नीतीश कुमार की सेहत पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

बिहार में बजट सत्र के दौरान नीतीश कुमार की दो टिप्पणियों के बाद उनकी सेहत पर तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं

Nitish Kumar
बजट सत्र से नीतीश कुमार ने राबड़ी देवी पर निशाना साधा. (Photo/ITG)

“आजकल मुख्यमंत्री महोदय पहले ऊपर देखते हैं, पत्रकारों की तरफ. फिर हमलोगों से तुम-ताम करने लगते हैं.” बिहार विधानसभा के बजट सत्र में कटौती प्रस्ताव पर बोलते हुए जब RJD विधायक कुमार सर्वजीत ने यह कहा तो उनका इशारा बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों में पिछले एक हफ्ते से जारी तकरार पर था. 

पिछले हफ्ते राज्यपाल के अभिभाषण के बाद अपने भाषण के दौरान लगातार टोका-टोकी पर चिढ़कर नीतीश कुमार ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को देखते हुए कहा था, “अरे तुम बच्चा है. तुम्हारा बाप मेरे समय का ना है. बैठो-बैठो. अरे उसका शादी भी बाद में हुआ था. चलो बैठो हल्ला मत करो.” फिर 9 फरवरी को उन्होंने विधान परिषद में तेजस्वी की मां और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को “ऐ लड़की” कहकर संबोधित कर दिया.
 
तेजस्वी पर की गई नीतीश की टिप्पणी पर तो ज्यादा बवाल नहीं हुआ मगर राबड़ी देवी को लड़की कहना RJD को अखर गया. 10 फरवरी को विधान परिषद में इसका पूरा असर दिखा. इस मुद्दे पर राबड़ी देवी को अपनी बहन कहने वाले RJD नेता सुनील कुमार सिंह और नीतीश कुमार के करीबी मंत्री अशोक कुमार चौधरी आपस में भिड़ गए. तकरार अभद्रता के स्तर पर पहुंची और मारपीट होते-होते बची. प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि दोनों ने एक दूसरे के साथ असंसदीय भाषा का भी इस्तेमाल किया. इस पर विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने पूरे विपक्ष के दिनभर के लिए सदन से निष्कासित कर दिया. इसके लिए मार्शल बुलाने की नौबत आ गई.
 
वहीं, अब तक नीतीश कुमार की दिमागी सेहत का उल्लेख करने से बचने वाले तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, “डिमेंशिया और अल्झाइमर का दुष्प्रभाव जब बढ़ता है तो व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त अवस्था में चला जाता है. जहां आप सहानुभूतिपूर्वक रोगी के मानसिक स्वास्थ्य लाभ की कामना ही कर सकते है. प्रदेश की प्रथम महिला मुख्यमंत्री को लड़की कहने तथा महिलाओं के प्रति अपनी संकीर्ण, नकारात्मक व दोषपूर्ण सोच का बारम्बार प्रदर्शन करने वाले मुख्यमंत्री को आप क्या कहेंगे?” फिर बाद में इसी मुद्दे पर RJD ने मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया.
 
इसके बाद 11 फरवरी को RJD की तरफ से एक और तीखी टिप्पणी आई. पार्टी ने अपने सोशल मीडिया पेज पर नीतीश की तुलना जिंदा लाश से कर दी. जवाब में JDU ने लिखा, “काश ऐसा लाश तुम्हारा बाप होता, कम से कम बिहार अपना अस्तित्व तो नहीं खोता.”
 
बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों भाषाई गरिमा के तार-तार होने की यह पहली घटना नहीं है. मगर इस बार इस मसले पर चर्चा इसलिए अधिक है, क्योंकि इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम शामिल है.
 
नीतीश कुमार के करीबी रहे लेखक-राजनेता और बिहार विधान परिषद के पूर्व सदस्य रहे प्रेम कुमार मणि इंडिया टुडे से बातचीत में कहते हैं, “नीतीश कुमार अपनी शालीनता के लिए जाने जाते रहे हैं. उनकी पार्टी में रहते हुए मैंने उन्हें करीब से देखा है. वे विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होते थे, मगर अब उनसे जैसा आचरण हो जा रहा है, उस पर सिर्फ अफसोस जताया जा सकता है.”
 
