निशांत सहित तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे और जाति समीकरण; पूरी हुई सम्राट सरकार
सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में उनके अलावा BJP और JDU के 15-15 मंत्री हैं. साथ ही लोजपा (रामविलास) को दो, 'हम' और एक राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक विधायक को जगह मिली है

पटना के गांधी मैदान में 7 मई को सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया. इसके साथ तीन हफ्ते पहले अस्तित्व में आई बिहार की नई सरकार का न सिर्फ आकार, बल्कि जश्न भी पूरा हो गया. मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 32 मंत्रियों ने शपथ ली और इस तरह बिहार मंत्रिमंडल का अधिकतम 36 सदस्यों का कोटा लगभग पूरा हो गया.
इससे पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ दो उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने शपथ ली थी. इस तरह अब सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में उनके अलावा 34 और सदस्य हो गए. इसकी खासियत यह रही कि नीतीश कुमार के पुत्र निशांत भी आखिरकार सरकार का हिस्सा बन गए, जिसकी चर्चा लंबे समय से जारी थी.
15 अप्रैल, 2026 को बिहार के लोक भवन में सादे तरीके से सम्राट चौधरी और दो अन्य उपमुख्यमंत्रियों ने शपथ ली थी. तब पांच राज्यों में हो रहे चुनाव की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जैसे बड़े नेताओं की कमी शिद्दत से महसूस की गई थी. खास तौर पर यह देखते हुए कि सम्राट बिहार के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री थे. मगर 7 मई को दोनों प्रमुख नेताओं ने पटना पहुंचकर यह कमी पूरी कर दी.
हाल के चुनाव में बंगाल, असम और पुडुचेरी में जीत के बाद BJP का हौसला बुलंद है. ऐसे में गांधी मैदान में आयोजित हुआ मंत्रिमंडल विस्तार का कार्यक्रम पार्टी के लिए जश्न बन गया. इसे BJP ने "अंग, बंग और कलिंग में BJP की जीत का जश्न" बताया. खास बात यह रही कि आज BJP ऑपरेशन सिंदूर की बरसी भी मना रही है, यह बात भी उस जश्न का हिस्सा हो गई.
इस आयोजन में भाग लेने के लिए जहां BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और गृह मंत्री अमित शाह एक दिन पहले आ गए थे, वहीं 7 मई की दोपहर पटना पहुंचे पीएम मोदी का एयरपोर्ट से गांधी मैदान तक रोड शो चला.
दोपहर 12:10 बजे मंत्रिमंडल के नए सदस्यों का शपथ ग्रहण शुरू हुआ. इस कार्यक्रम की खासियत यह रही कि इसमें पिछली नीतीश सरकार के ज्यादातर मंत्री शामिल रहे. जो तीन लोग इसमें शामिल नहीं रहे, उनमें BJP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और एक अन्य सीनियर नेता मंगल पांडेय के साथ नारायण प्रसाद जैसे नए मंत्री थे. नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य बनने की वजह से मंत्रिमंडल का सदस्य न बनना स्वाभाविक था. मंगल पांडेय के बारे में कहा जा रहा है कि BJP उन्हें केंद्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने जा रही है.
पिछली नीतीश सरकार में 26 सदस्य थे, जिनमें से 23 इस सरकार में भी अब मंत्री हैं. इनके अलावा 12 नए मंत्री इस बार बने हैं, जिनमें सात लोग पहली बार मंत्री बने हैं. इनमें नंद किशोर राम, रामचंद्र प्रसाद, मिथिलेश तिवारी, कुमार शैलेंद्र, श्वेता गुप्ता, निशांत कुमार और बुलो मंडल शामिल हैं. शेष पांच जो पहले मंत्री बन चुके हैं, वे केदार गुप्ता, नीतीश मिश्रा, भगवान सिंह कुशवाहा, दामोदर रावत और रत्नेश सदा हैं.
इस वक्त सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में उनके अलावा BJP और JDU के 15-15 मंत्री हैं. साथ ही लोजपा (रामविलास) को दो, 'हम' और एक राष्ट्रीय लोक मोर्चा को एक-एक मंत्रिपद मिला है.
इस सूची में निशांत के साथ-साथ उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश ऐसे मंत्री हैं, जो फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं हैं. इनके नाम पर परिवारवाद के आरोप तो हैं ही, यह भी तथ्य है कि इस मंत्रिमंडल में तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे शामिल हैं. निशांत के अलावा नीतीश मिश्रा पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के बेटे हैं और संतोष सुमन 'हम' पार्टी के संस्थापक जीतन राम मांझी के बेटे हैं.
35 मंत्रियों में से कम से कम आठ ऐसे हैं, जिन पर परिवारवाद का आरोप लगता है. इनमें खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं, जिनके पिता शकुनी चौधरी बड़े नेता रहे हैं. उनके अलावा नीतीश मिश्रा, रमा निषाद, श्रेयसी सिंह, निशांत कुमार, अशोक चौधरी, संतोष कुमार सुमन और दीपक प्रकाश राजनीतिक परिवारों से आते हैं.
हालांकि इस मंत्रिमंडल के लिए एनडीए ने अच्छा जाति समीकरण तैयार किया है. नए मंत्रिमंडल में 9 सवर्ण, 9 पिछड़ा, 9 अति पिछड़ा और सात दलित सदस्य हैं. हालांकि इस मंत्रिमंडल में एक ही अल्पसंख्यक सदस्य हैं- JDU के जमा खान.
अगर जाति के आधार पर देखा जाए तो सबसे अधिक हिस्सेदारी वैश्यों को मिली है. अपनी सभी उपजातियों को मिलाकर इनके पांच सदस्य हैं. इसके बाद राजपूत जाति के चार, तथा कुशवाहा और भूमिहार जाति के तीन-तीन सदस्य हैं. ब्राह्मण जाति के दो, एवं पासवान और रविदास समाज के दो-दो सदस्य हैं.
BJP ने जहां इस विस्तार में 6 सवर्णों को जगह दी, वहीं JDU ने दो और लोजपा ने एक सवर्ण को मंत्री बनाया है. JDU का ज्यादा जोर ओबीसी, ईबीसी और दलितों पर रहा है. पार्टी की तरफ से इनके क्रमशः तीन, चार और तीन सदस्य मंत्री बनाए गए हैं. हालांकि BJP ने भी 5 अति पिछड़ों को मंत्री बनाया है.
जाति एवं अन्य समीकरणों से इतर इस मंत्रिमंडल की सबसे अच्छी बात यह है कि पिछले नवंबर से अस्थाई तौर पर चल रही बिहार सरकार का आकार लगभग पूरा हो गया है. शाम को मंत्रालयों का बंटवारा भी हो गया. सरकारी प्रेस रिलीज जारी होने के बाद इस जानकारी को जोड़कर यह रिपोर्ट अपडेट कर दी जाएगी.