बजट में 'ज्ञान फार्मूले' से मुख्यमंत्री धामी साध पाएंगे चार बड़े वोटबैंक? 

वित्त वर्ष 2026-27 के उत्तराखंड के बजट में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने ‘GYAN मॉडल’ के जरिए गरीब, युवा, किसान और महिलाओं पर फोकस किया है

Uttrakhand CM Pushkar singh Dhami going to present budget 2026
बजट पेश करने जाते उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी

किसी भी सरकार का बजट हमेशा सिर्फ़ वित्तीय दस्तावेज़ नहीं होता, बल्कि आने वाले राजनीतिक मौसम का संकेत भी देता है. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 1,11,703 करोड़ रुपए का जो बजट पेश किया है, वह भी इसी मायने में खास है. यह बजट आकार में पिछले साल से करीब 10.41 प्रतिशत बड़ा है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है इसकी राजनीतिक टाइमिंग और सामाजिक फोकस. 

उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में यह बजट साफ तौर पर चुनावी वर्ष से ठीक पहले सरकार की प्राथमिकताओं और रणनीति को सामने रखता है. इस बजट का केंद्रीय विचार 'संतुलन' और ‘GYAN मॉडल' है. सरकार ने गरीब (G), युवा (Y), अन्नदाता (A) और नारी (N) को विकास के चार स्तंभ बताते हुए इन्हीं वर्गों के लिए योजनाओं का बड़ा पैकेज पेश किया है. 

राजनीतिक नजरिये से देखें तो ये चार सामाजिक समूह उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इसलिए बजट की संरचना को केवल विकास कार्यक्रमों की सूची के रूप में नहीं, बल्कि 2027 के चुनावी समीकरणों को साधने की कोशिश के रूप में पढ़ा जा रहा है.

सबसे पहले नजर गरीब कल्याण पर जाती है. सरकार ने गरीबों के लिए खाद्य सुरक्षा और आवास योजनाओं में बड़ा निवेश दिखाया है. अन्नपूर्ति योजना के लिए लगभग 1300 करोड़ रुपए का प्रावधान और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण और शहरी) के लिए अलग-अलग मदों में बजट का आवंटन इस बात का संकेत है कि सरकार गरीब और निम्न आय वर्ग को सीधे लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है. आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आवास, परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा और रसोई गैस पर सब्सिडी जैसी घोषणाएं भी इसी सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश हैं. उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में जहां बड़ी आबादी अभी भी ग्रामीण और सीमित आय वाले वर्गों में आती है, वहां ऐसी योजनाएं चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं.

युवाओं को लेकर भी बजट में स्पष्ट संदेश दिया गया है. राज्य में बेरोजगारी और पलायन लंबे समय से राजनीतिक मुद्दा रहे हैं. धामी सरकार ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए 60 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जबकि पलायन रोकथाम योजना के लिए भी बजट रखा गया है. गैर सरकारी महाविद्यालयों को सहायता के लिए 155 करोड़ रुपए का आवंटन यह बताता है कि सरकार उच्च शिक्षा और रोजगार के बीच कड़ी मजबूत करने की कोशिश कर रही है. पहाड़ों से मैदानों की ओर पलायन उत्तराखंड की राजनीति में हमेशा से एक संवेदनशील विषय रहा है और युवाओं को स्थानीय स्तर पर अवसर उपलब्ध कराने की घोषणाएं इसी चुनौती का जवाब देने की कोशिश हैं.

किसानों के लिए बजट में पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर हाई-वैल्यू कृषि और बागवानी पर जोर दिखाई देता है. “मिशन एपल” के लिए 42 करोड़ रुपए, ट्राउट प्रोत्साहन योजना के लिए लगभग 40 करोड़ रुपए, कीवी और ड्रैगन फ्रूट जैसी महंगी फसलों को बढ़ावा देने के लिए अलग बजट और मिलेट मिशन के लिए राशि का प्रावधान इस दिशा में संकेत देता है कि सरकार पहाड़ी कृषि को बाजार से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है. साथ ही दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहन, मत्स्य संपदा योजना और किसान पेंशन जैसी योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने की कोशिश के रूप में देखी जा रही हैं.

महिलाओं के लिए बजट में कई योजनाओं को प्रमुखता दी गई है. नंदा गौरा योजना के लिए 220 करोड़ रुपए, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए लगभग 48 करोड़ और मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना के लिए 30 करोड़ रुपए का प्रावधान महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण पर जोर दिखाता है. पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड की राजनीति में महिला मतदाताओं का प्रभाव बढ़ा है और विभिन्न दलों ने महिलाओं को लक्षित योजनाओं के जरिए अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश की है. धामी सरकार का यह बजट भी उसी रणनीति की निरंतरता के रूप में देखा जा सकता है.

