यूपी में कांग्रेस को कितना रास आएगा प्रियंका का जाना और अविनाश का आना

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) महासचिव के रूप में उत्तर प्रदेश की प्रभारी रहीं प्रियंका गांधी वाड्रा की जगह पार्टी के झारखंड प्रभारी अविनाश पांडे को मिली जिम्मेदारी. पांडे की नियुक्ति को कांग्रेस की "सोशल इंजीनियरिंग" की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है

कांग्रेस ने अविनाश पांडे को प्रियंका गांधी जगह यूपी का नया प्रभारी बनाया है.
कांग्रेस ने अविनाश पांडे को प्रियंका गांधी जगह यूपी का नया प्रभारी बनाया है.

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी)महासचिव के रूप में उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद से देश में सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले राज्य से दूरी बना ली थी. तब से ही उनकी भूमिका को लेकर अटकलबाजी चल रही थी. इस पर 23 दिसंबर को तब विराम लग गया जब कांग्रेस में झारखंड के प्रभारी रहे अविनाश पांडे ने यूपी प्रभारी के रूप उनकी जगह ली. 

साल 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद यूपी में बड़े गाजे-बाजे के साथ प्रभारी का पद संभालने वाली प्रियंका गांधी की बड़े ही उदासीन ढंग से यहां से विदाई राज्य कांग्रेस में ज्यादातर लोगों के लिए हैरानी की बात नहीं है.

नाम न छापने की शर्त पर पूर्वांचल से आने वाले यूपी कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, “ प्रियंका ने अपने भाई राहुल गांधी की तरह ही यूपी के साथ बर्ताव किया. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने भी किसान यात्रा के रूप में बड़ी मेहनत की लेकिन जब चुनाव का नतीजा पार्टी के पक्ष में नहीं आया तो वे यूपी से दूर हो गए. इसी तरह प्रियंका गांधी ने भी वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद प्रदेश छोड़ दिया और फिर कभी नहीं लौटीं. हमने अविनाश पांडे को काम करते देखा है. भाजपा से राजनीतिक जंग के लिए कांग्रेस को यूपी में पांडेय के जैसे नेता की जरूरत है.” 

नागपुर के रहने वाले अविनाश पांडे (65) ने पहले कई संगठनात्मक भूमिकाओं में काम किया है, जिनमें राजस्थान के एआईसीसी प्रभारी की जिम्मेदारी भी शामिल है. पांडे पार्टी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ता हैं और उन्होंने उत्तर प्रदेश में एआईसीसी महासचिव दिग्विजय सिंह और एआईसीसी सचिव मधुसूदन मिस्त्री के साथ मिलकर काम किया है. पांडे को राहुल गांधी का करीबी सहयोगी माना जाता है और उनकी नियुक्ति को दूर से ही सही, पार्टी के भीतर "टीम राहुल" के कार्यभार संभालने के रूप में देखा जा रहा है. 

यह नियुक्ति कांग्रेस कैडर को भी एक इशारा है. ऐसे राज्य में जहां जाति की राजनीति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, एक ब्राह्मण की नियुक्ति को कांग्रेस के "सोशल इंजीनियरिंग" के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. यह बात तब और अहम हो जाती है जब भाजपा ने राजस्थान में ब्राह्मण मुख्यमंत्री बनाकर यूपी में अगड़ी जाति के एक बड़े हिस्से को भी टारगेट किया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय पूर्वी यूपी से पार्टी का “भूमिहार चेहरा” हैं. 

जहां तक अविनाश पांडे की बात है तो वे युवा कांग्रेस के दिनों से ही अपने संगठनात्मक कौशल के लिए जाने जाते रहे हैं और कांग्रेस नेतृत्व को लगता है कि वे राज्य संगठन के पुनर्निर्माण में मदद कर सकते हैं. पांडे ने 1970 के दशक में कांग्रेस की छात्र शाखा, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के नेता के रूप में अपना करियर शुरू किया और धीरे-धीरे पार्टी में आगे बढ़ते गए. 2008 में वे उद्योगपति राहुल बजाज से राज्यसभा चुनाव सिर्फ एक वोट से हार गए थे. इसके बाद वे वर्ष 2010 और 2016 के बीच महाराष्ट्र से उच्च सदन के सदस्य के रूप में काम करते रहे. 

