योगी सरकार को कितना राजनीतिक पुण्य दे पाएगी गांव में इंटरनेट की 'गंगा’

उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘प्रोजेक्ट गंगा’ के तहत अगले दो–तीन साल में 20 लाख घरों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने और एक लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य तय किया है

UP finance minister Suresh Khanna inaugurating Project Ganga
यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की मौजूदगी में प्रोजेक्ट गंगा के MoU पर हस्ताक्षर हुए

श्रावस्ती जिले के हरिहरपुर गांव के रवि यादव पिछले कुछ महीनों से अपने घर की छत पर मोबाइल लेकर सिग्नल ढूंढने की कोशिश करते रहे हैं. 24 साल का यह युवक ऑनलाइन फ्रीलांसिंग और यूट्यूब चैनल शुरू करना चाहता है, लेकिन गांव में इंटरनेट की रफ्तार इतनी धीमी है कि वीडियो अपलोड करना तो दूर, कई बार साधारण फाइल भी नहीं भेजी जा पाती.

रवि कहते हैं, “अगर गांव में अच्छा इंटरनेट मिल जाए तो मैं शहर गए बिना भी काम कर सकता हूं.” अब उन्हें उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश सरकार की नई पहल ‘प्रोजेक्ट गंगा’ उनके जैसे हजारों युवाओं के लिए हालात बदल सकती है.

दरअसल, विधानसभा चुनाव से लगभग एक साल पहले यूपी योगी आदित्यनाथ सरकार ने ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी को बड़े पैमाने पर विस्तार देने का फैसला किया है. इसी दिशा में 'स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन' और हिंदुजा ग्रुप की सहायक कंपनी वनओटीटी एंटरटेनमेंट लिमिटेड के बीच 9 मार्च को एक समझौता हुआ. इसके तहत अगले दो से तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश के करीब 20 लाख घरों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार का दावा है कि इससे सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार के अवसर तैयार होंगे.

डिजिटल कनेक्टिविटी के सहारे गांवों में रोजगार

इस परियोजना का सबसे अहम हिस्सा गांवों में स्थानीय युवाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में तैयार करना है. योजना के तहत 8,000 से 10,000 युवाओं को न्याय पंचायत स्तर पर डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर (DSP) बनाया जाएगा, जो गांवों में ब्रॉडबैंड नेटवर्क स्थापित करने और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने का काम करेंगे. खास बात यह है कि इनमें लगभग 50 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है.

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में न केवल इंटरनेट सेवाओं का विस्तार होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा होंगे. चयनित युवाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी सपोर्ट दिया जाएगा ताकि वे अपने इलाके में डिजिटल सेवाओं का नेटवर्क खड़ा कर सकें.

लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में वित्त और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि यह पहल उत्तर प्रदेश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उनके अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचने से डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन कारोबार, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी.

डिजिटल हाई-वे बनाम एक्सप्रेस-वे

स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह का कहना है कि जिस तरह सड़कों और एक्सप्रेस-वे ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति दी है, उसी तरह डिजिटल हाईवे भी विकास का नया आधार बन सकते हैं. सिंह के अनुसार, “यह पहल डिजिटल डिवाइड को कम करने और गांवों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने में मदद करेगी. बेहतर इंटरनेट से टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा, ई-कॉमर्स और डिजिटल स्किलिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी आएगी.”

वे यह भी कहते हैं कि श्रावस्ती, बहराइच और बलरामपुर जैसे सीमावर्ती और अपेक्षाकृत पिछड़े जिलों में इंटरनेट पहुंचने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया आधार मिल सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंचने से आर्थिक गतिविधियों के कई नए रास्ते खुल सकते हैं. उदाहरण के तौर पर, स्थानीय दुकानदार ऑनलाइन भुगतान और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ सकते हैं. किसान डिजिटल मार्केट प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी उपज के बेहतर दाम खोज सकते हैं. वहीं, युवाओं के लिए फ्रीलांसिंग, कंटेंट क्रिएशन और ऑनलाइन सेवाओं के नए अवसर पैदा हो सकते हैं.

'हिंदुजा ग्लोबल सॉल्यूशंस लिमिटेड' के डायरेक्टर विंसले फर्नांडीज का कहना है कि इस परियोजना का नाम ‘प्रोजेक्ट गंगा’ इसलिए रखा गया है क्योंकि गंगा की तरह ही यह पहल भी लाखों लोगों के जीवन और रोजगार से जुड़ने वाली है. उनके अनुसार, “युवा और महिला सशक्तीकरण इस परियोजना के दो प्रमुख स्तंभ हैं.”

