कांग्रेस को 'दुश्मन' मानने वाले NTR के सबसे बड़े प्रशंसक क्यों बने रेवंत रेड्डी?
फिल्मों में शानदार करियर के बाद नंदामुरी तारक रामाराव (NTR) ने 1982 में तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना की और अविभाजित आंध्र प्रदेश में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया था

28 मई को नंदमूरी तारक राम राव (NTR) के 103वें जन्मदिन पर तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में 23 फीट ऊंची उनकी एक भव्य कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया. तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के संस्थापक और पूर्व आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री NTR की इस मूर्ति को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (कांग्रेस) की सरकार ने अमीरपेट के व्यस्त मैत्रीवनम जंक्शन पर स्थापित करवाया है.
इस इलाके में सैकड़ों सॉफ्टवेयर कोचिंग संस्थान हैं, जहां हर साल हजारों युवा टेक प्रोफेशनल बनकर तैयार होते हैं. हैदराबाद और तेलंगाना में NTR की कई मूर्तियां हैं लेकिन यह वाली खास है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसे कांग्रेस सरकार ने बनवाया है. उसी कांग्रेस से जिसके खिलाफ NTR ने जीवन भर लड़ाई लड़ी.
NTR पहले सुपरस्टार फिल्म अभिनेता थे. 1982 में उन्होंने TDP पार्टी बनाई. 1983 में उन्होंने कांग्रेस को हराकर सरकार बना ली. 1989 में कांग्रेस वापस आई लेकिन 1994 में NTR ने एक बार फिर हराकर सत्ता से बाहर कर दिया. 1996 में उनका देहांत हो गया. वे आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के पास एक गांव के रहने वाले थे.
ऐसे में सवाल यह है कि आखिर कांग्रेस के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद के बीचों-बीच ‘कांग्रेस के सबसे बड़े दुश्मन’ NTR की प्रतिमा का अनावरण क्यों किया, उनकी इतनी तारीफ क्यों की और उन्हें अपनी पार्टी की आइकन इंदिरा गांधी के बराबर क्यों रखा? और वह भी आंध्र प्रदेश के बंटवारे के 12 साल बाद, जब तेलंगाना अलग राज्य बना ही क्षेत्रीय भावना पर था.
इसका जवाब प्रतिमा की जगह में छिपा है. मैत्रीवनम सर्कल से लेकर पाटनचेरु तक के क्षेत्र में कई विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. यहां बड़े-बड़े रिहायशी इलाके हैं, जहां आंध्र सेटलर्स (तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा के लोग) बड़ी संख्या में बस गए है. ये लोग नौकरी, व्यापार या रोजगार की तलाश में पिछले कई दशकों में जब हैदराबाद संयुक्त आंध्र प्रदेश की राजधानी थी, तब यहां आकर बस गए थे.
कम्मा जाति के लोग NTR को भगवान सरीखा दर्जा देते हैं. NTR और उनके दामाद आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू दोनों कम्मा समुदाय से हैं. हैदराबाद में बसे आंध्र लोगों में कम्मा समुदाय बहुत प्रभावशाली है और वे TDP के साथ हैं. जिस जुबली हिल्स सीट पर यह मैत्रीवनम प्रतिमा लगी है, उस सीट पर 2014 से 2025 तक कम्मा नेता मगंति गोपीनाथ विधायक थे. इस साल स्वास्थ्य कारणों से उनका निधन हो गया. वे 2014 में TDP टिकट पर जीते थे लेकिन बाद में TDP के कमजोर होने पर BRS में चले गए थे.
रेवंत रेड्डी पहले TDP के विधायक रह चुके हैं और चंद्रबाबू से अभी भी अच्छे संबंध हैं. उन्होंने जुबली हिल्स उपचुनाव (नवंबर 2025) के दौरान दिए वादे के मुताबिक यह NTR प्रतिमा लगवाई. समारोह में NTR के बहुत से प्रशंसक और कम्मा नेता बड़े संख्या में आए थे. रेवंत रेड्डी ने कहा, “NTR का सम्मान जाति, धर्म या क्षेत्र से ऊपर है. उन्होंने पूरे तेलुगु समाज को गर्व दिया. NTR और इंदिरा गांधी दोनों मेरी कल्याणकारी सरकार के प्रेरणा स्रोत हैं.” उन्होंने इसे अपने जीवन के सबसे यादगार दिनों में से एक बताया.
रेवंत रेड्डी ने कहा, “इंदिरा गांधी तो एक पीढ़ी हैं लेकिन NTR एक पूरा युग हैं.” उन्होंने बताया कि तेलंगाना के आज के कई बड़े नेताओं का विकास NTR के सहयोग और प्रोत्साहन से ही हुआ है. केसीआर भी उन्हीं में से एक हैं. रेवंत रेड्डी ने मजाकिया अंदाज में कहा, “KCR की राजनीतिक तरक्की NTR की राजनीतिक भिक्षा है.”
बता दें कि KCR पहले TDP के विधायक और मंत्री थे. 2001 में उन्होंने तेलंगाना राज्य बनाने के एकमात्र मुद्दे पर तेलंगाना राष्ट्र समिति (BRS) की शुरुआत की थी. रेवंत रेड्डी ने KTR (KCR के बेटे के. तारक राम राव) पर हमला बोलते हुए उन्हें नकली बताया. उन्होंने कहा कि NTR के नाम पर नाम रखने वाले लोग भी इस प्रतिमा की आलोचना कर रहे हैं.
इस घटना से आंध्र और तेलंगाना के बीच क्षेत्रीय तनाव फिर से सामने आ गया. सोशल मीडिया पर KTR के पुराने वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें उन्होंने वादा किया था कि BRS जीतने पर जुबली हिल्स में NTR की कांस्य प्रतिमा लगाई जाएगी.
विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस ने NTR की प्रतिमा जल्दी लगाकर आंध्र सेटलर्स और कम्मा वोटों को साधने की कोशिश की है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस साल हैदराबाद में नगर निगम के चुनाव होने हैं. वहीं आंध्र प्रदेश में TDP की हर साल होने वाले महानडू बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया कि NTR को भारत रत्न दिया जाए. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि यह पूरी दुनिया के तेलुगु लोगों की लंबे समय से चली आ रही इच्छा है.