राजस्थान की सियासत बदलने का सपना देखने वाले दो दोस्त कैसे बने एक दूसरे के विरोधी?

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और हनुमान बेनीवाल एक जमाने में राजस्थान की सियासत बदलने का दम दिखाते थे और एक-दूसरे के कट्टर समर्थक थे लेकिन SI भर्ती परीक्षा रद्द होने के बाद आपस में भिड़ पड़े हैं

एक दशक पहले डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और हनुमान बेनीवाल एक दूसरे के पक्के समर्थक थे
एक दशक पहले डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और हनुमान बेनीवाल एक दूसरे के पक्के समर्थक थे

राजस्थान की सियासत में पिछले चार साल से भूचाल मचाने वाली SI भर्ती रद्द होने के बाद भी नया सियासी बखेड़ा कर गई. 28 अगस्त को जैसे ही राजस्थान हाईकोर्ट ने इस भर्ती का रद्द किए जाने के निर्देश दिए, श्रेय लेने की होड़ में प्रदेश के दो सियासी दिग्गज डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और हनुमान बेनीवाल आपस में भिड़ गए. एनडीटीवी से बात करते हुए दोनों नेताओं ने आमने-सामने से एक दूसरे पर जमकर हमले. बात इतनी आगे बढ़ गई कि दोनों ने एक दूसरे को चोर-बदमाश तक कह डाला. करीब पांच मिनट तक दोनों के बीच जमकर तू-तू, मैं-मैं हुई. राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में यह शायद पहली बार है जब दो दिग्गज नेताओं ने आमने-सामने एक दूसरे को इतना भला-बुरा कहा हो.

इसमें कोई हैरानी की बात भी नहीं है. दरअसल पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में हुई SI भर्ती 2021 के खिलाफ सबसे पहले डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने ही आंदोलन का बिगुल बजाया था. 24 दिसंबर 2021 को रिजल्ट आने के कुछ दिन बाद ही किरोड़ी लाल मीणा इस भर्ती को रद्द करने की मांग को लेकर जयपुर के अशोक नगर थाने के बाहर धरने पर बैठ गए थे. यह किरोड़ी लाल मीणा के आंदोलन का ही असर था कि बीजेपी ने 2013 के विधानसभा चुनाव में कई बार इस भर्ती को रद्द किए जाने का वादा किया. 

सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने इसके साथ अन्य भर्तियों में हुई गड़बडियों की जांच एसओजी के एडीजी वीके सिंह के नेतृत्व में SIT का गठन कर दिया मगर भर्ती रद्द नहीं की. पुलिस की विशेष शाखा स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने जांच के बाद 122 फर्जी थानेदारों को गिरफ्तार किया और 118 के खिलाफ चार्जशीट पेश की.  SI भर्ती 2021 में पास हुए 88 कैंडिडेट अभी भी फरार चल रहे हैं. एसओजी के एडीजी वीके सिंह का कहना है कि SI भर्ती 2021 में चयनित 859  में से करीब 700 कैंडिडेट ने लीक पेपर पढ़कर परीक्षा पास की थी.  

SI भर्ती का पेपर लीक करने के मामले में राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन (आरपीएससी) के दो सदस्य भी पुलिस गिरफ्त में हैं. एसओजी ने भी इस भर्ती को रद्द किए जाने की सिफारिश की थी मगर सरकार ने इसे रद्द करने की जगह 6 मंत्रियों की एक कमेटी बना दी. इस कमेटी की कई बैठकें हो चुकी थीं मगर भर्ती को रद्द किए जाने पर कमेटी टालमटोल करती रही. वहीं SI भर्ती रद्द किए जाने की मांग को लेकर पिछले 127 दिन से नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल लगातार धरना-प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे थे. इस धरने पर वो कई बार डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पर निशाने साध चुके थे. बताया जा रहा है कि यहीं से दोनों नेताओं के बीच खटपट शुरू हुई जो 28 अगस्त को को गाली-गलौच और झगड़े तक पहुंच गई. 

कभी दोनों एक दूसरे के पक्के दोस्त हुआ करते थे

एक दशक पहले तक डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और हनुमान बेनीवाल एक दूसरे के कट्टर समर्थक थे. इसी कारण साल 2012-13 के आस-पास राजस्थान की सियासत एक नई करवट लेने लगी थी.  राजस्थान में जातीय जनाधार रखने वाले ये दोनों कद्दावर नेता प्रदेश में बीजेपी-कांग्रेस का विकल्प बनाने की जुगत में जुटे थे. किरोड़ी लाल मीणा ने 2008 में बीजेपी छोड़कर पहले निर्दलीय चुनाव लड़ा और उसके बाद 2013 के चुनाव से पहले नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीईपी) का दामन थामा.  

