बनारस-कानपुर जैसे शहरों को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिला पाएगा AI ?
योगी सरकार ने शुरू की AI आधारित C-RTC योजना, शहरों का ट्रैफिक जाम दूर करने के लिए आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, रूट मार्शल का सहारा

लखनऊ के कैसरबाग चौराहे पर शाम के वक्त खड़े होकर अगर आप शहर की धड़कन को महसूस करना चाहें, तो यहां की ट्रैफिक ही सबसे सटीक तस्वीर पेश करती है. चार दिशाओं से आती गाड़ियों का दबाव, बीच-बीच में घुसते ई-रिक्शा, बिना तय जगह के खड़े ऑटो और ऊपर से ट्रैफिक सिग्नल का शोपीस बने रहना- सब मिलकर कुछ ही मिनटों में इस चौराहे को जाम का स्थाई केंद्र बना देते हैं.
कई बार तो हालत यह होती है कि कुछ सौ मीटर की दूरी तय करने में 15 से 20 मिनट तक लग जाते हैं. एम्बुलेंस और दमकल जैसी आपातकालीन सेवाएं भी इस जाम में फंसकर रह जाती हैं. यह सिर्फ कैसरबाग की कहानी नहीं है, बल्कि तेजी से फैलते शहरी उत्तर प्रदेश के लगभग हर बड़े शहर की हकीकत बन चुकी है.
इसी पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ‘सिटी-रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन (C-RTC)’ योजना शुरू की है, जिसे योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में शहरी ट्रैफिक सुधार की एक बड़ी पहल के तौर पर देखा जा रहा है. इस योजना का उद्देश्य सिर्फ जाम हटाना नहीं, बल्कि शहरों में ट्रैफिक के पूरे ढांचे को व्यवस्थित करना है ताकि यात्रा समय कम हो, ईंधन की बचत हो और प्रदूषण में भी कमी आए.
यूपी के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के शहरों में पिछले एक दशक में वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ी है, लेकिन सड़कें उसी अनुपात में विकसित नहीं हो पाई हैं. इसके चलते ट्रैफिक का दबाव असंतुलित हो गया है और जाम अब एक स्थायी समस्या बन चुका है. उन्होंने माना कि सिर्फ पारंपरिक ट्रैफिक मैनेजमेंट तरीकों से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है, इसलिए डेटा और टेक्नोलॉजी आधारित समाधान की जरूरत महसूस हुई.
C-RTC योजना : क्या है नया?
C-RTC योजना के तहत पहले चरण में लखनऊ सहित आगरा, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गाज़ियाबाद और मेरठ जैसे प्रमुख शहरों में कुल 172 ऐसे रास्तों की पहचान की गई है, जहां ट्रैफिक जाम सबसे ज्यादा लगता है. यह पहचान कोई एक दिन में नहीं हुई, बल्कि महीनों तक चले सर्वे, फील्ड विजिट और डेटा एनालिसिस के बाद इन रूट्स को चिह्नित किया गया है. इस योजना की सबसे खास बात इसका AI आधारित प्लेटफॉर्म है, जो हर रूट पर यात्रा के न्यूनतम, अधिकतम और औसत समय का विश्लेषण करता है. यह सिस्टम रियल-टाइम में यह भी दिखाता है कि किस जगह जाम बन रहा है और उसकी तीव्रता कितनी है.
इसके जरिए ट्रैफिक अधिकारियों को तुरंत निर्णय लेने में मदद मिलती है. उदाहरण के तौर पर, अगर कैसरबाग चौराहे पर अचानक ट्रैफिक बढ़ता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट देगा और वहां अतिरिक्त पुलिस बल या सिग्नल टाइमिंग में बदलाव किया जा सकेगा. लेकिन इस योजना की असली ताकत सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि ‘रूट मार्शल’ की अवधारणा है. हर पहचाने गए रूट के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जिसे उस पूरे रास्ते पर ट्रैफिक सुचारू रखने की जिम्मेदारी दी जाएगी. यह “एक रास्ता, एक मार्शल” मॉडल जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
लखनऊ के कैसरबाग जैसे चौराहे के संदर्भ में देखें तो इसका मतलब होगा कि एक अधिकारी विशेष रूप से इस क्षेत्र की ट्रैफिक व्यवस्था पर नजर रखेगा और किसी भी समस्या के लिए सीधे जिम्मेदार होगा. पूर्व पुलिस अधिकारी और ट्रैफिक विशेषज्ञ कहते हैं कि “अगर रूट मार्शल को पर्याप्त संसाधन और अधिकार नहीं मिले, तो वह सिर्फ नाम का प्रभारी बनकर रह जाएगा.” इसके अलावा, पहले से ही स्टाफ की कमी झेल रही ट्रैफिक पुलिस के लिए यह एक अतिरिक्त दबाव भी बन सकता है.
