सभी सरकारों को खटकते रहे अमिताभ ठाकुर
यूपी के चर्चित आइपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को समय से पहले सेवा से रिटायर कर दिया गया है. गृह मंत्रालय ने अमिताभ ठाकुर को लोकहित में सेवा में बनाए रखे जाने के उपयुक्त न पाते हुए यह फैसला लिया है.

यूपी के चर्चित आइपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को समय से पहले सेवा से रिटायर कर दिया गया है. गृह मंत्रालय ने अमिताभ ठाकुर को लोकहित में सेवा में बनाए रखे जाने के उपयुक्त न पाते हुए यह फैसला लिया है. इस बारे में 23 मार्च को अमिताभ ठाकुर ने खुद ट्वीट कर जानकारी दी है. अमिताभ के अलावा दो अन्य आइपीएस अधिकारियों को भी रिटायर किया गया है. अमिताभ ठाकुर के अलावा राजेश कृष्ण और राकेश शंकर को रिटायर किया गया है. राजेश कृष्ण सेना नायक 10वीं बटालियन बाराबंकी में तैनात थे. उनका नाम आज़मगढ़ में पुलिस भर्ती में घोटाले में आया था. राकेश शंकर फिलहाल डीआइजी स्थापना की पोस्ट पर थे. देवरिया शेल्टर होम प्रकरण में राकेश शंकर की भूमिका संदिग्ध मानी गई थी.
अमिताभ ठाकुर 1992 बैच के आइपीएस के साथ-साथ कवि, लेखक और एक एक्टिविस्ट के रूप में भी जाने जाते हैं. सरकार कोई भी रही हो अमिताभ ठाकुर उससे मोर्चा लेने में कभी पीछे नहीं रहे.
अमिताभ का जन्म बोकारो (बिहार-झारखंड) में हुआ था. शुरुआती पढ़ाई बोकारो के केंद्रीय विद्यालय से पूरी करने के बाद अमिताभ ने आइआइटी कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. आइपीएस बनने के बाद वह उत्तर प्रदेश के सात जिलों बस्ती, देवरिया, बलिया, महाराजगंज, गोंडा ,ललितपुर और फीरोजाबाद में कप्तान रहे. अमिताभ ठाकुर साल 2006 में जब फिरोजाबाद के एसपी थे, उसी दौरान मुलायम सिंह किसी बात को लेकर उनसे नाराज हो गये और उनका तबादला कर दिया. मुलायम सिंह की नाराजगी ही थी कि अमिताभ ठाकुर को किसी भी बड़े जिले में बतौर कप्तान तैनाती नहीं मिली. वर्ष 2006 में अमिताभ ठाकुर को डीआइजी, और साल 2010 में आइजी के पद पर प्रमोशन मिलना था लेकिन गोंडा में कप्तान रहते शस्त्र लाइसेंस में धांधली के मामले में विभागीय जांच उनके खिलाफ चली गई, जिसके चलते बाद में मायावती राज में उनको पांच साल कोई प्रमोशन नहीं दिया गया. इसके बाद ठाकुर ने एक लम्बी लड़ाई लड़ी और आखिरकार अखिलेश सरकार ने साल 2013 में इनका डाइरेक्ट प्रमोशन एसपी से आइजी के पद पर कर दिया. प्रमोशन के बाद इन्हें आइजी रूल्स मैन्युअल बनाया गया, जिसके बाद इनका तबादला आइजी सिविल डिफेंस के पद पर कर दिया गया. नौकरी के दौरान गैरविभागिय कामों में दखलअंदाजी का अमिताभ ठाकुर पर आरोप लगा. उन्होंने कई आरटीआइ भी सरकारी कार्यों के लिए दाखिल किए, कई पीआइएल किए जिनमें कुछ में कोर्ट की फटकार भी सुनने को मिली.