हनुमान बेनीवाल भी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधराराजे पर लगातार हमलों की वजह से बीजेपी से निकाले जा चुके थे.  हालांकि, उस वक्त दोनों नेता एक साथ तो नहीं आए मगर एक दूसरे के समर्थन में खुलकर बोल रहे थे. 2013 में किरोड़ी लाल मीणा ने अपनी नई नवेली पार्टी एनपीईपी को 134 सीटों पर चुनाव लड़ाया और वे महज 4 सीट ही जीत पाए. उनकी पार्टी 10 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही और 34 सीटों पर तीसरा स्थान हासिल किया. पहली बार चुनाव लड़ने वाली पार्टी ने 4.3 फीसदी वोट हासिल किए. 2013 में नागौर जिले में हनुमान बेनीवाल को छोड़कर अन्य सभी सीटों पर बीजेपी को जीत हासिल हुई. इस तरह बीजेपी की लहर में भी किरोड़ी और हनुमान अपना दमखम दिखाने में कामयाब रहे थे. 

इसके बाद 2013 से लेकर 2018 तक दोनों नेताओं ने कई बार एक दूसरे की रैलियों में पहुंचकर अपना समर्थन जताया. उस वक्त दोनों नेताओं में खूब छन रही थी. हनुमान बेनीवाल किरोड़ी लाल मीणा के क्षेत्र में तो किरोड़ी हनुमान बेनीवाल के क्षेत्र में उनके समर्थन में रैलियां कर रहे थे.  कयास लगाए जा रहे थे कि 2018 का विधानसभा चुनाव किरोड़ी और हनुमान दोनों मिलकर लड़ेंगे मगर मार्च 2018 में किरोड़ी ने वापस बीजेपी का दामन थाम लिया और बदले में राज्यसभा की सीट हासिल की. किरोड़ी लाल मीणा के वापस बीजेपी में जाने के कुछ दिन बाद ही हनुमान बेनीवाल ने भी अपनी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) बना ली.  

2018 के विधानसभा चुनाव में किरोड़ी लाल मीणा कुछ खास प्रभाव नहीं दिखा पाए मगर हनुमान बेनीवाल की पार्टी ने तीन सीटों पर अपना परचम लहराया. रालोपा दो पर दूसरे और 24 जगहों पर तीसरे नंबर पर रही वहीं 2018 में किरोड़ी की पत्नी गोलमा देवी और रिश्तेदार राजेंद्र भी चुनाव हार गए. उसी वक्त हनुमान बेनीवाल ने किरोड़ी लाल मीणा पर पहला हमला किया. हनुमान ने कहा, ''अगर किरोड़ी उस वक्त मेरा साथ देते तो मैं, किरोड़ी और घनश्याम तिवाड़ी तीनों मिलकर सरकार बना लेते.'' दरअसल उसी साल घनश्याम तिवाड़ी ने भी बीजेपी छोड़कर भारत वाहिनी पार्टी बना ली थी और 62 सीटों पर चुनाव लड़ा. हालांकि, घनश्याम तिवाड़ी खुद अपनी सीट भी नहीं बचा पाए थे मगर उनकी पार्टी 7 जगहों पर तीसरे नंबर पर रही.  

विधानसभा चुनाव के बाद किरोड़ी बीजेपी के होकर रह गए वहीं हनुमान बेनीवाल इधर-उधर गठबंधन करते रहे. 2018 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद 2019 में नागौर सीट से उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया और कांग्रेस की ज्योति मिर्धा को चुनाव हराकर सांसद बने. किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का जमकर विरोध किया जिसके कारण रालोपा एनडीए का हिस्सा नहीं रही. वहीं 2023 के विधानसभा चुनाव में हनुमान बेनीवाल रालोपा के टिकट पर खींवसर से बीजेपी की ज्योति मिर्धा को हराकर चौथी बार विधायक बने. 2024 का लोकसभा चुनाव उन्होंने कांग्रेस से गठबंधन करके लड़ा और लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए. इस चुनाव में उन्होंने ज्योति मिर्धा को तीसरी बार पटखनी दी. 

