यूपी बोर्ड इस बार नकल करने वालों की लेगा अग्निपरीक्षा!

यूपी बोर्ड ने इस बार आंसर शीट से लेकर कंट्रोलरूम तक कई अहम बदलाव किए हैं जिनके बाद परीक्षा में किसी भी तरह की हेरफेर बहुत मुश्किल होगी

JAC Board Exam datesheet
यूपी बोर्ड की परीक्षाएं की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक चलेंगी

इस बार यूपी बोर्ड की परीक्षा में बैठने वाले परीक्षार्थियों को कॉपी खोलते ही बदलाव का पहला संकेत मिल जाएगा. वर्षों से चली आ रही चौड़ी, लैंडस्केप आंसरशीट  की जगह अब उन्हें प्रिंटआउट जैसे ए-4 साइज के वर्टिकल पन्ने मिलेंगे. 

नई कॉपी में दो कवर पेज होंगे- पहला पूरी तरह परीक्षार्थी के लिए, जिसमें रोल नंबर, विषय कोड और अन्य आवश्यक विवरण भरने होंगे और दूसरा सिर्फ परीक्षक के लिए, ताकि मूल्यांकन पूरी तरह निष्पक्ष रहे. इन कॉपियों में लगभग 32 पृष्ठ होंगे और हर पृष्ठ पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद का लोगो और बारीक अक्षरों में यूपीएमएसपी अंकित रहेगा. इससे आंसरशीट  की पहचान और उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित की जाएगी. 

कॉपी का यह बदला हुआ स्वरूप दरअसल उस बड़ी सख्ती की शुरुआत है, जिसके साथ यूपी बोर्ड इस बार की परीक्षाओं को नकलविहीन बनाने मैदान में उतरा है. उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं को लेकर इस बार अब तक के सबसे व्यापक और सख्त बदलाव लागू किए हैं. आंसरशीट के डिजाइन से लेकर परीक्षा कक्ष की निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षार्थियों की जवाबदेही और प्रशासनिक नियंत्रण तक, हर स्तर पर नए प्रयोग किए गए हैं. बोर्ड का दावा है कि बीते नौ वर्षों में किए गए सुधारों की कड़ी में यह अब तक का सबसे निर्णायक कदम है.

कोडिंग सिस्टम को इस बार और अधिक मजबूत किया गया है. हाईस्कूल और इंटरमीडिएट, दोनों स्तरों पर दो तरह की आंसरशीट होंगी. एक को ‘अ कोड’ और दूसरी को ‘ब कोड’ के रूप में चिह्नित किया गया है. यह कोड आंसरशीट के पहले और दूसरे पन्ने पर अंकित होगा. खास बात यह है कि कोड के साथ एक क्यूआर कोड भी जोड़ा गया है, जो पूरी तरह कोडिंग प्रणाली से जुड़ा होगा. इससे आंसरशीट  की ट्रैकिंग आसान होगी और किसी भी तरह की गड़बड़ी या हेराफेरी को तुरंत पकड़ा जा सकेगा. बोर्ड ने इस बार परीक्षार्थियों की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी है.

नए नियमों के अनुसार अब छात्र-छात्राओं को केवल आखिरी पन्ने पर ही नहीं, बल्कि आंसरशीट  के हर एक पृष्ठ पर अपना अनुक्रमांक और आंसरशीट  क्रमांक लिखना अनिवार्य होगा. बरेली के जिला विद्यालय निरीक्षक अजीत कुमार के अनुसार, यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि पन्नों की अदला-बदली या किसी भी प्रकार की हेराफेरी की गुंजाइश न रहे. कक्ष निरीक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि परीक्षार्थी इस नियम का पालन करें.

आंसरशीट से जुड़ी सख्ती यहीं खत्म नहीं होती. बोर्ड ने साफ निर्देश दिए हैं कि कोई भी परीक्षार्थी आंसरशीट का कोई पन्ना फाड़ नहीं सकता. ऐसा करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा और परीक्षा निरस्त तक की कार्रवाई हो सकती है. इसके अलावा छात्र-छात्राएं आंसरशीट के अंदर कहीं भी अपना नाम या कोई विशेष पहचान चिह्न नहीं बना सकते. पहचान से जुड़ी सभी प्रविष्टियां केवल कवर पेज पर ही भरनी होंगी. प्रश्नपत्र मिलने से पहले कॉपी के अंदर कुछ भी लिखने की अनुमति नहीं होगी. बोर्ड ने यह भी कहा है कि आंसरशीट मिलने के बाद परीक्षार्थी सभी पन्नों की जांच जरूर कर लें. 

परीक्षा कक्ष की व्यवस्था को लेकर भी इस बार बेहद कड़े निर्देश जारी किए गए हैं. कक्ष निरीक्षकों की जिम्मेदारी तय की गई है कि परीक्षा कक्ष में कोई भी सहायक सामग्री जैसे पोस्टर, चार्ट या ब्लैक बोर्ड पर लिखा हुआ कोई निर्देश मौजूद न हो, जिससे परीक्षार्थियों को अनुचित लाभ मिल सके. इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, नकल सामग्री या किसी भी तरह की संदिग्ध वस्तु को परीक्षा कक्ष में ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है. हालांकि बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि परीक्षार्थियों से जूते-मोजे उतरवाकर परीक्षा नहीं ली जाएगी.

