राजस्थान के स्कूलों में यौन शोषण की घटनाएं रुकती क्यों नहीं?

राजस्थान के राज्य शिक्षा विभाग के अनुसार साल 2020 से 2025 के बीच स्कूलों में छेड़छाड़ और रेप के 70 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं

Maharashtra Minor Girl Rape Case
सांकेतिक फोटो

पिछले कुछ समय में राजस्थान के स्कूलों में सामने आई शर्मनाक घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है. जिन स्कूलों को सुरक्षित भविष्य की नींव माना जाता है, वहीं शिक्षकों पर लगे यौन शोषण के आरोपों ने अभिभावकों के भरोसे को चकनाचूर कर दिया है.

इसी टूटते भरोसे की बानगी चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं थाना क्षेत्र का वह सरकारी स्कूल है, जहां एक शिक्षक को 23 बच्चों के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया. पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी शिक्षक बच्चों के साथ आपत्तिजनक हरकतें करता था और उनके वीडियो भी बनाता था. 

यह मामला तब सामने आया जब कुछ वीडियो वायरल हुए और अभिभावकों को इसकी जानकारी मिली. घटना के बाद शिक्षा विभाग ने आरोपी शिक्षक को सेवा से बर्खास्त कर दिया है. बाड़मेर जिले के बाखासर क्षेत्र के एक अन्य मामले में शिक्षक पर छात्रा के साथ रेप और हत्या का आरोप लगा. आरोपी शिक्षक पेशे से वकील था और घटना के बाद फरार हो गया था, जिसे राजस्थान पुलिस पड़ोसी राज्य से गिरफ्तार करके लाई.

झुंझुनूं जिले में छात्रा से छेड़छाड़ का एक और मामला सामने आया. यहां आरोपी शिक्षक अपनी ही कक्षा की छात्रा को लिफ्ट देने के बहाने कार में बैठाकर छेड़छाड़ करने लगा. विरोध करने पर वह छात्रा को चलती गाड़ी से बाहर फेंक कर भाग गया. इस घटना का बच्ची के मन पर ऐसा असर हुआ कि उसने स्कूल जाना ही छोड़ दिया.

पिछले कुछ समय में राजस्थान के सरकारी स्कूलों को शर्मसार करने वाली कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं. बाड़मेर (6), नागौर (6), भीलवाड़ा (5), अनूपगढ़ (5), अजमेर (4) और दौसा (4) जिलों में छेड़छाड़ व यौन शोषण के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं. 

राज्य शिक्षा विभाग के अनुसार, वर्ष 2020 से 2025 के बीच स्कूलों में छेड़छाड़ और दुष्कर्म के 70 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं. बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता विजय गोयल कहते हैं, "स्कूल बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान होने चाहिए, लेकिन जब वही भय का कारण बन जाएं तो यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता की भी विफलता है." वे यह भी कहते हैं कि कई मामलों में बच्चियों ने डर और सामाजिक दबाव के कारण परिजनों को जानकारी ही नहीं दी. इनमें से कई बच्चियों ने खौफ के चलते अपनी पढ़ाई छोड़ दी है. 

कुछ साल पहले सीकर जिले की एक घटना ने पूरे प्रदेश को दहला दिया था. मासूम बच्ची भविष्य संवारने के लिए स्कूल पहुंची थी, लेकिन वहां बलात्कार और जबरन गर्भपात की घटना ने उसे उम्रभर का दर्द दे दिया. इस मामले में शिक्षक और प्रबंधक को गिरफ्तार कर 'जनता बाल निकेतन' स्कूल को बंद कर दिया गया था. हालांकि, उस अस्पताल के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई जहां नाबालिग का गर्भपात कराया गया था.

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर स्कूलों में छेड़छाड़ के मामलों को लेकर सख्त कार्रवाई की हिदायत दे चुके हैं. दिलावर का कहना है, "शिक्षक पर भविष्य निर्माण की जिम्मेदारी होती है. अगर उसी पर ऐसे आरोप लगेंगे तो यह केवल एक व्यक्ति का पतन नहीं, बल्कि पूरे समाज के नैतिक आधार के दरकने का संकेत है. शिक्षा के मंदिरों को शर्मसार करने वाले ऐसे लोगों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."

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