नीतीश के विरोधी भी मणि की इस बात से इत्तेफाक रखते हैं और अफसोस जताते हैं कि मुख्यमंत्री अब कई मौकों पर शिष्टाचार नहीं निभा पा रहे. हालांकि यह पहला मामला नहीं है. पिछले दो साल से अधिक वक्त से सदन में नीतीश कुमार का व्यवहार लोगों को हैरान कर रहा है. सबसे पहले इसकी झलक नवंबर, 2023 में मिली थी, जब उन्होंने विधान सभा और विधान परिषद दोनों में सेक्स एजुकेशन को लेकर कुछ ऐसी टिप्पणियां कर दी थीं, जिन्हें असंसदीय और अमर्यादित माना गया था. नीतीश कुमार और राबड़ी देवी के बीच तू-त, मैं-मैं की घटनाएं भी नई नहीं है. विधान परिषद में पिछले कुछ महीनों में कई बार दोनों उलझ चुके हैं.
 
छात्र जीवन से ही लालू और नीतीश के करीबी और सीनियर रहे पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी कहते हैं, “नीतीश लोहिया और कर्पूरी के अनुयायी रहे हैं और उनके सिद्धांतों पर चलते रहे हैं. मगर हाल के दिनों में उन्होंने जिस तरह अपने विचारों से समझौता किया है, जाहिर सी बात है यह उन्हें कचोटती होगी. मैंने कुछ साल पहले उनसे आग्रह किया था कि आप राजनीति छोड़ दीजिए और हम लोग आश्रम चलाएंगे. अभी-भी मैं उनसे यही आग्रह करना चाहूंगा कि आपके राजनीति छोड़ देने का वक्त आ गया है.”
 
हालांकि एक तरफ जहां RJD नीतीश कुमार के इस बर्ताव का विरोध कर रहा है और उनके पूर्व के करीबी राजनेता उनसे राजनीति छोड़ने की अपील कर रहे हैं, नीतीश की अपनी पार्टी के लोग इसे सामान्य बात बताते हैं. इसकी बानगी JDU के वरिष्ठ नेता श्याम रजक की टिप्पणी से मिलती है, जब वे कहते हैं, “माघ का महीना है, देवर-भाभी की आपस की बात है. किसी और को इस बीच में नहीं पड़ना चाहिए.”
 
वे इस पूरे मसले को मजाक में खारिज कर देना चाहते हैं. मगर उनके विरोध में RJD नेता रणविजय साहू कहते हैं, “देवर-भाभी का मजाक घर में होता है, सदन में नहीं.”
 
प्रेम कुमार मणि कहते हैं, “राबड़ी देवी कोई सामान्य महिला नहीं है. वे बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री हैं. अभी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष हैं. हमें उनकी गरिमा को समझना चाहिए. साथ ही यह भी समझना चाहिए कि सभा का मतलब ही सभ्य लोगों की जगह है और उसमें भी यह उच्च सदन है, जिसकी विशेष गरिमा है. यहां तो आचरण समिति भी है. ऐसे में इस तरह का आचरण लोकतंत्र के लिए दुखद है. हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में तो वोटरों के लिए भी योग्यता निर्धारित है. मैं इससे ज्यादा क्या कह सकता हूं. जरूर हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में कोई कमी रह गई है.”
 
वहीं दबे स्वर में RJD के वरिष्ठ प्रवक्ता चितरंजन गगन कहते हैं, “हमारे लिए तो चिंता का विषय यह है कि ऐसा व्यक्ति बिहार का मुख्यमंत्री है, उससे कौन क्या करवा ले, कहना मुश्किल है. उनको लोग संभालते रहते हैं. हम तो यही समझते हैं कि उन्हें ऐसी स्थिति में पद पर नहीं रहना चाहिए. हमने इस पूरे मामले की शिकायत राज्यपाल महोदय से की है.”

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