इस बीच, उत्तर प्रदेश के साथ प्रियंका गांधी का संगठनात्मक जुड़ाव वर्ष 2018 के आसपास शुरू हुआ. जनवरी 2019 में पूर्वी यूपी के प्रभारी बनाए जाने से पहले उन्होंने खुद को अमेठी और रायबरेली तक ही सीमित रखा था. प्रियंका को सितंबर 2020 में अखि‍ल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप में उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया था. कार्यभार संभालने के बाद, वे यूपी में कांग्रेस का “आक्रामक चेहरा” बन गई थीं. उन्होंने शासन की अन्य कथित विफलताओं को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार को कई बार निशाने पर लिया था. उन्होंने उन पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की थीं, जिन्हें कथित तौर पर लखीमपुर खीरी में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे ने कुचल दिया था. 

यूपी में कांग्रेस की जड़ें मजबूत करने के लिए प्रियंका ने न केवल सड़क पर धरना प्रदर्शन किया बल्क‍ि उन्होंने गंगा यात्रा करके भी लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा था. तब तत्कालीन यूपी कांग्रेस प्रमुख अजय लल्लू को उनकी पसंद के रूप में देखा गया था क्योंकि उन्हें "जमीन पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए तैयार नेता" के रूप में देखा गया था. वर्ष 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रियंका  ने यूपी में महिला सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा अभियान “लड़की हूं लड़ सकती हूं.” नाम से लॉन्च किया था. बेहद आक्रामक ढंग से शुरू हुआ यह अभियान मतदाताओं को पसंद नहीं आया और कांग्रेस 403 सदस्यीय सदन में दो सीटों पर अपने सबसे खराब प्रदर्शन पर सिमट गई. 

इस दौरान कांग्रेस यूपी में न केवल अपना जनाधार खोती गई बल्क‍ि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी देश की सबसे पुरानी पार्टी से बाहर हो गए. जो वरिष्ठ नेता बच गए उन्होंने खुद को रोजमर्रा के मामलों से दूर कर लिया. अब कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है कि अविनाश पांडे के राज्य प्रभारी के तौर पर आने से यूपी में पार्टी कैडर का आत्मविश्वास बढ़ेगा. 

लेकिन पांडे ऐसा क्या करेंगे जो प्रियंका नहीं कर पाईं? कान्यकुब्ज कालेज, लखनऊ में राजनीतिक शास्त्र विभाग के प्रमुख ब्रजेश मिश्र बताते हैं, “ प्रियंका गांधी की फेस वैल्यू है लेकिन वे संगठन के कार्य में इतनी माहिर नहीं है. कांग्रेस ने गलती यह की कि प्रियंका को यूपी प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपते वक्त संगठन के कार्यों में दक्ष किसी भी व्यक्त‍ि को उनके साथ सीधे तौर पर नहीं लगाया. इससे प्रियंका गांधी के आक्रामक रवैये से जो माहौल बना उसका लाभ संगठन को नहीं मिल पाया. संगठन धीरे-धीरे कमजोर ही होता गया और वर्ष 2022 के लोकसभा चुनाव में पार्टी हाशि‍ए पर आ गई.” 

दूसरी तरफ पार्टी संगठन के भीतर प्रियंका गांधी को रायबरेली लोकसभा सीट से कांग्रेस का उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर कयासबाजी का दौर जारी है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पहले ही प्रियंका गांधी और राहुल गांधी से यूपी से चुनाव लड़ने की अपील कर चुके हैं. यूपी के पार्टी नेताओं को लगता है कि प्रि‍यंका को संगठनात्मक कार्यों से हटाकर कांग्रेस जनता के बीच उनकी छवि को ज्यादा अच्छे ढंग से भुना सकेगी. 

पिछले हफ्ते नई दि‍ल्ली में यूपी कांग्रेस के नेताओं साथ पार्टी नेतृत्व की बैठक में संगठन की इस कमजोरी को प्रमुखता से उठाया गया था. इसके बाद से ही प्रियंका गांधी की जगह संगठनात्मक कार्यों में दक्ष किसी नेता को यूपी प्रभारी बनाने की रूपरेखा तय हो गई थी. पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में आशानुरूप प्रदर्शन न करने वाली कांग्रेस पार्टी को लगता है कि लोकसभा चुनाव से पहले “इंडिया गठबंधन” के घटक दल समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ यूपी में सीट बंटवारे की बातचीत मुश्किल होने वाली है. यह बंटवारा कितना सहज ढंग से होता है इससे अविनाश पांडे के कौशल की पहली परीक्षा होगी. 

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