हनुमान और किरोड़ी के बीच आपसी तकरार की एक वजह एसडीएम को थप्पड़ मारने वाले नरेश मीणा भी है. थप्पड़कांड के बाद हनुमान ने नरेश मीणा का खुलकर समर्थन किया था वहीं किरोड़ी मीणा इस मामले में लगातार बचते रहे हैं.  इसके बाद से ही हनुमान बेनीवाल लगातार डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पर सियासी हमले बोल रहे थे. हनुमान ने एक बार कहा, ''किरोड़ी लाल मीणा कभी संतुष्ट नहीं होते. जो भी उनका मित्र या साथी होता है उससे वे जल्दी ही मुंह फेर लेते हैं. यह उनकी आदत है कि वो जो कहते हैं, करते नहीं. उन्होंने मुझे कहा था कि वसुंधराराजे को भगाएंगे मगर मुझे छोड़कर वो वसुंधराराजे के साथ चले गए.'' इस पर किरोड़ी ने भी उन्हें जवाब दिया, ''हनुमान बेनीवाल खुद से बड़ा किसी को नहीं समझते. उन्हें लगता है कि अकेले वो ही क्रांति कर रहे हैं.''

इस टकराव का चरम अब SI भर्ती परीक्षा रद्द होने के बाद दिख रहा है, जहां दोनों एक दूसरे पर बिफर गए हैं.

SI भर्ती परीक्षा में कब क्या हुआ

राजस्थान की यह विवादास्पद सब इंस्पेक्टर भर्ती 13 से 15 सितंबर 2021 के बीच हुई थी. तीन लाख 80 हजार कैंडिडेट इस परीक्षा में शामिल हुए थे जिनमें से 20 हजार 359 कैंडिडेट को उत्तीर्ण मानते हुए शारीरिक परीक्षा के लिए बुलाया गया. 12 फरवरी से 18 फरवरी के बीच शारीरिक परीक्षा हुई जिसमें 3291 कैंडिडेट को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया. 23 जनवरी से 29 मई 2023 तक 9 चरणों में इंटरव्यू हुए और 1 जून 2023 को अंतिम परिणाम जारी हुआ. 

भर्ती में फर्जीवाड़े के आरोप लगने शुरू हुए तो डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने इसके खिलाफ आंदोलन शुरू किया. इसके बाद इस भर्ती को रद्द किए जाने की मांग को लेकर सड़क पर आंदोलन चलते रहे. भजनलाल के नेतृत्व वाली नई सरकार ने भी जब एक साल तक भर्ती को रद्द नहीं किया तो 13 अगस्त 2014 को इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई. 18 नवंबर 2014,  6 जनवरी व 9 जनवरी 2024 को हाईकोर्ट ने भर्ती को लेकर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे. 10 जनवरी को कोर्ट ने भर्ती में चयनित थानेदारों की फील्ड ट्रेनिंग पर रोक लगा दी.

एक जुलाई 2025 को सरकार ने पक्ष रखा कि भर्ती रद्द नहीं की जा सकती. 14 अगस्त को न्यायाधीश समीर जैन की एकल पीठ ने सुनवाई पूरी करके फैसला सुरक्षित रख लिया था. 28 अगस्त को फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कई तल्ख टिप्पणी की. न्यायाधीश ने कहा - SI भर्ती के पेपर लीक में आरपीएससी के छह सदस्यों (रामूराम राइका, मंजू शर्मा, बाबूलाल कटारा, संगीता आर्य, संजय क्षोत्रिय और जसवंत राठी) की भूमिका संदिग्ध थी. पेपर लीक में शामिल आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा को SI भर्ती के इंटरव्यू पैनल में शामिल करना सबसे बड़ा अपराध था. उनके खिलाफ पहले से उदयपुर में जांच चल रही थी. 

ब्लुटूथ के जरिए SI भर्ती परीक्षा का पेपर सब जगह पहुंच गया था. हाईकोर्ट ने SI भर्ती 2021 के 859 पदों को SI भर्ती 2025 के 1015 पदों में शामिल करते हुए पूर्व में चयनित कैंडिडेट को इसमें भाग लेने की छूट दिए जाने की सिफारिश की है. आरपीएससी के छह सदस्यों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए खंडपीठ ने आरपीएससी की कार्यप्रणाली सुधारने के लिए कहा है. 

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