राजस्थान राज्यसभा चुनाव : क्या है 3 सीटों का सियासी गणित और कांग्रेस-भाजपा की रणनीति?

राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटें जून में खाली हो रही हैं. इनमें से दो BJP की हैं और एक कांग्रेस की

अशोक गहलोत और भजनलाल शर्मा- फाइल फोटो
अशोक गहलोत और भजनलाल शर्मा (फाइल फोटो)

राजस्थान में बढ़ते तापमान के साथ ही राज्यसभा चुनाव का पारा भी बढ़ता जा रहा है. जून में राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटें खाली होने जा रही हैं और इसके साथ ही BJP तथा कांग्रेस दोनों ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. 

जानकारों के अनुसार इन तीन सीटों के सियासी गणित में कोई खास बदलाव होता नजर नहीं आ रहा है. राजस्थान विधानसभा में विधायकों के संख्याबल के चलते BJP को दो सीटें जीतने में कोई खास दिक्कत नहीं आएगी, वहीं कांग्रेस को भी अपनी एक सीट बचाने में कोई मुश्किल नजर नहीं आ रही.

राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन के लिए BJP कोर ग्रुप ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को जिम्मेदारी सौंपी है, वहीं कांग्रेस में राज्यसभा उम्मीदवार का फैसला पार्टी आलाकमान पर निर्भर होगा. BJP सांसद राजेंद्र गहलोत व रवनीत सिंह बिट्टू और कांग्रेस सांसद नीरज डांगी का राज्यसभा कार्यकाल अगले माह पूरा होने जा रहा है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार राज्यसभा के लिए कांग्रेस व BJP में नए नाम होंगे. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक पार्टी किसी युवा चेहरे पर दांव खेलने वाली है.

जयपुर में 16 मई को हुई BJP प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक ने साफ संकेत दे दिए हैं कि पार्टी इस चुनाव को केवल संसदीय प्रक्रिया के रूप में नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश और संगठनात्मक शक्ति प्रदर्शन के अवसर के रूप में देख रही है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को राज्यसभा की प्रत्येक सीट के लिए तीन-तीन नामों का पैनल तैयार कर केंद्रीय संसदीय बोर्ड को भेजने का अधिकार दिया गया है. इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि पार्टी केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश संगठन के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहती है. 

विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए BJP दो सीटों पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है जबकि तीसरी सीट को लेकर राजनीतिक समीकरण दिलचस्प हो सकते हैं. यही वजह है कि दोनों दल अपने उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश करेंगे. BJP के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि पार्टी संगठन और सरकार के बीच तालमेल मजबूत करने वाले चेहरों को प्राथमिकता दे सकती है, जबकि कांग्रेस अपने अनुभव और संगठनात्मक स्वीकार्यता वाले नेताओं पर दांव लगाने की तैयारी में है.

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. गजेंद्र सिंह का मानना है, "राज्यसभा चुनाव का असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह प्रदेश की राजनीतिक दिशा भी तय करता है. इसलिए दोनों पार्टियां ऐसे चेहरों पर दांव खेलेंगी जो प्रदेश की राजनीति को भी प्रभावित कर सकें."

200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में फिलहाल BJP के 119 और कांग्रेस के 66 विधायक हैं. BJP को 5 निर्दलीय और एक राष्ट्रीय लोकदल के विधायक का भी समर्थन प्राप्त है, वहीं कांग्रेस को भारतीय आदिवासी पार्टी के चार विधायकों का समर्थन मिल सकता है. इस लिहाज से BJP को 125 विधायकों के समर्थन के साथ अपनी दो सीटों पर जीत में कोई खास दिक्कत नहीं आने वाली, वहीं कांग्रेस 70 विधायकों के समर्थन से अपनी एक सीट वापस बचा सकती है. 

2022 में हुए राज्यसभा चुनावों में BJP की धौलपुर विधायक शोभारानी कुशवाहा ने क्रॉस वोटिंग की थी, जिसे पार्टी ने बहुत गंभीरता से लिया और कुशवाहा को पार्टी से निलंबित कर दिया गया. BJP इस बार सत्ता में है, इसलिए BJP विधायकों के क्रॉस वोटिंग के आसार कम हैं. BJP इस चुनाव के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि संगठनात्मक स्तर पर पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सरकार व संगठन के बीच कोई दूरी नहीं है.

दूसरी ओर कांग्रेस भी इस चुनाव को हल्के में लेने के मूड में नहीं है. पार्टी रणनीतिक रूप से ऐसे चेहरे को आगे ला सकती है जो पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ BJP पर वैचारिक हमला करने की क्षमता रखता हो.

देखा जाए तो राजस्थान की राजनीति में राज्यसभा चुनाव अक्सर बड़े राजनीतिक संकेत छोड़ते रहे हैं. इस बार भी मुकाबला केवल तीन सीटों का नहीं बल्कि राजनीतिक धारणा, संगठनात्मक मजबूती और भविष्य की रणनीति का माना जा रहा है. आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम सामने आने के साथ ही यह सियासी मुकाबला और दिलचस्प होने वाला है.

Read more!