BSF को जमीन से लेकर BNS तक; शुभेंदु बंगाल में क्या बदल रहे?

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की चुनौतियां सिर्फ दिखावे की नहीं हैं. बंगाल पर भारी कर्ज, बेरोजगारी, कंपनियों का बंद होना और गांवों में भारी परेशानी जैसे बड़े संकट हैं

सुवेंदु अधिकारी
शुभेंदु अधिकारी

करीब 15 साल पहले BJP ने पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने के लिए गंभीर तैयारी शुरू की थी. अब 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी की सरकार पश्चिम बंगाल के मुख्य प्रशासनिक मुख्यालय नबन्ना में है.

BJP सरकार शासन के लहजे और प्राथमिकताओं दोनों को फिर से परिभाषित करने का प्रयास कर रही है. 11 मई को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नबन्ना की 14वीं मंजिल पर अपनी पहली कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की.

इस अहम बैठक में उन्होंने न केवल कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों की घोषणा की बल्कि ममता बनर्जी के तीन कार्यकालों की समाप्ति के बाद एक व्यापक राजनीतिक और वैचारिक बदलाव का भी संकेत दिया.

बंगाल में BJP सरकार का नेतृत्व कर रहे शुभेंदु अधिकारी पहले तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता और ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार थे. 2020 में उन्होंने BJP जॉइन कर ली और 2026 के विधानसभा चुनाव के चेहरे बन गए.

नबन्ना पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. मुख्य सचिव दुष्यंत नरियाला, DGP सिद्ध नाथ गुप्ता, कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया.  

शुभेंदु अधिकारी की पहली बड़ी प्रशासनिक बैठक में उनके साथ सरकार के पांच मंत्री शामिल थे. इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक किर्तनिया, खुदीराम टुडू और निशीथ प्रामाणिक का नाम प्रमुख है. इन सबको अपने-अपने विभाग सौंप दिए गए हैं.

दिलीप घोष पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास, कृषि विपणन और पशु संसाधन विकास के मंत्री बनाए गए हैं. अग्निमित्रा पॉल महिला एवं बाल कल्याण तथा नगरपालिका मामलों को संभालेंगी. किर्तनिया को खाद्य एवं आपूर्ति, और सहकारिता विभाग मिला है. वहीं खुदीराम टुडू को आदिवासी विकास, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा का जिम्मा सौंपा गया है. निशीथ प्रामाणिक के पास उत्तर बंगाल विकास, खेल और युवा मामलों के विभाग हैं.

इस कैबिनेट बैठक का मतलब किसी से छिपा नहीं था. कई सालों से BJP आरोप लगाती रही है कि ममता बनर्जी ही सरकार हैं. उनके अलावा पार्टी और सरकार की राज-काज चलाने में कोई अहम भूमिका नहीं रही. इसलिए शुभेंदु अधिकारी के पहले दिन को जानबूझकर ऐसा बनाया गया ताकि यह साफ संदेश जाए कि अब संस्थाएं फिर से मजबूत होंगी, प्रशासन सक्रिय और सख्त होगा, और कानून-व्यवस्था को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाएगा.

अपनी पहली कैबिनेट बैठक के बाद शुभेंदु बोले, "बंगाल में इस बार पहली बार बिना किसी मौत और डर-धमकी वाला शांत चुनाव हुआ है. हम जनता और चुनाव आयोग के शुक्रगुजार हैं. हम सभी कर्मचारियों, केंद्रीय पुलिस बलों, पर्यवेक्षकों, बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस का भी आभार व्यक्त करते हैं.”

BJP नेतृत्व लगातार यह कहता रहा है कि केंद्रीय बलों और सख्त चुनाव निगरानी के कारण विधानसभा चुनाव के दौरान हिंसा और धमकी नहीं हुई. केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस दोनों की सार्वजनिक रूप से तारीफ करके अधिकारी ने प्रशासन में निरंतरता का संकेत दिया.

लेकिन असली महत्व उन फैसलों में था जो बैठक के बाद घोषित किए गए. इनमें प्रमुख फैसला कैबिनेट का भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 600 एकड़ जमीन सीमा सुरक्षा बल (BSF) को ट्रांसफर करने की औपचारिक मंजूरी देना था. अधिकारी ने घोषणा की कि यह जमीन 45 दिनों के अंदर ट्रांसफर कर दी जाएगी. उन्होंने मुख्य सचिव और भूमि एवं राजस्व विभाग को इस काम को तेजी से पूरा करने का जिम्मा सौंपा.

