सरकार बनाने के लिए विजय के सामने कई विकल्प; वे किसे चुनेंगे?

अभी तक के रुझानों के मुताबिक विजय की पार्टी TVK तमिलनाडु में बहुमत के आंकड़े से कुछ दूर रह सकती है और ऐसे में सरकार बनाने के लिए उन्हें सहयोगियों की जरूरत होगी

Vijay DMK
TVK प्रमुख विजय

अभिनेता से नेता बने विजय ने तमिलनाडु में एक जोरदार शुरुआत की है, जो फिल्मी सितारों को अपना नेता चुनने का एक लंबा इतिहास रखने वाला राज्य है. विजय ने द्रविड़ प्रभुत्व (duopoly) के बीच बदलाव का वादा किया था. हालांकि, अगर TVK(TVK) बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाती है, तो उसके पास क्या विकल्प हैं?

जीत उनके नाम में ही है और अपने नाम को साकार करते हुए एक्टर से नेता बने विजय तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी और मुख्य विपक्षी गठबंधन को पीछे छोड़ते हुए काफी आगे निकलते दिख रहे हैं. काउंटिंग के अब तक आए रुझानों के मुताबिक विजय की पार्टी TVK 100 से अधिक सीटों पर आगे चल रही है.

हालांकि TVK राज्य में "बिना किसी समर्थन के" सरकार बनाने के प्रति आश्वस्त है, लेकिन संभावना है कि पार्टी 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में 118 के बहुमत के आंकड़े को पार न कर पाए. ऐसी स्थिति में, विजय को सरकार बनाने के लिए सहयोगियों की जरूरत होगी.

इस स्थिति में विजय के पास विकल्पों की भरमार है. चुनावों से पहले TVK ने AIADMK के नेतृत्व वाले NDA और DMK, दोनों के साथ गठबंधन से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था और अपने अभियान को स्थापित द्रविड़ राजनीति से पूरी तरह अलग बताया था. हालांकि, बहुमत का आंकड़ा पार करने के लिए उसे छोटी द्रविड़ पार्टियों के समर्थन की आवश्यकता हो सकती है. हालांकि कांग्रेस पहले ही विजय को समर्थन देने के संकेत दे चुकी है.

विजय की लहर तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. इस दक्षिणी राज्य का एमजीआर (MGR) जैसे फिल्मी सितारों को अपना नेता चुनने का एक लंबा इतिहास रहा है लेकिन रजनीकांत और कमल हासन जैसे कई प्रतिष्ठित नाम बड़े-भारी स्टारडम के बावजूद चुनावी सफलता पाने में नाकाम रहे.

चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने अपनी रैलियों में भारी भीड़ जुटाई, विशेष रूप से युवाओं और शहरी मतदाताओं की. विजय के पक्ष में क्या रहा, इसका आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी लेकिन शायद उन्होंने दलित और अल्पसंख्यक ईसाई वोटों का एक बड़ा हिस्सा हासिल किया जो उनके बिना DMK को जाता. इसके अलावा विजय को सत्ता विरोधी वोटों का भी फायदा मिलता दिख रहा है जो उनके चुनावी मैदान में न रहने पर AIADMK को जाता. लेकिन बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि क्या विजय उन द्रविड़ पार्टियों से हाथ मिलाएंगे जिनके खिलाफ उन्होंने चुनाव लड़ा है?

विजय के सामने विकल्प

स्थिति 1: विजय AIADMK के साथ गठबंधन कर सकते हैं. दरअसल यह पार्टी भी चुनाव से पहले TVK के साथ गठबंधन करना चाहती थी. हालांकि, राज्य की 234 सीटों में से आधे से अधिक सीटों की TVK की मांग और विजय को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने के मुद्दे पर बातचीत विफल हो गई थी. अब कहानी बदल गई है, और AIADMK अपनी किस्मत पलटने के लिए विजय से हाथ मिलाने को तैयार हो सकती है. AIADMK की प्रवक्ता अप्सरा रेड्डी ने कहा भी है, "यह कहकर मैं एक जोखिम ही ले रही हूं लेकिन कोई प्रस्ताव आता है तो मुझे नहीं लगता कि पार्टी उस गठबंधन को ना कहेगी."

वहीं दूसरी तरफ विजय चुनाव के दौरान DMK पर काफी तीखे हमले करते रहे हैं. TVK स्टालिन के साथ गठबंधन करेगी इसकी संभावना कम ही है. विजय ने साफ-साफ कहा था कि DMK उनकी "राजनीतिक दुश्मन" है, वहीं BJP उसकी "वैचारिक दुश्मन" है. उन्होंने यहां तक ​​आरोप लगाया था कि दोनों पार्टियों में एक मिलीभगत है और हार के बाद, स्टालिन भ्रष्टाचार के मामलों से बचने के लिए "पीएम मोदी के चरणों में गिर जाएंगे".

स्थिति 2: विजय BJP को अपना 'वैचारिक’ दुश्मन बता चुके हैं तो ऐसे में AIADMK से गठबंधन के लिए वह शर्त रख सकते हैं पार्टी पहले BJP का साथ छोड़े. हालांकि यह एक बड़ी मांग होगी क्योंकि BJP ही थी जिसने AIADMK गठबंधन बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाई.
BJP को लेकर विजय की हिचकिचाहट को इस तथ्य से भी समझा जा सकता है कि पिछले साल करूर भगदड़ के बाद भगवा पार्टी ने उन पर कड़ा हमला किया था, जिसमें 40 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. इसके अलावा, उनकी जल्दी ही रिलीज होने जा रही फिल्म 'जन नायक' को सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट हासिल करने में काफी दिक्कतों को सामना करना पड़ा. इसके अलावा उनकी फिल्म पिछले महीने लीक भी हो गई थी, जिससे कथित तौर पर लगभग 70 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.

स्थिति 3: विजय के पास DMK या AIADMK में से किसी के साथ भी गठबंधन न करने का विकल्प है. TVK दोनों द्रविड़ पार्टियों के छोटे सहयोगियों जैसे पीएमके (PMK), प्रेमलता विजयकांत की डीएमडीके (DMDK), वीसीके (VCK) और एएमएमकेएमएनकेजेड (AMMKMNKZ) के साथ पिछले दरवाजे से बातचीत शुरू कर सकती है. इससे विजय को किसी वरिष्ठ साथी के बोझ के बिना अपनी खुद की विरासत बनाने की जगह मिलेगी.

स्थिति 4: विजय स्थानीय तमिलनाडु पार्टियों को पूरी तरह से छोड़ सकते हैं और कांग्रेस के बाहरी समर्थन से अपनी सरकार बना सकते हैं. राज्य कांग्रेस ने कहा है कि बहुमत से कम रहने पर वह TVK का समर्थन करने के लिए तैयार है. वैसे कांग्रेस DMK की सरकार में साझेदार थी, हालांकि उसका कोई विधायक मंत्री नहीं था.

Read more!