राजस्थान ने UPSC परीक्षाओं में कैसे कायम किया दबदबा?
रावतभाटा के डॉ. अनुज अग्निहोत्री ने इस बार UPSC की परीक्षा में टॉप किया है और पिछले 7 साल का आंकड़ा देखें तो राजस्थान से 155 आईएएस अफसर निकले हैं

जयपुर का गोपालपुरा बाईपास इलाका, जो कुछ साल पहले तक वीरान रहता था, अब चौबीसों घंटे गुलजार रहता है. पांच किलोमीटर के दायरे में जहां तक नजर जाती है, वहां तक पीठ पर बस्ता लादे युवा नजर आते हैं.
एक-दो साल पहले तक इस इलाके में केवल NEET, JEE, शिक्षक, पुलिस और RAS भर्ती परीक्षा की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थान थे, लेकिन अब यहां सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थानों की भरमार है.
इसे बढ़ते कोचिंग संस्थानों का परिणाम मानें या सिविल सेवा के प्रति युवाओं का रुझान, कारण जो भी हो, लेकिन देश के आला अधिकारियों को चुनने वाली सिविल सर्विस परीक्षा में पिछले कुछ सालों में राजस्थान ने ऊंची छलांग लगाई है. चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा के डॉ. अनुज अग्निहोत्री के UPSC में देशभर में पहला स्थान हासिल करने के साथ ही यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि प्रशासनिक सेवाओं में राजस्थान का दखल लगातार कैसे बढ़ रहा है?
कभी बिहार और उत्तर प्रदेश के वर्चस्व वाली इस परीक्षा में अब मरुधरा के युवाओं की मजबूत मौजूदगी दिखाई देने लगी है. इस बार भी UPSC में राजस्थान के 36 अभ्यर्थियों ने अपना दबदबा कायम किया है.
UPSC के पिछले पांच-छह साल के नतीजों पर गौर करें तो प्रशासनिक सेवाओं में राजस्थान के नौजवान बाजी मार रहे हैं. सिविल सर्विस परीक्षा 2021 में आईएएस के 180 पदों में अकेले राजस्थान से 24 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, वहीं 2022 में राजस्थान के 22 युवा आईएएस अधिकारी बने. 2021 में जहां राजस्थान से सबसे ज्यादा आईएएस बने, वहीं 2022 में भी राजस्थान, उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे नंबर पर रहा. राजस्थान से 2020 में 22 और 2019 में 16 आईएएस चुने गए. इसके बाद 2023 में 24 और 2024 में 25 आईएएस राजस्थान से चुने गए. सिविल सेवा में राजस्थान के बढ़ते दखल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 7 साल में राज्य से 155 आईएएस अफसर निकले.
पिछले कुछ वर्षों में सिविल सेवा परीक्षा के शीर्ष पायदानों पर भी राजस्थान के युवाओं ने कब्जा जमाया है. 2013, 2015, 2019 और 2025 में राजस्थान के अभ्यर्थी पहले स्थान पर रहे हैं. दिलचस्प यह भी है कि 2015 और 2019 में पहला स्थान हासिल करने वाले दोनों अभ्यर्थी दलित वर्ग से आते हैं. 2015 में तेजतर्रार आईएएस टीना डाबी ने देशभर में टॉप किया था, वहीं 2018 में जयपुर के कनिष्क कटारिया और 2013 में गौरव अग्रवाल अव्वल रहे थे. 2019 में जयपुर के अक्षत जैन दूसरे, अजमेर के श्रेयांस कूमट चौथे और नीमकाथाना के शुभम गुप्ता छठे स्थान पर रहे थे.
सबसे ज्यादा आईएएस देने वाले राज्य
2015 की टॉपर रही टीना डाबी ने कहा था कि उन्होंने 11वीं कक्षा के बाद ही सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी थी. टीना डाबी के इन शब्दों ने राजस्थान में तैयारी का परिदृश्य ही बदल दिया. पहले स्नातक के बाद युवा तैयारी में जुटते थे, लेकिन अब 12वीं के बाद ही इसकी शुरुआत हो जाती है. कोचिंग संस्थानों ने भी अपनी कार्यशैली बदलते हुए एक साल के बजाय चार साल के पाठ्यक्रम शामिल कर लिए हैं.
चाणक्य कोचिंग इंस्टीट्यूट की मनीषा भारद्वाज कहती हैं, "जयपुर में पहले सिविल सेवा की तैयारी के लिए एक साल का कोर्स ही होता था, लेकिन अब 12वीं के बाद से ही तैयारी शुरू हो जाती है. ग्रेजुएशन के साथ-साथ कोचिंग चलती है. तीन साल में ये बच्चे इतने सक्षम हो जाते हैं कि पहले प्रयास में ही परीक्षा क्लियर कर लेते हैं. अब अभिभावक भी बच्चों को 12वीं के बाद ही UPSC की कोचिंग के लिए जयपुर भेज देते हैं."
