लॉकडाउन का असर: निर्यात क्षेत्र की डेढ़ करोड़ नौकरियों पर संकट, गरीबी बढ़ने का खतरा
निर्यातकों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार कोरोना संकट की वजह से भारत के निर्यात क्षेत्र में करीब डेढ़ करोड़ लोगों की नौकरियां जा सकती हैं. तो वहीं, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आइएलओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार ‘लॉकडाउन’के कारण भारत में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले 40 करोड़ लोग होंगे प्रभावित. दूसरी तरफ उद्योग संगठन रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) के एक सर्वे के अनुसार, लॉकडाउन से खुदरा व्यापारी 80,000 नौकरियां घटा सकते हैं.

कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन से देशभर में व्यवसायिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. इसके कारण संगठित और असंगठित क्षेत्र में रोजगार का बड़ा संकट पैदा होने का खतरा है. निर्यातकों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फिओ) का कहना है कि कोरोना वायरस के कारण भारत के निर्यात क्षेत्र में करीब डेढ़ करोड़ लोगों की नौकरियां जा सकती हैं. संगठन के अध्यक्ष शरद कुमार सर्राफ के मुताबिक आधे से अधिक ऑर्डरों के रद्द हो जाने तथा वैश्विक व्यापार के खराब परिदृश्य के कारण ये नौकरियां जाने की आशंका है. उन्होंने निर्यातकों के लिये राहत पैकेज की मांग करते हुए कहा कि अभी जीवन और जीवनयापन के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। इनमें से किसी को ही चुनना देश के लिये त्रासद हो सकता है.
सर्राफ ने कहा कि निर्यातकों के पास बेहद कम ऑर्डर बचे हैं. यदि कारखानों को न्यूनतम कामगारों के साथ चलाने की छूट नहीं दी गयी तो ऐसी क्षति होगी जिसकी भरपाई नामुमकिन है. छूट नहीं मिलने से ये कारखाने बंद होने के लिये बाध्य हो जाएंगे और जो नुकसान होगा, उन्हें ही झेलना होगा. लॉकडाउन से परिधान, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, हथकरघा, इंजीनियरिंग और कपड़ा उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.
इससे पहले अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आइएलओ) ने एक रिपोर्ट में कहा कि कोरोना वायरस संकट और उससे निपटने के लिये जारी ‘लॉकडाउन’ (बंद) के कारण भारत में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले 40 करोड़ लोगों के प्रभावित होने की आशंका है. इससे उनकी नौकरियों और कमाई पर असर पड़ सकता है जिससे वे गरीबी दुष्चक्र में फंस सकते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘भारत में करीब 90 प्रतिशत लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं. ऐसे में करीब 40 करोड़ कामगारों के रोजगार और कमाई प्रभावित होने की आशंका है. इससे वे गरीबी के दुश्चक्र में फंसते चले जाएंगे।’’
वहीं, उद्योग संगठन रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) ने एक सर्वे के नतीजों के आधार पर यह बताया कि लॉकडाउन से खुदरा व्यापारी 80,000 नौकरियां घटा सकते हैं. आरएआई ने कोरोना वायरस महामारी का व्यापारियों और कार्यबल पर पड़ने वाले प्रभाव के आकलन के लिये यह सर्वे किया. यह सर्वे 768 खुदरा कारोबारियों के बीच किया गया जिनमें 3,92,963 लोगों को रोजगार मिला हुआ है.
संगठन ने कहा, ‘‘छोटे खुदरा व्यापारी अपने यहां काम करने वालों में से 30 प्रतिशत की छंटनी कर सकते हैं. वहीं मध्यम आकार के खुदरा कारोबारी में यह 12 प्रतिशत और बड़े खुदरा व्यपारियों के मामले में यह 5 प्रतिशत है। कुल मिलाकर सर्वे में शामिल खुदरा कारोबारियों ने कहा कि वे कार्यबल में 20 प्रतिशत की कटौती कर सकते हैं.’’ सर्वे के अनुसार 20 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी से कुल 78,592 कर्मचारी प्रभावित होंगे.
उपरोक्त सभी शुरुआती आकलन हैं. यदि लॉकडाउन को आगे बढ़ाया जाता है और व्यवसायिक गतिविधियां लंबे समय तक पटरी पर नहीं लौटती तो निश्चित तौर पर उद्योंगों पर इसका असर और गहरा होगा. व्यापार के नुकसान रोजगार के आंकड़ों में बदलने में देर नहीं लगाएगा.
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