राजस्थान में नकली बीज-खाद की जांच पर बढ़ा सियासी टकराव

कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और ACB अधिकारियों के बीच छिड़ी जुबानी जंग ने इस जांच को एजेंसी और भजनलाल सरकार, दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना दिया है

राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा

राजस्थान में नकली बीज, खाद और कीटनाशकों के खिलाफ अभियान का मकसद किसानों की सुरक्षा था. लेकिन अब यह मामला कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के बीच हाई-वोल्टेज राजनीतिक टकराव में बदल गया है. इससे भ्रष्टाचार, नौकरशाही के भीतर टकराव और BJP सरकार के राजनीतिक संदेश को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब मीणा जयपुर स्थित ACB मुख्यालय पहुंच गए. उन्होंने करीब एक घंटे तक वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ की. उनका आरोप था कि चुनिंदा जानकारी मीडिया को लीक की गई ताकि उनकी छवि खराब हो. इस घटनाक्रम ने भ्रष्टाचार की जांच को मंत्री और राज्य की इस अहम एजेंसी के बीच सार्वजनिक टकराव में बदलने का खतरा पैदा कर दिया.

विवाद की शुरुआत ACB की उस जांच से हुई जिसमें आरोप लगाया गया कि कुछ अधिकारियों और बिचौलियों ने नकली बीज मामले में कार्रवाई दबाने और जब्त किया गया करीब 15 करोड़ रुपए का माल छुड़वाने के लिए रिश्वत ली. शुरुआत में हुई गिरफ्तारियों से ऐसा लगा कि राजस्थान में नकली कृषि उत्पादों के खिलाफ अभियान के दौरान भ्रष्टाचार की आशंकाएं सही थीं.

करीब दो वर्षों से मीणा ने बीज, खाद और कीटनाशक विक्रेताओं पर अचानक छापेमारी करके सरकार के सबसे सक्रिय मंत्रियों में अपनी पहचान बनाई है. उनकी कार्रवाई के चलते FIR दर्ज हुईं, माल जब्त किया गया और मुकदमे चले. इससे उन्होंने ऐसे नेता की छवि बनाई जो नकली कृषि उत्पादों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं. ऐसे उत्पाद फसल की पैदावार घटाते हैं और किसानों को नुकसान पहुंचाते हैं.

हालांकि रिश्वत मामले में हुई गिरफ्तारियों ने उनके आलोचकों को इस छवि पर सवाल उठाने का मौका दे दिया. विपक्षी नेताओं और राजनीतिक विरोधियों ने पूछा कि क्या यह अभियान खुद भ्रष्टाचार की चपेट में आ गया है. उनका आरोप है कि जिन कई कारोबारियों पर अधिकारियों ने छापे मारे, वे आखिरकार दोषी नहीं पाए गए.

मीणा की नाराजगी उन खबरों से है जो FIR औपचारिक रूप से दर्ज होने से पहले सामने आईं. ACB सूत्रों के हवाले से आई मीडिया रिपोर्टों में इंटरसेप्टेड बातचीत का जिक्र था. इनमें आरोपियों के बीच एक ‘डॉक्टर’ और एक ‘मंत्री’ को भुगतान की चर्चा होने का दावा किया गया था. मीणा, जो पेशे से डॉक्टर भी हैं और कैबिनेट मंत्री भी, का कहना है कि इशारा साफ तौर पर उनकी ओर था. उनका आरोप है कि चुनिंदा जानकारी सार्वजनिक करके बिना उनका नाम लिए उन्हें शक के घेरे में खड़ा कर दिया गया. अपने सबसे कड़े बयानों में से एक में मीणा ने कहा कि अगर कोई यह साबित कर दे कि उन्होंने रिश्वत ली है तो वे राजनीति छोड़ देंगे.

मंत्री ने मीडिया रिपोर्टों में सतीश कुमार नाम के व्यक्ति का जिक्र किए जाने पर भी सवाल उठाए. यह नाम उनके कार्यालय के एक करीबी सहयोगी से जुड़ा बताया जाता है. मीणा का कहना है कि इससे बेवजह उनकी टीम का नाम इस जांच से जोड़ दिया गया.

इस विवाद ने ACB को भी असामान्य जांच के दायरे में ला दिया है. मीणा का आरोप है कि ब्यूरो ने पूरी जानकारी साझा करने के बजाय चुनिंदा सूचनाएं मीडिया तक पहुंचने दीं, जिससे उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए.

ACB ने अब तक सार्वजनिक रूप से टकराव से बचने की कोशिश की है. लेकिन उसकी चुप्पी ने ऐसा माहौल बना दिया है जिसमें अलग-अलग राजनीतिक दावे जगह बना रहे हैं. अब एजेंसी पर दबाव बढ़ रहा है कि वह या तो सबूतों के आधार पर निर्णायक कार्रवाई करे या फिर स्थिति स्पष्ट करे ताकि अटकलों पर विराम लग सके.

इस विवाद ने यह भी उजागर किया है कि ACB की जांच आखिर शुरू कैसे हुई, इस पर अलग-अलग दावे हैं. मीणा का कहना है कि उन्होंने ही नकली कृषि उत्पादों के खिलाफ अभियान से जुड़े भ्रष्टाचार की जानकारी सरकार को दी थी. उनके अनुसार बाद में हुई गिरफ्तारियां भी उनके दखल का नतीजा थीं.

वहीं ACB के एक अधिकारी ने कथित तौर पर अलग दावा किया. उनके अनुसार, ब्यूरो तब सक्रिय हुआ जब एक वीडियो वायरल हुआ. उसमें एक व्यक्ति जो खुद को मंत्री की टीम से जुड़ा बता रहा था लोगों के सवालों का सामना कर रहा था. उस पर छापेमारी रोकने के बदले पैसे मांगने का आरोप लगाया गया था.

यह गतिरोध अभी खत्म नहीं हुआ है. ऐसे में भजनलाल शर्मा सरकार के भीतर की राजनीतिक स्थिति को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. मीणा की हाई-प्रोफाइल कार्रवाई और सार्वजनिक दखल ने उन्हें ऐसी पहचान दिलाई है जो कई बार कैबिनेट के उनसे वरिष्ठ सदस्यों के बराबर दिखाई देती है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उन्हें काफी मीडिया अटेंशन मिला है. यह अक्सर BJP के वरिष्ठ नेताओं के दौरों के समय भी देखने को मिला है.

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस विवाद को मुद्दा बनाया है. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के अधीन काम करने वाली एक एजेंसी की कार्यप्रणाली पर अगर कोई कैबिनेट मंत्री खुलेआम सवाल उठा रहा है तो यह BJP सरकार के भीतर गहरे तनाव का संकेत है.

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