चुनावी संदर्भ में योजना का महत्व

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की योजनाएं सरकार की विकासात्मक छवि को मजबूत करने का प्रयास भी होती हैं. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के भौतिक शास्त्र विभाग में सहायक प्रोफेसर विवेक नौटियाल बताते हैं, “ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार केवल तकनीकी परियोजना नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और राजनीतिक असर भी हो सकता है. अगर गांवों में डिजिटल सेवाओं का नेटवर्क तेजी से विकसित होता है और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलते हैं, तो इसका सकारात्मक संदेश चुनावी माहौल में भी दिखाई दे सकता है.”

प्रोजेक्ट गंगा का एक महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना भी है. योजना में डिजिटल सेवा प्रदाताओं में लगभग आधी भागीदारी महिलाओं की सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है. नौटि‍याल बताते हैं, “अगर महिलाएं डिजिटल उद्यमिता से जुड़ती हैं तो इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियों के नए मॉडल विकसित हो सकते हैं. महिला स्वयं सहायता समूहों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं का नेटवर्क बनाया जा सकता है जोकि ग्रामीण इलाकों की धारणा ही पूरी तरह बदल देगा.”

चुनौतियां भी कम नहीं

उत्तर प्रदेश को डिजिटल रूप से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने BharatNet, Digital India Mission, PM-WANI और राज्य की फाइबर नेटवर्क योजनाओं को बड़े बदलाव का माध्यम बताया जाता रहा है. लेकिन आंकड़े बताते हैं कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनने के बावजूद ग्रामीण इलाकों तक तेज इंटरनेट और सेवाएं पहुंचाने में अभी भी बड़ी खाई मौजूद है. BharatNet योजना का लक्ष्य देश की करीब 2.64 लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ना है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2025 तक देश में लगभग 2.14 लाख ग्राम पंचायतों को कनेक्ट किया जा चुका है और करीब 6.9 लाख किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई है. यहां कुल लगभग 57,691 ग्राम पंचायतों में से करीब 46,729 ग्राम पंचायतों को फाइबर नेटवर्क से जोड़ा गया है. उत्तर प्रदेश इस योजना में सबसे बड़ा राज्य है. गोंडा जिले में डिजिटल सेवा केंद्र चलाने वाले अजय प्रकाश कहते हैं “असली चुनौती “लास्ट-माइल कनेक्टिविटी” की है. यानी पंचायत तक फाइबर पहुंचने के बाद भी गांवों के घरों और दुकानों तक इंटरनेट सेवा नहीं पहुंच पा रही है. ऐसा इसलिए कि अभी भी गांवों में इंटरनेट का उपयोग पढ़ाई या अन्य तकनीकि कामों में नहीं हो पा रहा है.”

लखनऊ में एक टेलिकॉम कंपनी में सेल्स मैनेजर रहे गौरव त्रिपाठी बताते हैं, “यूपी में कई ग्राम पंचायतों में वाई-फाई हॉटस्पॉट लगाए गए, लेकिन उनका उपयोग सीमित है और कई जगह वे चालू ही नहीं हैं. रखरखाव की कमी, बिजली की समस्या और स्थानीय स्तर पर ऑपरेटरों की कमी के कारण नेटवर्क का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा.” वहीं PM-WANI योजना का उद्देश्य छोटे दुकानदारों को पब्लिक वाई-फाई प्रदाता बनाना था ताकि कस्बों और गांवों में सस्ता इंटरनेट उपलब्ध हो सके. लेकिन यूपी के अधिकांश जिलों में इस योजना के तहत PDO (Public Data Office) की संख्या अभी भी बहुत कम है, जिससे यह मॉडल बड़े स्तर पर नहीं चल पाया.

गांवों मे पहले से चल रही डिजिटल योजनाओं के बुरे हश्र ने प्रोजेक्ट गंगा के सामने भी कई चुनौतियां पेश कर दी हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट नेटवर्क स्थापित करना तकनीकी और आर्थिक दोनों दृष्टियों से चुनौतीपूर्ण होता है. कई इलाकों में बिजली की अनियमित आपूर्ति और डिजिटल साक्षरता की कमी भी बड़ी बाधा बन सकती है. विवेक नौटियाल के मुताबिक गांव में केवल इंटरनेट पहुंचाना पर्याप्त नहीं होगा. इसके साथ डिजिटल स्किलिंग, साइबर सुरक्षा जागरूकता और स्थानीय स्तर पर तकनीकी सपोर्ट सिस्टम भी विकसित करना होगा.

हरिहरपुर गांव के रवि यादव इस पूरी चर्चा को अपने तरीके से समझता हैं. उनके लिए यह योजना केवल सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि गांव में रहकर रोजगार पाने की संभावना है. दरअसल, यही उम्मीद प्रोजेक्ट गंगा की सबसे बड़ी कसौटी भी होगी. अगर यह योजना तय समय में गांवों तक इंटरनेट पहुंचाने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने में सफल होती है, तो यह ग्रामीण अर्थव्यस्था में वास्तविक बदलाव ला सकती है.

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