हाईकोर्ट के दो फैसलों से चर्चा में क्यों आईं राजस्थान की 'आयरन लेडी' आरती डोगरा?
एक तरफ हाईकोर्ट की टिप्पणियों से आरती डोगरा पर उठते सवाल हैं तो दूसरी तरफ एक ऐसी अफसर की साख है, जिसका करियर उपलब्धियों और प्रेरणा की मिसाल माना जाता है

राजस्थान हाईकोर्ट के 24 घंटे में आए दो फैसलों ने 'आयरन लेडी' कही जाने वाली राज्य की चर्चित आईएएस अधिकारी और बिजली कंपनियों की चेयरपर्सन आरती डोगरा को प्रशासनिक बहस के केंद्र में ला दिया है.
23 अप्रैल को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) जांच के आदेश दिए तो प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई. मगर महज 24 घंटे बाद ही हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उस आदेश पर रोक लगाकर पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया.
इस मामले की शुरुआत सुपरिटेंडेंट इंजीनियर आर.के. मीणा की उस याचिका से हुई, जिसमें उन्होंने 2022-23 की विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) और रोस्टर मैंटेनेंस में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया था. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इससे न केवल उन्हें एक्सईएन से सुपरिटेंडेंट इंजीनियर पद पर पदोन्नति से वंचित किया गया, बल्कि कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद उन्हें तीन चार्जशीट देकर प्रताड़ित भी किया गया है. सुनवाई के दौरान जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा, "ऐसा लगता है कि डिस्कॉम चेयरपर्सन ने जानबूझकर जांच पर निर्णय लंबित रखा. इसलिए इस मामले में भ्रष्टाचार की आशंका के पर्याप्त आधार बनते हैं."
कोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को इस मामले की जांच कर तीन माह में रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए. हालांकि ACB जांच शुरू करे, इससे पहले ही 24 अप्रैल को मामला पलट गया. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी. दरअसल आरती डोगरा और डिस्कॉम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एन. माथुर ने दलील दी थी, "यह भ्रष्टाचार का नहीं, सेवा और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा विवाद है. याचिकाकर्ता के खिलाफ तीन अलग-अलग जांचें पहले से लंबित हैं." इस आधार पर डिवीजन बेंच ने एकलपीठ के जांच के आदेश पर रोक लगा दी.
देखा जाए तो यह मामला केवल अदालती आदेशों तक सीमित नहीं है. यह प्रकरण इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सवाल जिस अफसर पर उठे हैं, वे राजस्थान की सबसे चर्चित और प्रभावशाली प्रशासनिक अधिकारियों में गिनी जाती हैं. उनका कद भले ही तीन फीट छह इंच है, मगर उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौतियों को कभी करियर की बाधा नहीं बनने दिया. यही कारण है कि वे केवल अफसर नहीं बल्कि प्रेरणा के रूप में भी देखी जाती हैं.
देहरादून में जन्मी 2006 बैच की आईएएस आरती डोगरा ने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी में 56वीं रैंक हासिल की थी. अजमेर, बूंदी और बीकानेर जैसे जिलों में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने कई इनोवेशन किए जो आज भी चर्चा में हैं.
बीकानेर में उनका ‘बांको बिकाणो’ अभियान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ, जिसकी सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक कर चुके हैं. दिव्यांग मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने से लेकर बालिका संरक्षण और स्वच्छता मॉडल तक, उनकी कई पहलें प्रशासनिक मॉडल के तौर पर पेश की जाती रही हैं. सरकार चाहे कांग्रेस की हो या BJP की, वे अपनी मेहनत और ईमानदारी के कारण हर सरकार की पसंद रही हैं. जोधपुर डिस्कॉम की पहली महिला एमडी बनने से लेकर वर्तमान में डिस्कॉम चेयरपर्सन की भूमिका तक, हर सरकार में उन्हें अहम जिम्मेदारियां मिलीं.
हालांकि अब एक तरफ अदालत की टिप्पणियों से उठे सवाल हैं, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसी अफसर की साख है, जिसका करियर अब तक उपलब्धियों और प्रेरणा की मिसाल माना जाता रहा है. शायद यही वजह है कि आरती डोगरा का यह मामला महज कोर्टरूम विवाद नहीं, बल्कि सिस्टम और छवि दोनों की परीक्षा बन गया है.
आरती डोगरा की पहलें और पुरस्कार
2015 में आरती डोगरा ने बीकानेर जिले को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) बनाने के उद्देश्य से 'बांको बीकाणो' की शुरुआत की. इसके कारण बीकानेर की 195 ग्राम पंचायतें ओडीएफ घोषित हुईं.
2018-19 में आरती डोगरा ने दिव्यांगजनों को मतदान करने और राज्य विधानसभा में प्रतिनिधित्व के लिए प्रोत्साहित किया. दिव्यांग रथों, विशेष व्यवस्थाओं और बूथ स्तर पर विकसित की गई सुविधाओं के कारण पहली बार रिकॉर्ड 17 हजार दिव्यांगजनों ने वोट डाला.
2015-16 में बीकानेर कलेक्टर रहते हुए आरती ने डॉक्टरों को अपने-अपने अस्पतालों में एक अनाथ बच्ची को गोद लेने और उसके भोजन, आवास व शिक्षा की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रोत्साहित किया. इस अभियान से प्रभावित होकर 40 डॉक्टरों ने 40 बच्चियों की जिम्मेदारी ली. यह परंपरा आज भी जिले में जारी है. जोधपुर डिस्कॉम में निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जोधपुर जिले में 3,27,819 एलईडी वितरित कीं.
आरती डोगरा और उनके इनोवेशन के लिए उन्हें प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार मिले हैं. इनमें अनमोल बेटी पुरस्कार और मतदाता जागरूकता के लिए 2019 का राष्ट्रपति पुरस्कार जैसे कई सम्मान शामिल हैं.