टेक्नोलॉजी बनाम ग्राउंड रियलिटी
टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ट्रैफिक मैनेजमेंट में नया नहीं है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि इसे जमीन पर कितनी गंभीरता से लागू किया जाता है. IIT कानपुर के ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग विभाग के एक प्रोफेसर बताते हैं “AI सिस्टम तभी प्रभावी होता है जब डेटा सटीक हो और उस पर तुरंत कार्रवाई की जाए. सिर्फ डेटा इकट्ठा करने से जाम नहीं हटेगा.” कैसरबाग के उदाहरण में देखें तो AI यह जरूर बता सकता है कि शाम 4 से 6 बजे के बीच जाम सबसे ज्यादा होता है, लेकिन अगर उस समय अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस या वैकल्पिक रूट की व्यवस्था नहीं की गई, तो स्थिति जस की तस बनी रहेगी.
हालांकि ऐसी ही समस्या से निपटने के लिए AI आधारित प्लेटफॉर्म रियल-टाइम डेटा के जरिए यह बताएगा कि किस समय किस रूट पर कितना दबाव है, कहां जाम बन रहा है और यात्रा का औसत समय कितना है. यह सिस्टम ग्राफ और मैप के जरिए अधिकारियों को तुरंत निर्णय लेने में मदद करेगा. C-RTC योजना का एक और महत्वपूर्ण पहलू ‘5E’ रणनीति है- Education, Enforcement, Engineering, Encroachment removal और E-rickshaw regulation.
जागरूकता की कमी के कारण लोग अक्सर ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते. बिना हेलमेट, गलत दिशा में वाहन चलाना और सिग्नल तोड़ना आम बात है. ऐसे में सिर्फ नियम बनाना काफी नहीं, बल्कि लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना भी जरूरी है. Enforcement यानी नियमों का कड़ाई से पालन कराना, इस योजना का सबसे प्रभावी हिस्सा हो सकता है. Engineering के तहत सड़क डिजाइन और सिग्नल सिस्टम में सुधार किया जाएगा.
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार जाम की वजह खराब डिजाइन होती है, जिसे सुधारकर बड़ी राहत दी जा सकती है. Encroachment removal यानी अतिक्रमण हटाना, शायद सबसे कठिन काम है. व्यस्त सड़कों के किनारे फुटपाथ पर दुकानें और सड़क किनारे खड़े वाहन ट्रैफिक की क्षमता को काफी कम कर देते हैं. अगर इन्हें हटाया जाए, तो सड़क की उपयोगिता तुरंत बढ़ सकती है. E-rickshaw regulation भी बेहद जरूरी है, क्योंकि बिना तय रूट और स्टॉप के चलते ई-रिक्शा ट्रैफिक फ्लो को बाधित करते हैं. ट्रैफिक विशेषज्ञ के. के. सरन मानते हैं कि इन सभी उपायों को लागू करना आसान नहीं होगा. सरन का कहना है, “ट्रैफिक समस्या सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक भी है. जब तक अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल नहीं होगा, तब तक कोई भी योजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकती.”
कहां अटक सकती है योजना
एक और बड़ी चुनौती डेटा की विश्वसनीयता है. AI सिस्टम तभी प्रभावी होगा जब उसे मिलने वाला डेटा सटीक और समय पर हो. अगर सड़कों या चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरे खराब हों या डेटा अपडेट न हो, तो पूरा सिस्टम प्रभावित हो सकता है. सरकार ने इस योजना के तहत पीक आवर्स में यात्रा समय को 20 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा है. यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी जरूर है, लेकिन असंभव नहीं.
ट्रैफिक मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम कर चुके विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सभी उपाय सही तरीके से लागू किए जाएं, तो 15 से 20 प्रतिशत तक सुधार संभव है. के. के. सरन बताते हैं, “यह भी सच है कि भारत जैसे देश में ट्रैफिक सुधार सिर्फ सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है. इसमें आम लोगों की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है. जब तक लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे, तब तक कोई भी तकनीक या योजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकती.”
उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस योजना की एक महीने बाद समीक्षा करने की बात कही है. यह समीक्षा तय करेगी कि योजना को आगे बढ़ाया जाए या इसमें बदलाव किए जाएं.