यह फैसला BJP की बंगाल की राजनीति की उस लाइन से मैच करता है, जिसमें अवैध घुसपैठ, बिना कागजात वाले लोगों का आना और सीमा पर तस्करी जैसे मुद्दे प्रमुख हैं. BJP सालों से तृणमूल (TMC) सरकार पर आरोप लगाती रही कि उसने वोटबैंक के लिए सीमा पर बाड़ लगाने का काम रोका हुआ था. सीमा पर बाड़ लगाने को पहला बड़ा फैसला बनाकर शुभेंदु अधिकारी सरकार ने बता दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसंख्या संबंधी राजनीति अब उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर है.

सीएम शुभेंदु अधिकारी ने आयुष्मान भारत और बाकी बची हुई केंद्र सरकार की कल्याण योजनाओं को बंगाल में तुरंत शुरू करने का ऐलान किया. ममता सरकार के समय बंगाल आयुष्मान भारत में शामिल नहीं हुआ था. ममता सरकार ने अपनी स्वास्थ्य साथी योजना को ज्यादा महत्व दिया था. अधिकारी ने दोनों को साथ चलाने का फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य साथी और राज्य की अन्य योजनाएं भी केंद्रीय योजनाओं के साथ जारी रहेंगी.

हालांकि, इन कल्याणकारी घोषणाओं के साथ ही शुभेंदु सरकार ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक शर्त भी लगाई है. सरकार ने साफ कहा है कि जिन लोगों का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, जिन्होंने नागरिकता का आवेदन नहीं किया और ट्रिब्यूनल में भी नहीं गए, उन्हें कोई लाभ नहीं मिलेगा. जिन्होंने ट्रिब्यूनल में अपील कर रखी है, वे सही दस्तावेज दिखाने पर लाभ ले सकेंगे. यह बात BJP की उस बड़ी चर्चा से बिल्कुल मेल खाती है, जिसमें नागरिकता जांच और अवैध घुसपैठिए की पहचान पर ज्यादा जोर दिया जाता है.

शुभेंदु अधिकारी ने कैबिनेट बैठक में जनगणना को फिर से शुरू करने का ऐलान किया. उन्होंने पिछली सरकार पर आरोप लगाया कि उसने वोटबैंक की राजनीति के लिए जानबूझकर जनगणना को रोक रखा था. उन्होंने कहा, “पिछली सरकार सिर्फ तुष्टीकरण, भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्याचार और शासन को पूरी तरह नष्ट करने के लिए मशहूर थी.” साथ ही अधिकारी ने कहा कि जनगणना रोकने का ममता सरकार का मकसद था कि परिसीमन न हो और हमारी माताओं-बहनों को आरक्षण न मिले. हम इसकी पूरी जांच के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी बनाएंगे.

इन बयानों से साफ होता है कि BJP सरकार इस प्रशासनिक परिवर्तन को ममता बनर्जी के 15 वर्षों के कुशासन के सुधार के रूप में पेश करना चाहती है. यही कारण है कि कानून व्यवस्था एक और प्रमुख मुद्दा बन गई है. अधिकारी ने पुराने आपराधिक कानून ढांचे के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) को तत्काल लागू करने की घोषणा की. उन्होंने कहा, “पिछली सरकार ने BNS को लागू नहीं किया था. इसे आज से अपनाया जा रहा है.”

इसी क्रम में मुख्यमंत्री अधिकारी ने कानून व्यवस्था का जायजा लेने के लिए मुख्य सचिव, गृह सचिव संघमित्रा घोष, DGP और कोलकाता पुलिस प्रमुख के साथ एक अलग समीक्षा बैठक बुलाई. अधिकारी के मुताबिक, चर्चा का केंद्र बिंदु प्रत्येक नागरिक के लिए सुरक्षा, सुशासन और समग्र विकास सुनिश्चित करना है.

सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर सरकार का संदेश धार्मिक और नागरिक नियमों तक फैला हुआ है. सीएम अधिकारी ने घोषणा की कि बंगाल में हर कोई स्वतंत्र रूप से और शांतिपूर्वक अपने धर्म का पालन कर सकेगा. हालांकि उन्होंने धार्मिक गतिविधियों के नाम पर सार्वजनिक असुविधा और सड़क अवरोधों के खिलाफ चेतावनी दी. उन्होंने कहा, “किसी भी धार्मिक स्थल को लाउडस्पीकर का इस तरह इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी, जिससे दूसरों को असुविधा हो. सड़कों को रोककर पूजा-अर्चना करने की अनुमति नहीं होगी.”

साथ ही, सरकार ने दुर्गा पूजा, रमजान और ईद जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान लचीलापन दिखाने का संकेत दिया और कहा कि कानूनी मंजूरी के साथ विशेष परिस्थितियों में सड़क पर होने वाले समारोहों की अनुमति दी जा सकती है. यह संतुलन बनाने का प्रयास तटस्थता का प्रदर्शन करने के साथ-साथ BJP के सख्त नागरिक नियमों पर जोर देने को भी दर्शाता है.