वर्तमान में अमिताभ नागरिक सुरक्षा में आइजी के पद पर तैनात थे जबकि उनके साथ के अधिकारी अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) बन चुके हैं. अमिताभ कई बार चर्चा में रहे. दो बार निलंबित भी हुए. पहली बार वर्ष 2003 में इन्हें एसपी गोंडा के पद से निलंबित किया गया था. दूसरी बार अमिताभ का निलंबन वर्ष 2014 में सेवा नियमावली का उल्लंघन करने के लिए हुआ था. अमिताभ के खिलाफ पांच विभागीय कार्रवाई भी हुई थी. उनके खिलाफ आरोप था कि 16 नवम्बर 1993 को आइपीएस की सेवा प्रारंभ करते समय अपनी संपत्ति का ब्योरा शासन को नहीं दिया था. इसके साथ ही उन्होंने 1993 से 1999 तक का वर्षवार संपत्ति विवरण शासन को एकमुश्त दिया. आरोपपत्र में यह भी था कि अमिताभ ठाकुर के वर्षवार वार्षिक संपत्ति विवरण में काफी भिन्नताएं हैं. यह भी आरोप था कि अमिताभ ने अपनी पत्नी व बच्चों के नाम से काफी संख्या में चल एवं अचल संपत्तियां, बैंक व पीपीएफ जमा की हैं. उनको ऋण व उपहार प्राप्त हुए थे, किन्तु उन्होंने इसकी सूचना शासन को नहीं दी. इसके बाद अमिताभ ठाकुर कोर्ट पहुंच गए. कोर्ट के आदेश के उन्हें फिर बहाल किया गया. उन्होंने ड्यूटी तो ज्वाइन कर ली पर उसके लाइम लाइट में नहीं आए.
पिछली अखिलेश यादव सरकार के दौरान वर्ष 2015 में अमिताभ ठाकुर ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव पर धमकी देने का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके पास एक ऑडियो टेप है, जो फोन पर रिकॉर्ड की गई है. यह रिकॉर्डिंग मुलायम सिंह और उनके बीच फोन पर हुई बातचीत का है. इस टेप में मुलायम सिंह यादव को साफ तौर पर धमकी देते हुए सुना जा सकता है. अमिताभ ठाकुर ने जैसे ही यह टेप सार्वजनिक किया था, कुछ ही घंटों के भीतर उनपर बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराकर उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया. वर्ष 2015 में 10 जुलाई को लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में अमिताभ ने आरोप लगाया था कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उन्हें फोन पर धमकी दी थी. पुलिस ने इस मामले में पहली बार अक्तूबर 2015 में अंतिम रिपोर्ट लगाई थी लेकिन ठाकुर ने इस पर सवाल उठाते हुए अमिताभ ने इसे चुनौती दी तो अदालत ने 20 अगस्त 2016 को इस अंतिम रिपोर्ट को खारिज करते हुए पुलिस को मामले की आगे जांच करने के आदेश दिए. पुलिस ने मुलायम की आवाज का नमूना लेने की कोशिश की लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया. हालांकि बाद में उन्होंने स्वीकार किया था कि कॉल रिकॉर्डिंग में उन्हीं की आवाज है. मुलायम ने कहा था कि उन्होंने एक बुजुर्ग होने के नाते ठाकुर से बात की और उनका इरादा उन्हें धमकाने का नहीं था.
अमिताभ ठाकुर ने वर्तमान भाजपा सरकार को भी कई बार कठघरे में खड़ा किया था. पिछले महीने लखनऊ में एक डेढ़ साल के बच्चे को चोरी करने के प्रयास के मामले में अमिताभ ठाकुर के ट्वीट के बाद पुलिस हरकत में आयी थी. मामले की रिपोर्ट दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की गई थी.
पिछले वर्ष दिसंबर में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) प्रयागराज के 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों का डेटाबेस लीक होने के मामले में अमिताभ ठाकुर ने कुछ दिन पहले कानपुर के एसएसपी को शिकायती पत्र भेजा था. इसमें रायपुरवा स्थित एक कंपनी के पास लाखों परीक्षार्थियों के डाटाबेस होने की बात का जिक्र किया गया था. आरोप लगाया गया था कि कंपनी एक पिनकोड का डेटाबेस एक हजार रुपये, शहर का डेटाबेस 3,500 रुपये व पूरा डेटाबेस 6,500 रुपये में बेच रही. अमिताभ ने इसे आपराधिक कृत्य मानते हुए मुकदमा दर्ज करने की भी मांग की थी. इसके बाद मुकदमा दर्ज कर दोषियों पर कार्रवाई की गई थी. यूपी के कई जिलों में आपराधिक घटनाएं होने पर अमिताभ ने वहां पहुंचकर अपने स्तरपर भी जांच की थी. पिछले महीने उन्नाव में दो युवतियों की मौत के बाद भी अमिताभ ने मौके पर जाने की कोशिश की थी जिससे शासन ने रोक दिया था. सरकार अमिताभ के कृत्य को अनुशासनहीनता के रूप में देख रही थी.
अमिताभ ठाकुर नेशनल आरटीआइ फोरम के संस्थापक भी हैं. उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर एक जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं. नूतन ठाकुर ने आम आदमी पार्टी (आप) ज्वाइन करने की घोषणा की है. माना जा रहा है कि अमिताभ भी आप ज्वाइन कर सकते हैं.
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