ट्रंप टैरिफ में कटौती से राजस्थान के किन सेक्टर में फिर लौटेगी जान?
राजस्थान पूरी दुनिया में करीब 85 हजार करोड़ रुपए का निर्यात करता है जिसमें से 18 हजार करोड़ रुपए का निर्यात सिर्फ अमेरिका में होता रहा है

भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 50 से घटाकर 18 फीसदी किए जाने का फैसला राजस्थान के संकटग्रस्त निर्यात के लिए संजीवनी बनकर आया है. पांच माह पहले ट्रंप टैरिफ 50 फीसदी किए जाने से राजस्थान के टेक्सटाइल, हैंडीक्राफ्ट, जेम्स एंड ज्वेलरी, मार्बल-ग्रेनाइट व रेडिमेड गारमेंट्स उद्योग गहरे दबाव में थे. अब टैरिफ में 32 फीसदी की कटौती के बाद इन क्षेत्रों में फिर से मांग बढ़ने की उम्मीद जगी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी की रात घोषणा की है कि भारत से आयात होने वाले सामानों पर अब 25 के बजाय 18 फीसदी टैरिफ लगेगा.
विशेषज्ञों की मानें तो निर्यात आधारित राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए टैरिफ घटाने का यह फैसला ऑक्सीजन की तरह है. टैरिफ में बढ़ोतरी से राजस्थान में 7 लाख रोजगार और करीब 18 हजार करोड़ रुपए के निर्यात पर संकट छाया हुआ था.
इसकी सबसे ज्यादा मार राजस्थान के रत्न-आभूषण, टेक्सटाइल्स, मार्बल-ग्रेनाइट, रेडिमेड गारमेंट्स और हैंडीक्राफ्ट (हस्तशिल्प व हथकरघा) उद्योग पर पड़ी थी. राजस्थान इन उत्पादों का विश्व में करीब 85 हजार करोड़ रुपए का निर्यात करता है जिसमें से 18 हजार करोड़ का निर्यात अकेले अमेरिका में होता रहा है. ट्रंप टैरिफ (कुल 50 फीसदी) लागू होने से पिछले पांच माह में अमेरिकी निर्यात पूरी तरह से जमीन पर आ गया था. काबिलेगौर है कि राजस्थान से 60 से 70 फीसदी निर्यात अगस्त से दिसंबर माह के बीच होता है. ऐसे में अगस्त में टैरिफ ब़ढ़ने से इन उत्पादों का अमेरिकी ऑर्डर और बुकिंग पर सीधा असर दिखाई दिया.
राजस्थान से अमेरिका में हर साल हैंडीक्राफ्ट का 6 हजार करोड़, रत्न-आभूषणों का 5 हजार करोड़, मार्बल-ग्रेनाइट का 4 हजार करोड़ और गारमेंट्स व टैक्सटाइल्स का करीब 3 हजार करोड़ रुपए का कारोबार होता है. 1 अगस्त 2025 से पहले तक अमेरिका में भारत के टैक्सटाइल कारोबार पर 5.5 फीसद टैरिफ था. हैंडीक्राफ्ट, गारमेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी और मार्बल व ग्रेनाइट जैसे उत्पाद टैरिफ से मुक्त थे.
जयपुर जेम्स आर्ट के मालिक कासिम खान बताते हैं, ‘‘टैरिफ बढ़ने का छोटे से लेकर बड़े व्यापारियों तक असर था. 18 फीसदी टैरिफ भी बहुत ज्यादा है. अब भी निर्यात का पहले जैसा दौर लौटना मुश्किल है. जेम्स एंड ज्वेलरी के निर्यात को पूरी तरह से टैरिफ मुक्त किया जाना चाहिए.’’