शायद सबसे विवादास्पद घोषणा तब हुई, जब अधिकारी ने हवाई अड्डे पर एक रनवे के पास मस्जिद की मौजूदगी के कारण उत्पन्न समस्याओं का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले पर अधिकारियों से चर्चा करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या मस्जिद को स्थानांतरित करके कहीं और बनाया जा सकता है. ताकी रनवे फिर से पूरी तरह से चालू हो सके. हालांकि, इसे बुनियादी ढांचे का मुद्दा बताया गया है लेकिन बंगाल के संवेदनशील सांप्रदायिक माहौल को देखते हुए इस बयान से विवाद शुरू होने की संभावना है.

सरकार ने शिक्षा प्रशासन से संबंधित निर्देश भी जारी किए. बंगाल भर के जिला मजिस्ट्रेटों को सभी स्कूलों और कॉलेजों के शासी निकायों को भंग करने का निर्देश दिया गया, जिससे पूर्व शासन के दौरान निर्मित संस्थागत प्रबंधन और व्यापक समीक्षा का संकेत मिलता है. साथ ही, पूर्व प्रशासन के तहत शुरू की गई अधूरी सरकारी परियोजनाओं का अब पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा.

बेरोजगारी से जुड़ी पुरानी शिकायतों को दूर करने के मकसद से सरकार ने एक और फैसला लेते हुए पिछले वर्षों में भर्ती के अवसर से चूक जाने वाले उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट की घोषणा की है. यह कदम शायद उन लाखों उम्मीदवारों को आश्वस्त करने के लिए उठाया गया है जो पहले रुकी हुई या भ्रष्टाचार के कारण भर्ती प्रक्रियाओं से निराश हो चुके हैं.

मुख्यमंत्री ने IAS, IPS और WBPS अधिकारियों को अन्य राज्यों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने से प्रतिबंधित करने वाली पिछली नीति को पलट दिया. मुख्यमंत्री ने यातायात नियमों के बदलाव की भी घोषणा की. साथ ही सीएम ने संवैधानिक प्रावधानों के तहत सिखों को हेलमेट पहनने से छूट देने का विशेष रूप से जिक्र किया.

पहले के सरकार को लेकर तीखे आलोचनात्मक लहजे के बावजूद, अधिकारी ने ममता को दी गई सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कमी नहीं करने की बात कही है. यह फैसला उनकी प्रशासनिक परिपक्वता को दिखाता है. उनका यह फैसला पहले ममता के खिलाफ दिए उनके तीखे बयानों के कारण राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों से बचने के लिए तैयार किया गया लगता है.

अधिकारी बार-बार समाज के सभी लोगों के लिए काम करने की बात कहते हैं. उनका यह नारा BJP के लिए बंगाल में हुए बेहद ध्रुवीकृत चुनाव के बाद अपने सामाजिक गठबंधन को व्यापक बनाने के प्रयासों को दिखाता है. उन्होंने कहा, "लोगों ने अपनी जान कुर्बान की है. हम उन्हें हमेशा याद रखेंगे. हम उन्हें न्याय दिलाएंगे और उनकी जिम्मेदारी लेंगे."

हालांकि, नए मुख्यमंत्री के सामने चुनौती केवल प्रतीकात्मक या प्रशासनिक घोषणाओं तक सीमित नहीं है. बंगाल भारी कर्जे, उच्च बेरोजगारी, औद्योगिक गतिरोध, ग्रामीण संकट और गहरी ध्रुवीकृत राजनीति से जूझ रहा है. BJP सरकार को अब विपक्ष की बयानबाजी से हटकर वास्तविक शासन व्यवस्था पर ध्यान देना होगा. उसके शुरुआती कदम एक ऐसे शासन मॉडल का संकेत देते हैं जिसमें कानून बदलाव, मजबूत नौकरशाही नियंत्रण, केंद्रीय योजनाओं का कार्यान्वयन और सीमाओं, नागरिकता और नागरिक व्यवस्था के संबंध में अधिक मुखर राष्ट्रवादी ढांचा शामिल है.

शुभेंदु अधिकारी शासन के जिस मॉडल को लागू करना चाहते हैं, वह न केवल बंगाल के भविष्य को बल्कि पूर्वी भारत में BJP की दीर्घकालिक संभावनाओं को भी आकार देगी. फिलहाल, नबन्ना में अधिकारी के पहले दिन से एक बात स्पष्ट हो गई कि बंगाल की राजनीतिक संरचना बदल गई है.

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