टीम के 'बेबी' खिलाड़ी से 'क्रिकेट के भगवान' तक, तस्वीरों में देखें सचिन तेंदुलकर का ODI सफर
कभी सचिन के हाथों एक ओवर में चार छक्के खाने वाले अब्दुल कादिर ने उनकी प्रतिभा पर कहा भी था, "ये छोकरे को देखना तुम, ये ऐसा-वैसा बल्लेबाज नहीं बनेगा, गावस्कर या जहीर अब्बास जैसा, गेंदबाज इससे भागेंगे"

साल 1989 और भारतीय टीम का पाकिस्तान दौरा. अजीत वाडेकर की अगुवाई वाली टीम के 1970 के वेस्टइंडीज दौरे के बाद यह पहला मौका था जब भारतीय क्रिकेट टीम को काफी हल्के में लिया जा रहा था. टीम वहां टेस्ट और वनडे सिरीज के लिए पहुंची थी. महज 24 साल की औसत उम्र वाली इस टीम के सामने वसीम अकरम, वकार यूनिस, आकिब जावेद और इमरान खान जैसे दिग्गज थे. उस समय ज्यादातर क्रिकेट पंडितों का यही कहना था कि यह टीम ज्यादा से ज्यादा एक या दो टेस्ट ड्रा करा लेगी. लेकिन जब टेस्ट सिरीज पूरी हुई तो के. श्रीकांत की अगुवाई वाली इस टीम ने अनुमानों के सारे गणित फेल कर दिए. भारतीय टीम चारों टेस्ट ड्रा कराने में सफल रही थी.
सिरीज से कुछ दिन पहले तक भारत को बुरी तरह हराने की बात करने वाले इमरान खान ने बाद में कहा, "इस दौरे में इस भारतीय टीम का शानदार विकास हुआ है." विकास के इस नाव के खेवैया के रूप में कुछ युवा खिलाड़ी प्रमुखता से उभरे थे. इनमें संजय मांजरेकर, विवेक राजदान और टीम के 'बेबी' कहे जाने वाले 16 साल के सचिन तेंदुलकर थे. रमाकांत आचरेकर के इस 16 वर्षीय शिष्य ने स्कूली क्रिकेट में तहलका मचाने के बाद पूरे मुंबई में अपना नाम बना लिया था, लेकिन यहां उसका सामना दुनिया के सबसे बेहतरीन गेंदबाजी आक्रमण से था.
टेस्ट सिरीज में शानदार प्रदर्शन के बाद अब वनडे की बारी थी. पहला मैच पेशावर में खेला जाना था, लेकिन यह मैच बिना एक भी गेंद डाले रद्द हो गया. दूसरा वनडे मैच पाकिस्तान के गुजरांवाला में था. 18 दिसंबर, 1989 को खेला गया यह मैच वह साधारण मैच था जो आगे चलकर ऐतिहासिक बनने वाला था. इस मैच से वनडे की दुनिया में उस किशोर खिलाड़ी ने कदम रखा जो अगले 23 सालों के दौरान अपने खेल से न सिर्फ वनडे क्रिकेट को नई बुलंदियों तक पहुंचाने वाला था, बल्कि खुद क्रिकेट की दुनिया में भगवान की तरह स्थापित हो जाने वाला था.
लेकिन 'क्रिकेट के भगवान' का वह वनडे डेब्यू निराशाजनक रहा. वकार यूनिस ने सचिन को शून्य के स्कोर पर वसीम अकरम के हाथों कैच आउट करवा दिया. सचिन तब दो ही गेंद खेल पाए थे. ये वही वकार यूनिस थे, जिन्होंने चौथे टेस्ट में सचिन को एक खतरनाक बाउंसर मारी थी, और सचिन की नाक में चोट लग गई. सचिन की चोट पर तब जावेद मियांदाद उनका मजाक उड़ा रहे थे. खैर, डेब्यू वनडे में शून्य पर आउट होने वाले सचिन को अगले दोनों वनडे में मौका नहीं मिला. पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी से करियर की शुरुआत करने वाले सचिन 1993 तक निचले क्रम पर ही खेलते रहे, लेकिन अब यह बदलने वाला था.
यह साल 1994 था. भारतीय टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर थी. 27 मार्च को दूसरा वनडे ऑकलैंड में खेला जाना था. टीम के ओपनर नवजोत सिंह सिद्धू गर्दन में अकड़न के कारण मैच नहीं खेल रहे थे. कप्तान मुहम्मद अजहरुद्दीन ने फैसला लिया- सचिन ओपन करेगा. तब शायद अजहरुद्दीन को भी यह पता नहीं होगा कि उनका यह फैसला आगे चलकर न सिर्फ भारतीय टीम के लिए बल्कि सचिन के लिए भी कितना अहम साबित होने वाला है. न्यूजीलैंड के 142 रनों के जवाब में भारतीय टीम ने 160 गेंद शेष रहते वह मैच 7 विकेट से धमाकेदार अंदाज में जीता. इस जीत के पीछे जिस नाम की चहुंओर चर्चा हुई वह कोई और नहीं, डेब्यू ओपनर सचिन तेंदुलकर का था.
सचिन ने उस मैच में विस्फोटक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 49 गेंदों में 82 रन ठोक डाले थे. यहीं से तेंदुलकर का वनडे क्रिकेट भी परवान चढ़ना शुरू हुआ. हालांकि, इससे पहले भी तेंदुलकर ने वनडे में छोटी-मोटी बेहतरीन पारियां खेली थी लेकिन पदार्पण के पांच सालों बाद भी उनके खाते में एक भी वनडे शतक नहीं था. 1994 ही वह साल रहा, जब 9 सितंबर को तेंदुल्कर ने कोलंबो में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना पहला वनडे शतक जमाया. सचिन का वह पहला शतक 78 पारियों के बाद आया था. तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन यह बल्लेबाज न सिर्फ वनडे क्रिकेट का पहला दोहरा शतक बनाएगा बल्कि शतकों का भी शतक लगा बैठेगा.
साल 2012 में एशिया कप के दौरान जब सचिन ने अपना आखिरी वनडे मैच खेला तो सामने पाकिस्तान की ही टीम थी. तब तक सचिन ने 'बेबी' से 'क्रिकेट के भगवान' तक का सफर पूरा कर लिया था. उनके नाम 463 वनडे में 18426 रन दर्ज हो चुके थे. इनमें 49 शतक के साथ एक दोहरा शतक. इस दौरान सचिन ने एक से बढ़कर एक गेंदबाजों की गेंदों को 2016 बार बाउंड्री के बाहर पहुंचाया. यानी वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा मैच, सबसे ज्यादा रन, सबसे ज्यादा चौके और हाल में हुए विश्व कप तक सर्वाधिक शतकों का रिकॉर्ड (जिसे विराट कोहली ने तोड़ा) धारण करने वाला खिलाड़ी. वाकई, कभी सचिन के हाथों एक ओवर में चार छक्के खाने वाले अब्दुल कादिर ने उनकी प्रतिभा पर कहा भी था, "ये छोकरे को देखना तुम, ये ऐसा-वैसा बल्लेबाज नहीं बनेगा, गावस्कर या जहीर अब्बास जैसा, गेंदबाज इससे भागेंगे."