राजस्थान रत्न-आभूषणों का अमेरिका में सबसे ज्यादा निर्यात करता है. इस उद्योग से राजस्थान में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर करीब ढाई से तीन लाख लोग जुड़े हैं. साल 2023 में भारत के कुल निर्यात में जेम्स एंड ज्वैलरी की हिस्सेदारी 9 फीसद रही. अमेरिका भारत के जेम्स एंड ज्वैलरी का सबसे बड़ा आयातक देश है. करीब 16 फीसदी जेम्स एंड ज्वैलरी का आयात अकेला अमेरिका करता है. भारत के कुल रत्न-आभूषण निर्यात की 18 फीसदी हिस्सेदारी अकेले राजस्थान की है. इसके साथ ही मीनाकारी आभूषणों के निर्यात में 90 फीसद और कुंदन आभूषणों के निर्यात में राजस्थान की हिस्सेदारी 60 फीसदी से भी ज्यादा है. साल 2023-24 में राजस्थान से 83 हजार 704 करोड़ का कुल निर्यात हुआ जिसमें रत्न-आभूषणों की हिस्सेदारी 11 हजार 183 करोड़ रुपए की रही.
जयपुर के सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में रत्न-आभूषण के लिए एक विशेष आर्थिक जोन संचालित है जहां 154 औद्योगिक इकाइयां हैं. 20 हजार से ज्यादा लोगों को यहां रोजगार मिला हुआ है. इसके साथ ही राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में रत्न-आभूषणों के 112 कारखाने संचालित हैं जिनमें 300 से ज्यादा प्रकार के कीमती रत्न-आभूषणों को तैयार किया जाता है. जयपुर के जौहरी बाजार व अन्य क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर जेम्स एंड ज्वैलरी का काम होता है जिसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर एक लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं.
रत्न-आभूषणों के साथ ही बढ़े हुए ट्रंप टैरिफ की मार राजस्थान के हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र पर पड़ी है. पहले यह उद्योग अमेरिकी टैरिफ मुक्त था जिसके कारण वहां सालाना करीब 6 हजार करोड़ का निर्यात होता था. टैरिफ बढ़ाने से पिछले पांच माह में निर्यात का आंकड़ा एक हजार करोड़ भी नहीं छू पाया है.
राजस्थान में करीब छह लाख शिल्पकार और कारीगर हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े हैं. हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योग में राजस्थान की बड़ी भागीदारी का सबसे बड़ा कारण ये है कि ऊन, तांबे और कपास का यहां बड़ी मात्रा में उत्पादन होता है. जयपुर की ब्लॉक प्रिंटिग और ब्लू पॉटरी, जोधपुर व बाड़मेर का लकड़ी का फर्नीचर और हस्तशिल्प, उदयपुर की लघु चित्रकला व संगमरमर की नक्काशी, बीकानेर के ऊंट के चमड़े से बने उत्पाद और बेहतरीन डिजाइन वाले कालीनों की विश्व में सबसे ज्यादा मांग है. राजस्थान में हथकरघा और हस्तशिल्प कला के 500 से ज्यादा उद्योग हैं.
ट्रंप टैरिफ का शिकार होने वाला राजस्थान का तीसरा बड़ा क्षेत्र गारमेंट्स व टेक्सटाइल है. राजस्थान का कपड़ा निर्यात 2 अरब अमेरिकी डॉलर था जो पिछले पांच माह में करीब-करीब पूरी तरह ठप हो चुका है. राजस्थान में करीब दो हजार से ज्यादा कपड़ा उत्पादक इकाइयां संचालित हैं. यहां फाइबर से लेकर फैशन तक हर चीज का उत्पादन होता है. राजस्थान के बंधनी, लहरिया, कोटा डोरिया जैसे उत्पादों की विश्व में खूब मांग है. भीलवाडा़, जयपुर, पाली और बालोतरा में राजस्थान का सबसे ज्यादा कपड़ा उत्पादन होता है.
राजस्थान हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स के संयोजक नवनीत झालानी कहते हैं, ‘‘राजस्थान में निर्यात की आधे से ज्यादा फैक्ट्रियां अमेरिकी ऑर्डर पर निर्भर हैं. टैरिफ बढ़ने से इन पर बड़ा संकट गहरा गया था. 18 प्रतिशत टैरिफ होने से इन्हें वापस ऊर्जा मिलेगी.’’
कुल मिलाकर अमेरिकी टैरिफ में यह कमी केवल व्यापारिक राहत भर नहीं, बल्कि राजस्थान के पारंपरिक उद्योगों के लिए नई ऊर्जा का संकेत है. उम्मीद है कि अमेरिकी बाजार में राजस्थान के उत्पाद एक बार फिर अपनी साख और चमक बिखेरते नजर आएंगे.