रेवंत रेड्डी की अनोखी 'लाइफ कवर' स्कीम क्या उनकी लोकप्रियता का बीमा कर पाएगी?

तेलंगाना के 2026-27 के बजट में और ज्यादा 'फ्रीबीज' दी गई हैं. इसका मकसद लोकलुभावन कदमों के जरिए हालिया चुनावी जीतों को और मजबूत करना है. कांग्रेस इन्हीं वादों के दम पर सत्ता में आई थी

रेवंत रेड्डी
रेवंत रेड्डी

प्रसाद निचेनामेतला

मार्च की 20 तारीख को तेलंगाना का 2026-27 का बजट पेश करते हुए, डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने एक ऐसी योजना का ऐलान किया जिसे उन्होंने "एक शानदार और बेमिसाल जीवन बीमा योजना" बताया. यह दावा करते हुए कि विकसित देशों में भी इसे इस तरह लागू नहीं किया गया है, मल्लू ने प्रस्ताव रखा कि राज्य के हर परिवार को, चाहे वे किसी भी आर्थिक या सामाजिक वर्ग के हों (गरीब, मिडिल क्लास या अमीर), 'इंदिरम्मा फैमिली लाइफ इंश्योरेंस' नाम की एक नई योजना के तहत कवर किया जाएगा.

मंत्री ने प्रस्ताव रखा कि 2 जून (तेलंगाना के स्थापना दिवस) से, राज्य अपने यहां के सभी 1.15 करोड़ परिवारों में से हर एक को 5 लाख रुपए का लाइफ इंश्योरेंस देगा. भट्टी ने नए वित्त वर्ष में इस अनोखी लाइफ इंश्योरेंस स्कीम के लिए 4,000 करोड़ रुपए का बजट रखते हुए कहा, "यह सरकार हर परिवार को सुरक्षा की गारंटी देती है."

अपना आधा कार्यकाल पूरा करने की तरफ बढ़ रही रेवंत रेड्डी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार साफ तौर पर अपने 'वेलफेयर' (जनकल्याण) के दायरे को बढ़ाना चाहती है, ताकि वोटर्स (खासकर मिडिल क्लास) के बीच उसकी अपील और मजबूत हो. यही वजह है कि बजट में एक और ऐसा प्रावधान था जिसने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को खुश कर दिया. भट्टी ने एक 'कैशलेस हेल्थ सिक्योरिटी स्कीम' शुरू करने का ऐलान किया, जिसका इन दोनों वर्गों को लंबे समय से इंतजार था. इसे 'राजीव आरोग्यश्री ट्रस्ट' के जरिए लागू किया जाएगा.

इस योजना के तहत, करीब 23.5 लाख सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों को सरकारी अस्पतालों और 421 पैनल वाले प्राइवेट अस्पतालों में 1,998 बीमारियों के लिए इलाज की सुविधा मिलेगी.

सरकार स्कूलों में दिए जाने वाले भोजन का दायरा बढ़ाकर उसमें नाश्ता भी शामिल करने जा रही है. इसके साथ ही, पूरे राज्य के सभी सरकारी जूनियर कॉलेजों में इंटरमीडिएट (+2) की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए भी मुफ्त भोजन योजना को बढ़ा दिया गया है. नाश्ते वाले प्रोग्राम (जिसे मल्लू ने "पोषण और सेहत सुधारने, अटेंडेंस बढ़ाने और ड्रॉपआउट कम करने की एक ऐतिहासिक पहल" बताया) के तहत हर छात्र को हफ्ते में तीन दिन दूध और बाकी तीन दिन रागी माल्ट दिया जाएगा. इस प्रोग्राम के लिए 720 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है.

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, ये योजनाएं साफ तौर पर सिकंदराबाद छावनी, जुबली हिल्स उपचुनाव और पंचायत व निकाय चुनावों में मिली लगातार जीतों के 'मोमेंटम' को भुनाने के लिए हैं. वे इन कदमों को तेलंगाना की जनता और कांग्रेस हाईकमान, दोनों की नजरों में अपनी स्थिति मजबूत करने की रेवंत रेड्डी की कोशिश के तौर पर देखते हैं.

पहली बार सीएम बने रेवंत (जो पहले तेलुगु देशम पार्टी के विधायक थे) नई योजनाओं से वोटर्स के अलग-अलग वर्गों को प्रभावित करके, अगले पांच साल के लिए एक और कार्यकाल जीतने का गजब का कॉन्फिडेंस दिखा रहे हैं.

हालांकि, मुख्य विपक्षी पार्टी BRS इससे बिल्कुल प्रभावित नहीं है. उसने याद दिलाया कि 2023 में सत्ता से बाहर होने से कुछ महीने पहले, तत्कालीन सीएम के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 119 स्कूलों (तेलंगाना की सभी 119 विधानसभा सीटों में से हर एक में एक स्कूल) में नाश्ते की योजना शुरू की थी. BRS का प्लान बाद में इसे सभी स्कूलों तक ले जाने का था.

जब मल्लू अपना चौथा बजट पेश करने की तैयारी कर रहे थे, तब BRS नेताओं ने विधानसभा परिसर में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया. उनका आरोप था कि कांग्रेस ने वे चुनावी वादे पूरे नहीं किए हैं जिनकी बदौलत वह दिसंबर 2023 में सत्ता में लौटी थी. हालांकि महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और पात्र घरों को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली जैसी कुछ 'फ्रीबीज' लागू की जा रही हैं, और सालाना 15,000 रुपए की कृषि मदद योजना 'रायथु भरोसा' के फंड की पहली किश्त रविवार को सीएम की ओर से जारी कर दी गई है.

लेकिन बजट भाषण के दौरान वॉकआउट करने वाले BRS विधायकों का आरोप है कि युवाओं को नौकरी/बेरोजगारी भत्ता, बुजुर्गों और दिव्यांगों को 4,000 रुपए की मासिक पेंशन, और 'कल्याण लक्ष्मी' के तहत शादी में मदद के लिए एक तोला सोना देने जैसे बाकी चुनावी वादे लागू नहीं किए गए हैं. पूर्व मंत्री और BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव ने आरोप लगाया, "जिस कांग्रेस ने 100 दिनों के भीतर इन वादों को लागू करने का बॉन्ड पेपर पर लिखकर वादा किया था, वह अब धोखा दे रही है. यह दिखाता है कि कांग्रेस की अपने वादे निभाने की कोई नीयत नहीं है."

सरकार ने इन आरोपों का पलटवार करते हुए बजट में अपनी 'छह गारंटियों' के तहत बड़े फंड का हवाला दिया. बजट में 'रायथु भरोसा' के लिए 18,000 करोड़ रुपए, 'चेयुथा' सोशल वेलफेयर असिस्टेंस स्कीम के लिए 14,861 करोड़ रुपए और गरीबों के लिए 'इंदिरम्मा घर' के लिए 5,500 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है.

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