दुनिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट लगना था ओडिशा में, चला गया आंध्र प्रदेश! आखिर क्यों?
आर्सेलर मित्तल-निप्पॉन स्टील इंडिया1.24 लाख करोड़ रुपए की लागत से ओडिशा में एक स्टील प्लांट लगाने वाली थी लेकिन कई कारोबारी अड़चनों की वजह से उसने अपना फैसला बदल लिया

ओडिशा में दुनिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट लगना था, लेकिन अब यह आंध्र प्रदेश में लगने जा रहा है. आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (AM/NS India), दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी आर्सेलर मित्तल और जापान की निप्पॉन स्टील का संयुक्त उद्यम है. योजना के मुताबिक यह कंपनी ओडिशा में 1.24 लाख करोड़ रुपए की लागत से मेगा स्टील प्लांट पर काम कर रही थी. वहीं अब आंध्र प्रदेश में यह 1.47 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित लागत के साथ शुरू होने जा रहा है.
अप्रैल 2023 में तत्कालीन सीएम नवीन पटनायक ने इस संबंध में करार किए थे. लेकिन वर्तमान सरकार ने जमीन अधिग्रहण संबंधी समस्याओं का निपटारा समय पर नहीं किया, जिससे यह प्रोजेक्ट अब आंध्र प्रदेश के हिस्से चला गया है. बीते 24 मार्च को आंध्र के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने लगभग 1.47 लाख करोड़ की लागत से बनने वाले प्लांट की आधारशिला रखी. नई व्यवस्था के तहत ओडिशा से पाइपलाइन के जरिए आयरन ओर भेजा जाएगा और स्टील का निर्माण आंध्र प्रदेश में होगा.
मिली जानकारी के मुताबिक, 2.4 करोड टन प्रति वर्ष क्षमता वाला यह प्रोजेक्ट कभी ओडिशा की औद्योगिक महत्वाकांक्षाओं का आधार माना जाता था. भूमि अधिग्रहण में लगातार देरी और प्रशासनिक बाधाओं के कारण यह राज्य के हाथ से निकल गया. हालांकि ओडिशा सरकार ने 2024 के अंत में भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत बादातुबी गांव में 383 एकड़ जमीन के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन अधिकारों का सत्यापन नहीं हो सका. इसके अलावा, पुनर्वास और पुनर्स्थापन (R&R) की प्रक्रिया भी अधूरी थी.
ओडिशा सरकार की इस लेट-लतीफी के मुकाबले आंध्र प्रदेश सरकार ने साल 2025 में महज चार महीनों में अस्थाई भूमि आवंटन पूरा कर दिया, जिसे रिकॉर्ड गति माना जा रहा है. कंपनी ने मई महीने में ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी थी. इसके अलावा राज्य ने आकर्षक औद्योगिक प्रोत्साहन देने का वादा किया है और आवश्यक जमीन पहले ही सौंप दी है. अब यह प्रोजेक्ट दो चरणों में विकसित होगा. आंध्र प्रदेश सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, अनकापल्ली जिले के राजय्यापेटा में 5,400 एकड़ से अधिक भूमि आवंटित की गई है.
इस सफलता के पीछे आंध्र प्रदेश के मंत्री और चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश का अहम योगदान माना जा रहा है. प्रोजेक्ट की आधारशिला रखते समय उन्होंने कहा, "मैं दावोस में आदित्य मित्तल से मिलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उन्होंने समय नहीं दिया. उसी दौरान मेरी उनसे टाटा ग्रुप के कैंप में मुलाकात हुई. मैंने उनसे एक साधारण सा अनुरोध किया कि आप आंध्र प्रदेश में निवेश क्यों नहीं कर रहे? उन्होंने कहा कि वे पहले से दूसरे राज्यों में संभावना तलाश रहे हैं. मैंने आदित्य से कहा कि मैं आपके निर्णय की कद्र करता हूं, लेकिन अगर आपका प्रोजेक्ट दूसरे राज्यों में सफल नहीं होता है, तो आंध्र प्रदेश पूरी तरह तैयार है."
आदित्य मित्तल लक्ष्मी मित्तल के बेटे हैं और आर्सेलर मित्तल कंपनी के सीईओ हैं. वहीं नारा लोकेश आंध्र प्रदेश के आईटी, शिक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री हैं. साथ ही वे रोजगार सृजन मंत्रिमंडल समूह के अध्यक्ष भी हैं.
मोहन माझी सरकार की चुप्पी
अब इस मसले पर ओडिशा की राजनीति गरमा गई है. बीजू जनता दल (BJD) सांसद सस्मित पात्रा ने मोहन माझी सरकार के रवैये को इसके लिए दोषी ठहराया है. उन्होंने कहा, "यह बहुत दुखद और शर्मनाक है कि आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील के प्लांट, जो मूल रूप से ओडिशा के लिए प्रस्तावित था, अब आंध्र प्रदेश स्थानांतरित किए जा रहा है. जब नवीन पटनायक मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने जापान जाकर निप्पॉन स्टील के साथ एमओयू किया था. इसके बाद कंपनी ओडिशा में अपना प्लांट लगाने जा रही थी."
वे आगे कहते हैं, "सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि ओडिशा के खनिजों को पाइपलाइन के जरिए आंध्र प्रदेश भेजा जाएगा. अगर हर उद्योग ओडिशा से बाहर चला जाता है और हमारे संसाधन इस तरह निर्यात होते हैं, तो राज्य के लिए कुछ नहीं बचेगा. यह गलत है कि ओडिशा के संसाधनों का उपयोग कर स्टील प्लांट दूसरे राज्यों में लगाए जाएं."
BJD के एक और सांसद मानस मंगाराज ने कहा, "परियोजना का आंध्र प्रदेश जाना एक बड़ा झटका है. यह नवीन पटनायक के कार्यकाल में तय हुई थी, जिससे निवेश और रोजगार का वादा किया गया था. कई परियोजनाओं के ठप पड़ने के बीच वर्तमान BJP सरकार को जवाब देना चाहिए." हालांकि, ओडिशा सरकार की तरफ से फिलहाल इस पर चुप्पी साधी गई है.
इस प्रोजेक्ट में लगभग 1,35,964 करोड़ रुपए स्टील प्लांट पर और 11,198 करोड़ रुपए कैप्टिव पोर्ट पर खर्च होने हैं. यानी कुल निवेश लगभग 1.47 लाख करोड़ रुपए का है. यह 17.8 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता वाला प्लांट होगा. इसमें पहले चरण में 7.3 और दूसरे चरण में 10.5 मीट्रिक टन उत्पादन होगा. प्लांट के लिए 5,465 एकड़ और कैप्टिव पोर्ट के लिए 316 एकड़ जमीन दी जाएगी. संभावना है कि इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर लगभग 1.06 लाख नौकरियां पैदा होंगी. पहले चरण को 2028-29 तक और पूरे प्रोजेक्ट को 2030 तक तैयार करने का लक्ष्य है.
AM/NS का फोकस दक्षिण की ओर शिफ्ट होने से ओडिशा की औद्योगिक योजनाओं को झटका लगा है. फिलहाल दोनों राज्यों की तुलना एक साफ संदेश देती है कि जहां तेज मंजूरी और बेहतर क्रियान्वयन होगा, निवेश वहीं जाएगा. फिलहाल इस रेस में आंध्र प्रदेश आगे है.