नो व्हीकल डे, सुरक्षा काफिले में कटौती; उत्तराखंड सरकार ईंधन की बचत के लिए क्या कर रही?

13 मई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने उत्तराखंड में ईंधन की बचत करने से जुड़े कई फैसले किए गए

 Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami approved the recommendation for a CBI inquiry into the UKSSSC paper leak case
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष अपील के बाद उत्तराखंड सरकार बेहद सक्रियता से इसे धरातल पर उतारती नजर आ रही है. इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने सुरक्षा काफिले में बड़ा बदलाव करते हुए वाहनों की संख्या 9 से घटाकर मात्र 5 कर दी है.

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट और संसाधनों की सीमित आपूर्ति को देखते हुए भारत सरकार अब इनके किफायती इस्तेमाल पर विशेष बल दे रही है. पिछले दिनों पीएम मोदी ने हैदराबाद की रैली में देशवासियों से पेट्रोल और एलपीजी की खपत कम करने के साथ ही अगले एक वर्ष तक सोना न खरीदने का भी आह्वान किया था.

विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने नागरिकों को कारपूलिंग, मेट्रो सेवाओं के उपयोग, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने और माल ढुलाई के लिए रेलवे का उपयोग करने जैसे व्यावहारिक सुझाव दिए थे. उन्होंने अनावश्यक विदेश यात्राओं को टालने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया था, जिसका सीधा असर अब उत्तराखंड की सरकार में भी दिख रहा है.

13 मई को मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के सुझावों को लागू करने के लिए राज्य में अल्पकालिक और दीर्घकालिक सुधार तत्काल प्रभाव से प्रभावी कर दिए गए हैं. उन्होंने घोषणा की कि सरकारी कामकाज में अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता दी जाएगी और निजी क्षेत्र में भी 'वर्क फ्रॉम होम' को प्रोत्साहित किया जाएगा.

सरकार ने मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के फ्लीट को आधा करने के साथ एक दिन 'नो व्हीकल डे' घोषित करने का भी फैसला किया है. इस दिन सभी लोग घर से ही काम करेंगे. आम जनता को भी इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा. सरकारी विभागों में संसाधनों के बेहतर उपयोग के तहत एसी के सीमित प्रयोग और अलग-अलग विभागों के अधिकारियों द्वारा दिन भर में केवल एक ही वाहन के उपयोग जैसे कड़े निर्देश जारी किए गए हैं.

परिवहन क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन हेतु मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक बसों की क्षमता बढ़ाने और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए एक प्रभावी नीति लाने के निर्देश दिए हैं. भविष्य में होने वाली सरकारी वाहन खरीद में अब 50 प्रतिशत हिस्सेदारी अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों की होगी, जिसके लिए राज्य भर में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क प्राथमिकता से फैलाया जाएगा.

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन

विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य से 'विजिट माय स्टेट' अभियान के माध्यम से घरेलू पर्यटन को नई गति दी जाएगी. इसके तहत राज्य के धार्मिक, वेलनेस, ग्रामीण और इको-टूरिज्म सर्किट का व्यापक प्रचार किया जाएगा. उत्तराखंड को 'डेस्टिनेशन वेडिंग' के केंद्र के रूप में स्थापित करने हेतु 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस' की व्यवस्था की जा रही है और प्रवासी भारतीयों को अपनी छुट्टियां उत्तराखंड में बिताने के लिए आकर्षित किया जाएगा.

जन-जागरूकता के लिए 'मेरा भारत, मेरा योगदान' जैसे अभियान चलाए जाएंगे. साथ ही, 'मेड इन स्टेट' और 'मेक इन इंडिया' के तहत स्थानीय उत्पादों की सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाएगी. नागरिकों को सोने की खरीद सीमित करने के साथ-साथ स्वास्थ्य की दृष्टि से कम तेल वाले भोजन के लाभों के प्रति भी जागरूक किया जाएगा. इसके लिए स्कूलों, अस्पतालों और होटलों में 'लो-ऑयल मेनू' को प्रोत्साहित करने की योजना है.

कृषि और वैकल्पिक ऊर्जा पर फोकस

कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और मृदा स्वास्थ्य के लिए किसानों को 'नेचुरल फार्मिंग' और 'जीरो बजट फार्मिंग' का प्रशिक्षण दिया जाएगा. ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की दिशा में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शनों को मिशन मोड पर वितरित किया जाएगा और 'पीएम सूर्य घर योजना' के अंतर्गत रूफटॉप सोलर पैनलों को बढ़ावा दिया जाएगा. ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर गैस के उपयोग हेतु पंचायती राज और ग्राम्य विकास विभाग संयुक्त रूप से कार्य करेंगे.

विकास परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए खनन, सोलर और पावर प्रोजेक्ट्स के प्रस्तावों को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) द्वारा 60 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से मंजूरी दी जाएगी. गौरतलब है कि पीएम की इस अपील के बाद राज्य के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और विधायक प्रेमचंद अग्रवाल जैसे जनप्रतिनिधि स्वयं स्कूटी से आवाजाही कर समाज के सामने मितव्ययिता का उदाहरण पेश कर चुके हैं.

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