछ राज्यों में लगे आपातकाल में काफी अंतर है. भारतभर में सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बंद कर दिया गया है. किसी भी प्रकार के आवागमन पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है लेकिन जापान में इन दोनों क्षेत्रों में इस तरह का प्रतिबन्ध नहीं लगाया है.
जापान में लोगों से घर में ही रहने की अपील जरूर की जा रही है लेकिन जीवन सामान्य रूप से चल रहा है. तोक्यो और अन्य राज्यों में रात के मनोरंजन स्थानों को बंद रखने और लोगों से वहां न जाने की गुजारिश की जा रही है. लोग स्वतः घर से कम ही बाहर निकल रहे हैं. जापान में यह साकुरा देखने जाने का मौसम है. इसे जापानी में ओहानामी कहते हैं.
चेरी के पेड़ों के नीचे लोग परिवार और मित्रों के साथ भोजन या जलपान करते हैं. चेरी को जापान में साकुरा कहते हैं. लेकिन कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए मार्च में तो नहीं लेकिन अब काफी लोग घर पर ही रह रहे हैं.
जापान की टेलिकॉम कम्पनी सॉफ्टबैंक के मालिक और यहां के सबसे अमीर सोन मासायोशी ने मास्क की कमी से परेशान जापानियों के लिए घोषणा की है कि वे चीन से रोजाना 30 करोड़ मास्क मंगवाकर बिना लाभ के बेचेंगे.
जापान में इस बीमारी के कम फैलने का एक बड़ा कारण जापानियों द्वारा मास्क पहनने और भीड़ से बचने की आदत को माना जा सकता है. पौने चार करोड़ से अधिक आबादी वाले तोक्यो को छोड़कर यह बात लगभग पूरे जापान पर लागू हो सकती है.
जिस दिन से जापान के प्रधानमंत्री आबे शिंज़ो ने सात राज्यों में आपातकाल घोषित किया है उस दिन से एक बड़ा असर तोक्यो में देखने को मिल रहा है. तोक्यो में ही सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित लोगों की संख्या है. आपातकाल के बाद पहले सप्ताहांत में भीड़ से भरे रहने वाले क्षेत्र बिल्कुल खाली नजर आए.
शुक्रवार रात यानी 10 अप्रैल को जहां लोग बाहर निकल भी रहे थे उन्हें घर जाने के लिए कहा गया. मनोरंजन वाले क्षेत्रों में यह बीमारी सबसे ज्यादा फैल रही है इसलिए उन्हें बिल्कुल बंद रखने की अपील की गई है. बार, रेस्तरां और कराओके आदि जगहों को बंद रखने की अपील की जा रही है.
जापान में रोजाना औसतन 4 हजार लोगों की ही जांच हो रही है. लेकिन अब इसे 20 हजार तक ले जाने का प्रयास किया जा रहा है. साथ ही कुछ जगहों पर कार में ही जाँच कर कोरोना ग्रस्त होने या न होने का परिणाम देने की पहल की जा रही है ताकि अस्पतालों में मरीजों से दूसरे लोगों को होने वाली इस बीमारी को फैलने से रोका जा सके. निगाता राज्य में यह पहल शुरू हो चुकी है.
तोक्यो के नारिता हवाई अड्डे की एक तस्वीर में दिखाया गया है कि सभी लोगों की जांच के बाद ही उन्हें घर भेजा जा रहा है. जांच के परिणाम आने तक उन्हें हवाईअड्डे पर भी गत्ते के अस्थाई कमरों में रोका जा रहा है.
एक महीने के लिए छह मई तक छोटे-बड़े समारोहों को रोक दिया गया है. मई के पहले हफ्ते से शुरू होने जा रहे ‘गोल्डन वीक’पर भी इसका असर पड़ेगा. जापान में इन दिनों लगभग एक सप्ताह की छुट्टियां होती हैं और पूरा जापान उत्सव में लीन हो जाता है. लेकिन अब वह नहीं हो सकेगा. युवराज घोषित करने के लिए पहले से तय 19 अप्रैल के कार्यक्रम को भी स्थगित कर दिया गया है.
हम लोग जापान के जिस शहर में रह रहे हैं वहां संक्रमित लोगों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है लेकिन मृतकों के हिसाब से ओसाका अभी बचा हुआ है. यहां सात अप्रैल तक छह लोगों की ही कोरोना वायरस के कारण मृत्यु हुई है. जीवन जीने में किसी तरह की कोई मुश्किल नहीं दिख रही है. विदेश से आने वाले सभी लोगों को 14 दिन तक घरों में ही रहने को कहा गया है.
इसलिए हम लोग भी घर में ही हैं. पड़ोस में रहने वाले दोस्त ज़रूरी सामान लाकर घर के बाहर रख जाने के लिए कई बार बोल चुके हैं. ज़रूरी सामान हम लोग पहले ही दुकानों से ला चुके हैं. घर से ही कक्षाएं ली जा रही हैं. इसलिए अध्यापन भी चल रहा है. घर की बालकनी से ही खड़े होकर बाहर दिखते संसार का नजारा ले रहे हैं.
दूर दिखते पहाड़ और सड़क पर आते-जाते लोगों को देखना अच्छा लग रहा है. किसी भी तरह का कोई डरावना दृश्य और माहौल नहीं दिख रहा है. कल एक दोस्त हमारे घर आकर भारत से लाई दवाई ले गए. उन्होंने घर से बाहर ही दवाई रख देने के लिए कहा. न हमने उन्हें देखा और न ही वे हमें देख पाए.
संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लोग जितना हो सकता है उतना प्रयास कर रहे हैं. सामाजिकता बनाए रखते हुए भी आपस में मिलने-जुलने को कुछ समय तक अगर स्थगित रख सकें तो सबके लिए अच्छा हो. ऐसा प्रयास जापान से लेकर भारतभर में हो रहे हैं. लेकिन ज़रूरी है कि जीवनयापन को इस संकट की घड़ी में जितना आसान बनाया जा सके उतना ही अच्छा हो.
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