जख्म पर टांके की जगह स्टेपलर पिन कितनी सेफ; क्या है बिहार के वायरल वीडियो की पूरी कहानी
बिहार के नवादा में 3 मार्च को आपसी झगड़े के दौरान एक व्यक्ति को सिर पर चोट लग गई. बाद में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें इसके सिर पर स्टेपलर पिन लगी हुई दिख रही थीं

बहुत मुमकिन है कि आपने वह वीडियो देखा होगा, जिसमें एक व्यक्ति के सिर पर स्टेपलर की पिनें धंसी हुई हैं. इस वीडियो के साथ ऐसी खबरें भी चलीं कि बिहार के डॉक्टरों ने टांके की जगह स्टेपलर की पिनें लगा दीं.
इसके बाद इस बात का खूब मजाक उड़ाया गया. मगर ऐसा क्यों हुआ? यह कहां की घटना है? किसने उस व्यक्ति के सिर पर स्टेपलर की पिनें लगा दी थीं? टांके की जगह स्टेपलर की पिनें लगाने से क्या फर्क पड़ सकता है? आइए आपको पूरी कहानी बताते हैं.
मामला क्या है?
यह कहानी बिहार के नवादा जिले के वारसलीगंज प्रखंड के नारोमुरार गांव की है. होलिका दहन के दिन यानी 3 मार्च को उस गांव में कुछ लोगों के बीच आपस में मारपीट हो गई थी. इसमें तीन लोग घायल हो गए. तीनों घायल जब इलाज करवाने एक ग्रामीण चिकित्सक के पास पहुंचे, तो उसने उनके सिर के घावों पर स्टेपलर पिन लगाकर उन्हें बंद कर दिया. इनमें से एक हरेंद्र कुमार हैं, जिनके सिर पर लगी स्टेपलर की तीन पिनें साफ नजर आती हैं. एक स्थानीय पत्रकार ने इनका वीडियो बना लिया और फिर वह वायरल हो गया.
इस मामले में जब हमने स्थानीय मुखिया अभिनव आनंद से बात की तो उन्होंने बताया, "जिन लोगों के सिर फटे हैं, वे पासवान जाति के हैं. होली के पहले उनके बीच आपस में मारपीट हो गई थी. चोट लगने पर वे एक स्थानीय झोलाछाप डॉक्टर के पास गए, जहां उसने उनके सिर पर स्टेपलर की पिनें लगा दीं. जब यह मामला चर्चा में आया, तो नवादा के सिविल सर्जन ने यहां एक टीम भेजी थी. वारसलीगंज की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने भी इसकी जांच की."
जांच करने आए चिकित्सा पदाधिकारियों ने गांव के लोगों को बताया कि हरेंद्र के सिर पर जो पिनें लगी हैं, वे आम स्टेपलर की पिनें नहीं हैं. ये सर्जिकल स्टेपलर की पिनें हैं. आजकल सर्जरी में टांके की जगह इनका इस्तेमाल खूब होने लगा है.
जांच करने पहुंची डॉक्टर क्या कहती हैं?
हमने इस बारे में जब वारसलीगंज की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आरती अर्चना से पूछा तो उन्होंने कहा, "यह देखकर ही समझ आ गया था कि वहां नॉर्मल स्टेपलर पिन नहीं, बल्कि सर्जिकल स्टेपलर पिन का इस्तेमाल हुआ था. इसलिए कोई दिक्कत की बात नहीं थी. आपत्ति सिर्फ इतनी थी कि जिस व्यक्ति ने इसका इस्तेमाल किया, वह ग्रामीण चिकित्सक है. वह ऐसी पिन के इस्तेमाल के लिए अधिकृत नहीं है. हालांकि, जब हमने पूछताछ की तो हरेंद्र ने बताया कि वह खुद अपनी मर्जी से उस चिकित्सक के पास गया था और उसकी सहमति से ये पिन लगाए गए हैं. इसलिए हमने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. वैसे भी उसने हमें उस ग्रामीण चिकित्सक का नाम नहीं बताया."
डॉ. आरती यह भी जानकारी देती हैं, "किसी भी खुले कट या घाव की स्थिति में अब सर्जिकल स्टेपलर इस्तेमाल किया जाने लगा है. लोग इसके बारे में जानते नहीं हैं, मगर इसका इस्तेमाल 2004-05 से हो रहा है. दिखने में यह आम स्टेपलर जैसा ही लगता है, मगर आकार में बड़ा होता है. अमूमन अभी इसका इस्तेमाल बड़े अस्पतालों में होता है. इतनी छोटी जगह में इसका उपयोग कैसे हुआ, यह हमारे लिए सोचने वाली बात थी. ऐसा लगता है कि जिस ग्रामीण चिकित्सक ने इसका प्रयोग किया, वह किसी बड़े डॉक्टर या बड़े अस्पताल में काम करता होगा. वह वहीं से यह सीखकर आया होगा और यहां भी इसका इस्तेमाल कर लिया."
क्या कहते हैं मेडिकल के एक्सपर्ट
इस पूरे मामले को समझने के लिए हमने इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IGIMS), पटना के सहायक प्राध्यापक डॉ. निखिल रंजन से बातचीत की. उन्होंने कहा, "सर्जिकल स्टेपलर का इस्तेमाल शरीर में कहीं भी स्किन को क्लोज करने के लिए किया जाता है. पहले हम इसकी जगह धागे या सूचर का इस्तेमाल करते थे, जिसके बाद त्वचा पर दाग उभर आता था. सर्जिकल स्टेपलर से दाग के निशान कम बनते हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल अधिक होने लगा है. हालांकि, सिर पर सामान्य तौर पर लोग सूचर का ही उपयोग करते हैं क्योंकि वहां की त्वचा कड़ी होती है, मगर सर्जिकल स्टेपलर के इस्तेमाल में भी कोई बुराई नहीं है."
वे कहते हैं, "हम पिछले दस साल से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. इसका प्रयोग तो शरीर के आंतरिक अंगों के लिए भी किया जाता है. यह भी मेटल का ही बना होता है, हालांकि इसका पॉलिमर अलग होता है."