महाराष्ट्र : कौन बनेगा मुख्यमंत्री? फडणवीस का पलड़ा भारी लेकिन शिंदे अभी-भी सीन में हैं!
विधानसभा चुनाव से पहले एक समय महायुति की पार्टियां एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाने पर सहमत थीं लेकिन चुनाव की शुरुआत में ही यह एकराय बंट गई

राजनीति में पांच महीने का समय बहुत लंबा होता है और इस समय देवेंद्र फडणवीस से बेहतर यह आपको कोई नहीं बता सकता. महाराष्ट्र के इस बीजेपी नेता ने लोकसभा चुनाव में राज्य में अपनी पार्टी को मिली हार की जिम्मेदारी लेते हुए जून में इस्तीफा देने की पेशकश की थी.
करीब पांच महीने बाद नवंबर में, वे विधानसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति की जीत के प्रमुख सूत्रधारों में से एक बन चुके हैं. दूसरे सूत्रधार हैं मुख्यमंत्री और शिवसेना के प्रमुख एकनाथ शिंदे. अब महायुति इनमें से किसे मुख्यमंत्री बनाएगी? ताजा चुनाव नतीजे इस सवाल को जन्म देते हैं.
बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति ने 288 सीटों में से 230 सीटों पर कब्जा कर भारी जीत दर्ज की है, जबकि महा विकास अघाड़ी (MVA) महज 50 सीटें ही जीत पाई. महाराष्ट्र में बहुमत का आंकड़ा 145 है. देवेंद्र फडणवीस नागपुर दक्षिण पश्चिम से, जबकि एकनाथ शिंदे कोपरी-पचपाखड़ी निर्वाचन क्षेत्र से जीते हैं. महाराष्ट्र में नतीजे सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक बड़े तबके ने बीजेपी की जीत का श्रेय फडणवीस को दिया है. इंडिया टुडे टीवी के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई कहते हैं, “इस स्थिति में यही कहा जा सकता है कि अब देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे हैं.”
महायुति खेमे में शिंदे के मुख्यमंत्री बनाने को लेकर शुरुआत में सहमति थी लेकिन बाद में यह एकराय खत्म हो गई. गृह मंत्री अमित शाह ने इस महीने की शुरुआत में कहा कि महाराष्ट्र चुनाव के बाद सहयोगी इस बात का फैसला करेंगे कि मुख्यमंत्री कौन होगा. शाह ने 10 नवंबर को कहा, "फिलहाल एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री हैं. चुनाव के बाद तीनों गठबंधन सहयोगी सीएम पद पर फैसला करेंगे." एकजुटता दिखाते हुए शिंदे की शिवसेना ने भी कहा कि बीजेपी से कोई मुख्यमंत्री बनता है तो उसे दिक्कत नहीं है. 23 नवंबर को देवेंद्र फडणवीस ने भी पत्रकारों से बात करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री पद पर कोई विवाद नहीं है और चुनाव पूरा हो जाने के बाद तीनों पार्टियां (बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी) मिलकर मुख्यमंत्री तय करेंगी.
इस चुनाव में शिंदे की ‘लाडकी बहिन योजना’ को भी गेमचेंजर कहा जा रहा है जिसने महिला मतदाताओं को अपने पाले में लाने में मदद की. इस योजना को आगे बढ़ाने में शिंदे का असर इस मायने में खास हो जाता है कि महिलाओं को नकद पैसा देने का वादा कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन महा विकास अघाड़ी (MVA) ने भी किया था, लेकिन वह महिलाओं को भरोसा जीतने में उतना कामयाब नहीं हो पाया. जाहिर है कि ऐसे में मुख्यमंत्री पद के लिए शिंदे की दावेदारी अभी खत्म नहीं हुई है.