जदयू को लेकर शुरू हुआ कयासबाजियों का दौर, लेकिन असल बात क्या है?

जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 29 दिसंबर को नई दिल्ली में होने जा रही है और इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर पार्टी अध्यक्ष ललन सिंह तक को लेकर कई तरह की कयासबाजियां की जा रही हैं

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

यह साल खत्म होने से दो दिन पहले जदयू की एक महत्वपर्ण बैठक दिल्ली में होने जा रही है. 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले होने जा रही यह बैठक जदयू के लिए तो महत्वपूर्ण है ही, राजनीतिक हलकों में कई वजहों से चर्चा में है. 29 दिसंबर को हो रही इस बैठक से पहले विपक्षी दलों और मीडिया में कई तरह की कयासबाजियां हैं.

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बदलने से लेकर राजद-जदयू के विलय तक की खबरें लगातार चल रही हैं. चर्चा यह भी है कि जदयू फिर एनडीए का हिस्सा बन सकती है. खबरें पार्टी में टूट और उपेंद्र कुशवाहा के साथ आने की भी हैं. मगर इन सबके बीच जिस एक खबर की सबसे कम चर्चा है, वह है इंडिया गठबंधन में जदयू की स्थिति, नीतीश के महत्व और सीटों के बंटवारे की.

आइए समझते हैं कि जदयू की बैठक को लेकर चल रहीं अटकलें क्या हैं और इनके मायने क्या हैं. 

1.    जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बदलेगा- यह खबर पिछले एक हफ्ते से चल रही थी मगर मंगलवार 26 दिसबंर, 2023 को खबर उड़ी कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. हालांकि खबर मीडिया में आने के कुछ ही घंटे बाद जदयू नेता विजय कुमार चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका खंडन कर दिया. पता चला कि यह खबर भाजपा नेता सुशील मोदी ने ब्रेक की थी और उन्होंने बताया था कि एक जदयू नेता ने उन्हें यह जानकारी दी है.

बहरहाल इसको लेकर अभी भी कयासबाजियां चल रही हैं. कहा जा रहा है कि राजद से नजदीकियों की वजह से ललन सिंह को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटाया जा सकता है. या तो नीतीश खुद अध्यक्ष बन सकते हैं, या दलित चेहरा अशोक चौधरी, अति पिछड़ा चेहरा रामनाथ ठाकुर में से वे किसी को अध्यक्ष बनाया जा सकता है. इनमें से जो भी अध्यक्ष बनेगा वह नीतीश का उत्तराधिकारी होगा.

वैसे अध्यक्ष बदलना जदयू के लिए कोई बड़ी बात नहीं है. मगर जानकार बताते हैं कि नीतीश जिस तरह विपक्षी एकता में अपनी भूमिका निभाने की तैयारी में हैं, ऐसे में वे खुद अध्यक्ष शायद ही बनें. कहा यह भी जा रहा है कि अध्यक्ष बदलने की इतनी चर्चा हो गई है, ऐसे में इस बैठक में शायद ही इस पर कोई फैसला हो.

2.    राजद-जदयू का विलय होगा- यह काफी पुरानी चर्चा है. महागठबंधन की सरकार बनने के वक्त से ही कहा जा रहा है कि दोनों दल एक हो सकते हैं. इससे नीतीश का केंद्र में दावा मजबूत होगा और राज्य में तेजस्वी को कमान देने का रास्ता साफ होगा. इस मसले पर काफी पहले से भाजपा नेता सुशील मोदी बयान देते रहे हैं. हाल में गिरिराज सिंह ने भी ऐसे बयान दिये और कहा कि इस मसले पर लालू यादव से उनकी 'गोपनीय' चर्चा हुई है. मगर फिलहाल दोनों दलों के शीर्ष नेताओं ने इस संभावना को खारिज किया है. फिलहाल इस बात की तैयारी भी नहीं दिख रही.