पिछले कुछ वर्षों में एक और बदलाव देखा गया है. युवा अन्य नौकरियों के बजाय सिविल सेवा को को मुख्य लक्ष्य बना रहे हैं. सारथी आईएएस के अरिंदम कहते हैं, "कुछ साल पहले तक बड़ी तादाद में युवा शिक्षक, पटवारी या पुलिस सेवा में चयनित होने के बाद सिविल सेवा की तैयारी करते थे, लेकिन अब अधिकांश युवा इसे ही अपना प्रमुख लक्ष्य बना चुके हैं. इसका एक कारण यह भी है कि अन्य सेवाओं में काम करते हुए तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता था, जिससे नौकरी पेशा बच्चों का चयन कम हो गया था."
दिल्ली के तमाम बड़े कोचिंग सेंटर्स अब राजस्थान में आ चुके हैं. दृष्टि, चाणक्य, नेक्स्ट, विजन और राव जैसे नामी संस्थानों के साथ ही राजस्थान के स्प्रिंग बोर्ड, उत्कर्ष, एलेन, कलाम, सारथी और सम्यक जैसे संस्थान भी इस तैयारी के लिए जाने जाते हैं. कोरोना काल के बाद राजस्थान में कोचिंग संस्थानों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है. दिल्ली में प्रदूषण और महंगाई के कारण भी जयपुर एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. मनीषा भारद्वाज आगे कहती हैं, "राजस्थान में अब दिल्ली जैसे बेहतरीन सेंटर्स हैं. ऐसे में दिल्ली के प्रदूषण, महंगाई और असुरक्षित वातावरण के बजाय युवा अब जयपुर को ही अपनी तैयारी का केंद्र बना रहे हैं."
कौन हैं UPSC टॉपर डॉ. अनुज अग्निहोत्री?
चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा निवासी डॉ. अनुज अग्निहोत्री ने इस वर्ष UPSC में देशभर में पहला स्थान हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है. मेडिकल की पढ़ाई के बाद इस मुकाम तक पहुंचने की उनकी कहानी मेहनत और धैर्य का उदाहरण है. अनुज कहते हैं, "मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ही मुझे महसूस हुआ कि अगर समाज में व्यापक बदलाव लाना है, तो प्रशासनिक सेवा में जाना होगा. इसी उद्देश्य के साथ मैंने एमबीबीएस इंटर्नशिप के दौरान ही इतिहास, राजनीति और साहित्य जैसे विषयों को पढ़ना शुरू किया."
डॉ. अनुज ने 2017 की मेडिकल प्रवेश परीक्षा में 215वीं रैंक हासिल की थी, जिसके बाद उन्होंने जोधपुर एम्स से एमबीबीएस किया. 2023 में एमबीबीएस पूरा करने के बाद पहले ही प्रयास में उन्होंने UPSC पास की, लेकिन रैंक के कारण उन्हें केंद्र शासित प्रदेश सेवा आवंटित हुई, जहां उन्होंने दिल्ली में एसडीएम के पद पर कार्यभार संभाला.
नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखते हुए दूसरे प्रयास में उन्हें इंटरव्यू में सफलता नहीं मिली, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने देशभर में टॉप किया. वे कहते हैं, "मैंने तय किया था कि जब तक मनचाही रैंक नहीं मिलेगी, तैयारी नहीं छोड़ूंगा. इस बार इंटरव्यू में मुझसे राजस्थान की संस्कृति और मेडिकल साइंस से जुड़े सवाल ज्यादा पूछे गए. मेरी सफलता में मेरी मां का सबसे बड़ा योगदान है, जिन्होंने मेरी पढ़ाई के लिए खुद को समर्पित कर दिया."
अनुज ने सोशल मीडिया (एक्स को छोड़कर) से दूरी बना ली थी और रोजाना 8-10 घंटे पढ़ाई की. उन्हें टेबल टेनिस और संगीत का शौक है. महेंद्र सिंह धोनी के प्रशंसक अनुज आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं.
राजस्थान का अफसरों वाला गांव
राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के बामनवास गांव को देशभर में 'अफसरों वाले गांव' के नाम से जाना जाता है. अब तक इस गांव से 150 से ज्यादा आईएएस, आईपीएस, आईआरएस और आरएएस अफसर निकल चुके हैं. इस गांव ने कई विधायक और मंत्री भी दिए हैं. रिटायर्ड आईपीएस नमोनारायण मीणा दो बार सांसद और केंद्र में वित्त राज्यमंत्री रह चुके हैं. उनके छोटे भाई और पूर्व डीजीपी हरीश मीणा देवली-उनियारा से लगातार दो बार विधायक चुने गए हैं.
यह भी दिलचस्प है कि जिन जिलों को शैक्षिक दृष्टि से पिछड़ा माना जाता है, वहां से सिविल सेवाओं में ज्यादा चयन हुए हैं. बाड़मेर, सवाई माधोपुर और दौसा जिलों से हर साल करीब 50 युवा चयनित होते हैं. शेखावाटी के सीकर और झुंझुनूं से भी हर बार एक दर्जन से ज्यादा युवाओं का चयन होता है.