राजस्थान के सीएम ने अपनी ही पुलिस की नाकामी पर सवाल क्यों उठाएॽ
दूसरे राज्यों की पुलिस कार्रवाई के बारे में राजस्थान पुलिस को कोई खबर न होने के मसले पर पिछले दिनों मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस महकमे के कामकाज पर सवाल उठाए थे

राजस्थान के हनुमानगढ़ कस्बे के राठीखेड़ा गांव में 10 दिसंबर, 2025 को किसानों ने इथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ महापंचायत बुलाई थी. खुफिया तंत्र ने पुलिस और प्रशासन को जो सूचना दी उसके अनुसार किसान फैक्ट्री के विरोध में सभा कर वापस लौटने वाले थे मगर हुआ इसके ठीक उलट.
महापंचायत में कुछ देर बाद ही भीड़ उग्र हो गई और इथेनॉल फैक्ट्री की तरफ बढ़ने लगी. पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज किया मगर भीड़ और भड़क गई. किसानों ने पुलिस पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए. इस घटना में 40 पुलिसकर्मियों सहित 60 से ज्यादा लोग घायल हुए. हनुमानगढ़ में इस घटना के बाद से स्थिति सामान्य नहीं हुई है.
यहां हनुमानगढ़ की इस घटना का जिक्र करना इसलिए जरूरी है क्योंकि 8 जनवरी को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आधुनिक पुलिसिंग को लेकर राजस्थान पुलिस की ओर से आयोजित सेमिनार में खुफिया तंत्र की नाकामी को लेकर जमकर नाराजगी जताई. मुख्यमंत्री ने कहा, ''हाल ही के दिनों में गुजरात एटीएस व मुंबई और पंजाब की एजेंसियों ने राजस्थान में आकर नशा तस्करों व अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की हैं मगर राजस्थान पुलिस व इंटेलिजेंस को इसकी भनक तक नहीं लगी. पुलिस और इंटेलिजेंस की यह बड़ी विफलता है.'' इसके बाद मुख्यमंत्री भले ही विपक्षी नेताओं के निशाने पर आ गए, मगर उनका यह बयान आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता का संकेत है.
राजस्थान में प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कहा, ''मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा खुद गृह विभाग के मुखिया हैं. इंटेलिजेंस नाकामी की ये घटनाएं साबित करती हैं कि मुख्यमंत्री को उनके विभाग की भी जानकारी नहीं है.'' पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी मुख्यमंत्री की इंटेलिजेंस नाकामी के बयान पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आरोप लगाया, "राज्य के मुख्यमंत्री खुद स्वीकार कर रहे हैं कि राजस्थान पुलिस की जानकारी के बिना ही गुजरात व महाराष्ट्र जैसे दूसरे राज्यों की पुलिस हमारे यहां कार्रवाई कर रही है. गुजरात, महाराष्ट्र में BJP की ही सरकार है. यह राजस्थान सरकार की कमजोरी का सबूत और राजस्थान पुलिस का सूचना तंत्र ध्वस्त होने का प्रमाण है.''
राजस्थान के मुख्यमंत्री का यह सवाल उठाना इसलिए भी अहम है क्योंकि संघीय ढांचे के तहत किसी भी राज्य की पुलिस को दूसरे राज्य में घुसकर कार्रवाई करने से पहले कुछ अहम बातों का ख्याल रखना होता है. किसी भी राज्य में जाने से पहले अपने वरिष्ठ अधिकारी से लिखित अनुमति लेनी होती है और दैनिक डायरी में प्रस्थान की एंट्री दर्ज की जाती है.
दूसरे राज्य में प्रवेश के समय स्थानीय पुलिस को सूचित करना होता है और गिरफ्तारी वारंट (आपात स्थिति में छोड़कर) लेना होता है. शिकायत, एफआईआर और अन्य ज़रूरी कागज़ात की उस राज्य की भाषा में अनुवादित प्रतियां भी साथ रखनी होती हैं. सभी पुलिसकर्मियों के लिए वर्दी और पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य है. अगर ऐसा नहीं होता तो वह कार्रवाई अवैध मानी जा सकती है और स्थानीय पुलिस मामला दर्ज कर सकती है. साथ ही अगर पुलिस बिना वॉरंट या स्थानीय पुलिस को बताए बिना किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है तो यह अवैध हिरासत की श्रेणी में आता है.
इंटेलिजेंस नाकामी की वे घटनांए जिनसे नाराज हुए सीएम
गुजरात एटीएस ने 29 दिसंबर को राजस्थान के भिवाड़ी कस्बे में नशे की फैक्ट्री पर छापा मारकर 22 किलो ड्रग्स जब्त की थी. गुजरात पुलिस ने राजस्थान पुलिस को भिवाड़ी पहुंचकर सूचना दी.
8 दिसंबर 2025 को गुजरात एटीएस ने राजस्थान के जोधपुर जिले के सोइंद्रा में चल रही मेफेड्रोन बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था. यहां से 40 किलो लिक्विड मेफेड्रोन और इसे बनाने के लिए दूसरे कच्चे माल और केमिकल ज़ब्त किए गए और 6 लोगों को हिरासत में लिया. गुजरात एटीएस ने एक ही महीने में लगातार दूसरी बार राजस्थान में नारकोटिक्स के खिलाफ सफल कार्रवाईयां की थीं.
इसी तरह बाड़मेर में एक नशे की फैक्ट्री पर गुजरात पुलिस ने कार्रवाई की जिसकी राजस्थान पुलिस को भनक तक नहीं लगी. मई 2024 में मुंबई एटीएस ने राजस्थान में इसी तरह की कार्रवाई को अंजाम दिया था जिसकी भनक भी पुलिस को नहीं लगी.
12 दिसंबर 2024 को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के काफिले में गलत दिशा से आकर एक निजी गाड़ी घुस गई. इस गाड़ी की मुख्यमंत्री के वीवीआईपी काफिले में चल रही एक पुलिस गाड़ी से टक्कर हो गई जिसमें राजस्थान पुलिस के एएसआई सुरेंद्र सिंह की मौत हो गई और पुलिस के चार जवान घायल हो गए. प्रतिपक्ष ने इस घटना का कारण इंटेलिजेंस की चूक बताया था.
अब सवाल है कि आखिर राजस्थान में इंटेलिजेंस तंत्र कमजोर क्यों है. इस बारे में राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र सिंह यादव कहते हैं, ''यह सच है कि राजस्थान का इंटेलिजेंस तंत्र उतना मजबूत नहीं है जितना पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात का है. इसका एक बड़ा कारण ये है कि इन राज्यों में जितने संसाधन पुलिस व इंटेलिजेंस के पास हैं, राजस्थान में उतने नहीं हैं. राजस्थान शांत प्रदेश होने के कारण यहां इंटेलिजेंस व पुलिस रिफॉर्म्स पर कम ध्यान दिया गया है. हालांकि पुलिस और इंटेलिजेंस तंत्र मजबूत होगा तब ही अपराध रुकेंगे.''
भूपेंद्र सिंह की यह बात सही है कि राजस्थान बाकी पड़ोसी राज्यों के मुकाबले शांत प्रदेश जरूर रहा है लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. जिस तरह गुजरात पुलिस ने यहां आकर कार्रवाई यह उसी का उदाहरण है. मुख्यमंत्री के सवाल उठाए जाने के बाद अब राजस्थान पुलिस के इंटेलीजेंस महकमे को पहले के मुकाबले चाक-चौबंद होना ही होगा इसकी असल परीक्षा तब होगी जब बीते दिनों जैसी घटनाएं फिर न दोहराई जाएं.