परीक्षाओं की निगरानी के लिए इस बार तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है. माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के शिविर कार्यालय, लखनऊ में राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से प्रदेश भर के सभी परीक्षा केंद्रों की सीधी निगरानी की जाएगी. सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और कई स्थानों पर वॉयस रिकॉर्डर भी सक्रिय रहेंगे. सेक्टर मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए गए हैं कि वे सीसीटीवी और वॉयस रिकॉर्डर की नियमित जांच करें, खासकर संवेदनशील और अति संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर.

प्रश्नपत्रों और आंसरशीट  की सुरक्षा को लेकर भी कई स्तरों पर इंतजाम किए गए हैं. सभी जिलों में सभी विषयों के प्रश्नपत्रों के रिजर्व सेट रखे गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में परीक्षा प्रभावित न हो. प्रश्नपत्रों में केंद्रवार कोडिंग लागू की गई है, जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का तुरंत पता लगाया जा सके. परीक्षा केंद्रों पर स्ट्रांग रूम की व्यवस्था अनिवार्य की गई है, जहां प्रश्नपत्र और कॉपियां परीक्षा से तीन दिन पहले पहुंचा दी जाएंगी. स्ट्रांग रूम में 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी रहेगी. 

परीक्षा के दिन की व्यवस्था भी बेहद सख्त रखी गई है. स्टैटिक मजिस्ट्रेट को हर दिन परीक्षा शुरू होने से एक घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचना होगा. उनकी उपस्थिति में डबल लॉक खोला जाएगा और निर्धारित प्रश्नपत्र निकाले जाएंगे. इसके बाद लॉक को फिर से सील किया जाएगा. परीक्षा समाप्त होने के बाद आंसरशीट  की पैकिंग सीसीटीवी और वॉयस रिकॉर्डर की निगरानी में की जाएगी और उन्हें संकलन केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाया जाएगा.

नकल रोकने के लिए बोर्ड ने संवेदनशीलता के आधार पर परीक्षा केंद्रों और जिलों की पहचान की है. वर्ष 2026 की परीक्षाओं के लिए प्रदेश के 8033 परीक्षा केंद्रों में से 222 को अति संवेदनशील और 683 को संवेदनशील घोषित किया गया है. खास बात यह है कि पिछले वर्ष की तुलना में अति संवेदनशील केंद्रों की संख्या में कमी आई है. वर्ष 2025 में 306 केंद्र अति संवेदनशील घोषित किए गए थे, जबकि इस बार यह संख्या घटकर 222 रह गई है. हालांकि, कुछ जिलों में यह चर्चा भी है कि पूर्व में नकल की शिकायत वाले कुछ विद्यालय सूची से बाहर रह गए हैं, जिस पर परिषद स्तर पर निगरानी की जा रही है. 

इसके अलावा 18 जिलों को समग्र रूप से संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है. इनमें आगरा, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, एटा, कासगंज, प्रयागराज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, हरदोई, कन्नौज, आजमगढ़, बलिया, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, देवरिया और गोंडा शामिल हैं. इन जिलों में पूर्व वर्षों में सामूहिक नकल और अन्य अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे, इसलिए यहां अतिरिक्त निगरानी और उड़नदस्तों की तैनाती की जा रही है. 

परीक्षा के टाइम टेबल के अनुसार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक चलेंगी. कुल 13 दिनों की इस परीक्षा अवधि में चार दिन अति उच्च सतर्कता वाले घोषित किए गए हैं. 20 फरवरी की प्रथम पाली में हाईस्कूल सामाजिक विज्ञान और इंटरमीडिएट नागरिक शास्त्र, 23 फरवरी की प्रथम पाली में हाईस्कूल अंग्रेजी, 25 फरवरी की प्रथम पाली में हाईस्कूल विज्ञान, 26 फरवरी की पहली पाली में हाईस्कूल गणित और इंटरमीडिएट भूगोल तथा 27 फरवरी की दूसरी पाली में होने वाली परीक्षाओं पर विशेष निगरानी रहेगी. इसके अलावा कुछ परीक्षाएं उच्च सतर्कता श्रेणी में भी कराई जाएंगी.

प्रयोगात्मक परीक्षाओं में भी इस बार नई व्यवस्था लागू की गई है. पहली बार पोर्टल और मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन अंक अपलोड करने की व्यवस्था की गई. इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और अंकों में गड़बड़ी की संभावना कम हुई है. इसके साथ ही 20 परीक्षा केंद्रों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में जैमर लगाए जा रहे हैं, ताकि मोबाइल और अन्य संचार माध्यमों के दुरुपयोग को रोका जा सके.

इस वर्ष यूपी बोर्ड की परीक्षा में अभ्यर्थियों की संख्या भी बेहद बड़ी है. हाईस्कूल के 27 लाख से अधिक और इंटरमीडिएट के लगभग 25 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे. कुल मिलाकर 52 से 53 लाख के बीच छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षा देंगे. इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए शासन स्तर पर भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं. अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी स्थिति में गलत विषय, तिथि या पाली का प्रश्नपत्र नहीं खोला जाना चाहिए. सोशल मीडिया या इंटरनेट मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह का कहना है कि बोर्ड नकलविहीन परीक्षा कराने को लेकर पूरी तरह गंभीर है. पिछले वर्ष नकल कराने के आरोप में दोषी पाए गए शिक्षकों और परीक्षा केंद्रों को डिबार किया गया था और इस वर्ष भी नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी. 

Read more!