3.    नीतीश कुमार फिर से पलटी मारेंगे- ऐसी अफवाह बिहार में अक्सर उड़ती रहती है. राज्य में भाजपा की सत्ता में फिर वापसी की उम्मीद रखने वाले लोगों को ऐसी खबरें पसंद आती हैं, इसलिए ऐसी खबरें चलती रहती हैं. हालांकि हाल के दिनों में जब भी ऐसी अफवाह उड़ी, भाजपा नेता यह कहना नहीं भूले कि नीतीश के लिए अब एनडीए के रास्ते बंद हैं. 

सच यह है कि नीतीश अब शायद ही एनडीए में फिर से शामिल हों. उन्हें इस बात का एहसास होगा कि अगर वे ऐसा करेंगे तो शायद पलटूराम का उपनाम उनके साथ हमेशा के लिए नत्थी हो जायेगा. अपनी छवि को लेकर सजग रहने वाले नीतीश अब शायद ही ऐसी छवि लेकर रिटायर होना चाहेंगे.

4.    उपेंद्र कुशवाहा साथ आयेंगे- कहा यह भी जा रहा है कि शायद उपेंद्र कुशवाहा फिर से जदयू का हिस्सा बन जायेंगे. ऐसी कयासबाजियों की कई वजहें हैं. पहली यह कि उपेंद्र कुशवाहा जदयू से अलग ललन सिंह की वजह से हुए थे, अब जब ललन सिंह कमजोर हो रहे हैं तो उनके लिए पार्टी में फिर से जगह बन सकती है. एनडीए में शामिल होने के बाद भी उपेंद्र कुशवाहा को वह हैसियत नहीं मिली, जो वे चाहते थे. भाजपा ने एक और कुशवाहा नेता सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर एनडीए में उनकी उपयोगिता कम कर दी है. ऐसे में लोगों को लगता है कि उपेंद्र कुशवाहा जदयू में आ सकते हैं. मगर उपेंद्र कुशवाहा ने खुद ही इस संभावना से इनकार कर दिया है. 
 
5.    जदयू में टूट होगी- बैठक से दो दिन पहले यह अफवाह उड़ी कि जदयू में टूट हो सकती है. एक सीनियर मंत्री की अगुआई में पार्टी के ग्यारह विधायकों की पटना में गुपचुप बैठक हुई है. इससे पहले भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने भी कहा कि जदयू में कई धड़े हैं और पार्टी टूट की कगार पर है. 

6.    कहीं ये इंडिया गठबंधन के साथ दबाव की राजनीति तो नहीं- इस पूरे प्रकरण में सबसे कम चर्चा इस बात की हो रही है कि इस बैठक का इंडिया गठबंधन से क्या लेना-देना है. जबकि बैठक की घोषणा ही इंडिया गठबंधन की हालिया बैठक के बाद हुई थी, जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम पीएम कैंडिडेट के तौर पर आगे बढ़ाया गया था. कहा गया था कि इस बैठक के बाद नीतीश फिर से नाराज हैं और 29 की कार्यकारिणी की बैठक में वे कोई बड़ा फैसला लेंगे.

हालांकि इसके बाद यह खबर भी आई कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फोन पर नीतीश से बात की है. इसके बाद नीतीश की नाराजगी भी कम दिखी. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 29 दिसंबर को ही कांग्रेस आलाकमान बिहार की सीटों लेकर सहयोगी दलों से चर्चा करने वाला है. इस बीच खबरें यह भी हैं कि जदयू और राजद ने तय कर लिया है कि वे 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. अगर ऐसा हुआ तो सहयोगी दलों कांग्रेस और वाम दलों के लिए छह सीटें ही रह जायेंगी. जबकि खुद कांग्रेस ही अपने लिए नौ सीटें चाहती हैं. वाम दलों के भी अपने दावे हैं. 

इसके अलावा नीतीश चाहेंगे कि इंडिया गठबंधन में उनकी भूमिका जल्द से जल्द तय हो. क्या राजधानी दिल्ली में हो रही कार्यकारिणी में इन मसलों पर भी चर्चा होगी? कहीं नीतीश के एनडीए के साथ जाने, पार्टी अध्यक्ष बदलने और 2024 की रणनीति तय करने की खबरें नीतीश को इंडिया गठबंधन के भीतर मजबूत करने की कोशिश तो नहीं है? इन अटकलों पर बैठक होने के बाद कुहांसा छटने की उम्मीद है.  

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