बजट का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन से जुड़ा है. राज्य सरकार ने रिस्पना-बिंदल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना के लिए 350 करोड़ रुपए, पर्यटन बुनियादी ढांचा विकास के लिए 100 करोड़ रुपए और पुलिस कर्मचारियों की आवास सुविधाओं के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. इसके अलावा हरिद्वार में कुंभ मेले की तैयारियों के लिए केंद्र से 1027 करोड़ रुपए की मदद का प्रस्ताव भी शामिल है. हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा कॉरिडोर परियोजनाओं के लिए बजट का अलग प्रावधान धार्मिक पर्यटन को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में स्थापित करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है.

पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख आधार है और पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार ने इसे और अधिक व्यवस्थित तरीके से विकसित करने की कोशिश की है. आध्यात्मिक पर्यटन के साथ-साथ साहसिक पर्यटन और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के प्रयास भी बजट में दिखाई देते हैं. स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन की अवधारणा इसी सोच का हिस्सा है, जिसके माध्यम से धार्मिक आस्था और स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक साथ जोड़ा जा सकता है. 

स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर भी बजट में ध्यान दिया गया है. अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जबकि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लिए भी पर्याप्त राशि रखी गई है. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के लिए ईजा-बोई शगुन योजना और अन्य स्वास्थ्य योजनाएं भी बजट में शामिल हैं.
तकनीक और भविष्य की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने AI मिशन और स्टार्टअप वेंचर फंड जैसी पहलों के लिए भी बजट का प्रावधान किया है. हालांकि इन मदों में राशि अपेक्षाकृत कम है, लेकिन यह संकेत देता है कि सरकार पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ नई तकनीकों और इनोवेशन को भी राज्य के विकास मॉडल में शामिल करना चाहती है. सरकारी कॉलेजों में ई-लाइब्रेरी और ‘लैब ऑन व्हील्स’ जैसी योजनाएं शिक्षा में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं.

हालांकि बजट में कई महत्वाकांक्षी घोषणाएं हैं, लेकिन वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की कोशिश भी दिखाई देती है. राज्य को 2,536 करोड़ रुपए का रेवेन्यू सरप्लस मिलने का अनुमान है, जबकि वित्तीय घाटा 12,579 करोड़ रुपए रहने की संभावना है, जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद का लगभग 2.94 प्रतिशत है. यह आंकड़ा वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन अधिनियम की सीमा के भीतर है, जिससे सरकार यह संदेश देना चाहती है कि विकास और कल्याण योजनाओं के साथ वित्तीय संतुलन भी बनाए रखा जा रहा है.

राजनीतिक दृष्टि से यह बजट कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है. एक ओर यह राज्य के पारंपरिक सामाजिक समूहों को साधने की कोशिश करता है, तो दूसरी ओर विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए भविष्य की आर्थिक संभावनाओं को भी सामने रखता है. चुनावी वर्ष से पहले पेश किया गया यह बजट सरकार के लिए उपलब्धियों का रोडमैप भी है और मतदाताओं के सामने भविष्य की प्राथमिकताओं का संकेत भी. आलोचकों का कहना है कि कई योजनाएं पहले से चल रही योजनाओं का ही विस्तार हैं और नई घोषणाओं का प्रभाव जमीन पर कितना दिखेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा. इसके अलावा राज्य की भौगोलिक चुनौतियां, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दे भी ऐसे हैं जिन पर लगातार निवेश और दीर्घकालिक नीति की जरूरत है.

फिर भी राजनीतिक रूप से देखें तो यह बजट स्पष्ट रूप से चुनावी संदेश देने वाला दस्तावेज़ है. इसमें सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तीकरण, युवा रोजगार, किसान कल्याण और पर्यटन विकास जैसे उन सभी मुद्दों को शामिल किया गया है जो राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों और वर्गों को सीधे प्रभावित करते हैं. इस तरह वित्त वर्ष 2026-27 का बजट केवल आर्थिक योजना नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी का संकेत भी है. अगर इन योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से होता है तो यह सरकार के लिए चुनावी मैदान में एक मजबूत आधार तैयार कर सकता है. लेकिन अगर घोषणाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं तो विपक्ष के लिए यह सरकार पर सवाल उठाने का बड़ा मुद्दा भी बन सकता है.

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