ओडिशा सरकार क्यों बदलने जा रही है 24 जगहों के नाम?
ओडिशा सरकार ने 11 जिलों के अंतर्गत आने वाले 24 अलग-अलग स्थानों के अंग्रेजी नामों की वर्तनी में बदलाव करने का फैसला लिया गया है

ओडिशा सरकार ने कई जिलों, उप-मंडलों, तहसीलों, ब्लॉकों और शहरी स्थानीय निकायों के नामों को बदलने का फैसला लिया है. फैसले का उद्देश्य दरअसल अंग्रेजी में प्रचलित इनकी गलत वर्तनी, जिनके चलते इन नामों का उच्चारण भी गलत हो जाता है, को दुरुस्त करना है. जैसे, देवगढ़ जिले को अब अंग्रेजी में Deogarh की जगह Debagarh लिखा जाएगा, क्योंकि ओड़िया जुबान में इसका उच्चारण 'देबगड़' किया जाता है.
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने एक सार्वजनिक नोटिस के जरिए यह सूचना जारी की. नोटिस के मुताबिक, प्रस्तावित बदलावों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी रिकॉर्ड ओडिशा की भाषाई, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सही तरीके से दिखाएं. नोटिस में यह भी कहा गया कि प्रस्तावित बदलाव मुख्य रूप से उन अंग्रेजी वर्तनियों को सुधारने के लिए हैं जो जिलों और जगहों के मूल ओड़िया नामों का सही प्रतिनिधित्व नहीं करतीं. इस तरह यह प्रक्रिया नए सिरे से नामकरण की नहीं, बल्कि वर्तनी संशोधन की है.
कौन से नाम बदलेंगे?
राज्य के 11 जिलों के अंतर्गत आने वाले 24 अलग-अलग स्थानों के अंग्रेजी नामों की वर्तनी में बदलाव करने का फैसला लिया गया है. कुछ उदाहरण हैं:
राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडिया टुडे हिंदी को बताया कि सभी नागरिकों और संस्थानों से आग्रह किया गया है कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने विचार लिखित रूप में, जरूरी दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करें. अगर किसी व्यक्ति या संस्था को इन प्रस्तावित नामों या उनकी वर्तनी पर कोई आपत्ति है, तो वे अधिसूचना जारी होने के 15 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं.
क्या होगा असर?
ओड़िया अध्ययन और अनुसंधान संस्थान, भुवनेश्वर के पूर्व अध्यक्ष पद्मश्री डॉ देबी प्रसन्न पटनायक मानते हैं कि इस पूरी प्रक्रिया को जरूरी या गैर-जरुरी प्रक्रिया के खांचे में रखकर नहीं देखना चाहिए. वे कहते हैं, ‘’इसमें कोई बुराई नहीं है. क्षेत्रों का अंग्रेजी उच्चारण भी स्थानीय बोली के अनुसार होना चाहिए. हालांकि इससे बहुत कुछ बदलेगा नहीं, लेकिन स्थानीयता का भाव प्रबल होगा.’’
क्या इसमें किसी तरह की कोई व्यवहारिक समस्या भी है? इस सवाल पर रिटायर्ड आइएएस अधिकारी सहदेब साहू कहते हैं, ‘’समस्या कुछ भी नहीं है. बस जो निर्धारित समय है, उसे लगना है." नाम बदलने की प्रक्रिया खासी लंबी हो सकती है. राज्य सरकार पहले संशोधन कर संबंधित नियम बनाएगी. फिर विधानसभा में पास कर इसे केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा. केंद्र फिर इसे रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के कार्यालय भेजेगी. वहां से अनुमोदित होने के बाद इसे अंतिम माना जाएगा.
साहू आगे कहते हैं, ‘’जहां तक सरकारी कागजात की बात है, तो संशोधन के आधिकारिक रूप से लागू होने के बाद ही ये सरकारी कागज-पत्तर में इस्तेमाल होंगे. इसलिए, ध्यान देने वाली बात है कि अगर कोई कंपनी पुरानी वर्तनी के आधार पर रजिस्ट्रेशन करा चुकी है, वो तत्काल नाम नहीं बदल पाएगी. इसके लिए उसे कंपनी के कानून के तहत संशोधन लाना होगा.’’
नाम बदलने का इतिहास
साल 2011 के नवंबर माह की पहली तारीख को नाम परिवर्तन अधिनियम, 2010 के तहत उड़ीसा (Orissa) का नाम बदलकर ओडिशा (Odisha) किया गया था. इसके साथ ही संविधान के 113वें संशोधन के तहत यहां की आधिरिक भाषा Oriya से Odia की गई थी.
देश में इससे पहले बॉम्बे का नाम 1995 में मुंबई किया गया था. मद्रास का नाम 1996 में चेन्नई रखा गया. कलकत्ता 2001 में कोलकाता बना. वहीं 2018 में इलाहबाद को प्रयागराज किया गया.
इन सब के बीच, बीती 6 फरवरी को भारतीय सेना ने ब्रिटिश राज से जुड़े प्रतीकों को हटाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए देशभर की छावनियों और सैन्य संस्थानों में ब्रिटिश दौर के 246 नाम बदल दिए हैं. वहीं बीती 4 फरवरी को राष्ट्रीय लोक मोर्चा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा में पटना का नाम पाटलिपुत्र कर देने का प्रस्ताव रखा.