राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में नेता खेल रहे कौन-सा खेल?
विजय हजारे ट्रॉफी में राजस्थान के शर्मनाक प्रदर्शन के बाद राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) से जुड़े विवाद फिर चर्चा में आ गए हैं

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) 94 साल पुरानी संस्था है लेकिन अपने नौ दशक के इतिहास में यह इस वक्त अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. नेता पुत्रों की आपसी लड़ाई में बार-बार RCA की एडहॉक कमेटियां और जिला इकाइयां भंग हो रही हैं, राजस्थान से अंतरराष्ट्रीय और IPL मैचों की मेजबानी छीनी जा रही है और पदाधिकारी अनियमितताओं के आरोपों से घिरे हुए हैं. पिछले दो दशक में शायद ही कोई साल ऐसा रहा होगा जबकि RCA में विवाद ना हुए हो. RCA और विवाद अब एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं.
ताजा विवाद विजय हजारे ट्रॉफी में राजस्थान टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ है. टूर्नामेंट में खेले गए 6 मुकाबलों में से राजस्थान टीम को पांच में हार मिली. 6 जनवरी को हुए मैच में तो उसे कर्नाटक के सामने 150 रनों की शर्मनाक हार झेलनी बड़ी. टूर्नामेंट खत्म होने के साथ ही टीम चयन को लेकर कई सवाल खड़े हुए. राजस्थान रणजी टीम के पूर्व कप्तान राहुल कांवट ने विजय हजारे ट्रॉफी की चयन समिति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा, ''पहले 300-350 मैच खेलने वाले अनुभवी लोगों को खिलाड़ी चुनने की जिम्मेदारी दी जाती थी मगर अब चयन समिति में 4 लोग ऐसे हैं जिन्होंने सिर्फ 5 मैच ही खेले हैं.''
कांवट के इन आरोपों के एक हफ्ते बाद ही 10 जनवरी 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन की मान्यता रद्द कर दी. इसके अध्यक्ष राज्य के केबिनेट मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय खींवसर थे. धनंजय सिंह जब RCA की एडहॉक कमेटी के अध्यक्ष थे तब ही चयन समिति बनाई गई थी. हाईकोर्ट ने जोधपुर जिले की मान्यता को रद्द करने के साथ ही धनंजय सिंह व उनके सहयोगी सदस्यों की ओर से लिए गए फैसलों को भी रद्द कर दिया.
हालांकि, RCA की एडहॉक कमेटी में पिछले एक साल से आपसी जंग चल रही है. राजस्थान में BJP सरकार आने के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को RCA के अध्यक्ष पद से हटाने की कोशिशें शुरू हो गई थी. इसी के चलते वैभव गहलोत ने 26 फरवरी 2024 को इस्तीफा दे दिया. इसके बाद श्रीगंगानगर से BJP विधायक जयदीप बिहानी को RCA की एडहॉक कमेटी का संयोजक बनाया गया. कुछ समय बाद ही RCA के कार्यवाहक अध्यक्ष धनंजय सिंह खींवसर और जयदीप बिहाणी के बीच आपसी टकराव और विवाद होने लगे तो सरकार ने बिहाणी को हटाकर 28 जून 2025 को दीनदयाल कुमावत को नया संयोजक बना दिया.
इसके बाद भी विवाद जारी रहे. कुछ ही दिन में एडहॉक कमेटी के सदस्यों के बीच कुमावत व खींवसर, दो गुट बन गए. पिछले कुछ अरसे से दोनों गुट अलग-अलग बैठकों का आयोजन करते रहे और एक दूसरे के फैसलों को गैरकानूनी बताते रहे.
क्रिकेट के जानकार RCA में विवादों की बड़ी वजह खिलाड़ियों की जगह नेताओं और उनके बेटों के दखल को मानते हैं. वरिष्ठ खेल पत्रकार दिनेश शर्मा कहते हैं, ''पैसा और पावर नेताओं और उनके बेटों को क्रिकेट की राजनीति की तरफ आकर्षित कर रहा है. राजस्थान में इस समय किसी भी जिला क्रिकेट संघ में क्रिकेट खिलाड़ी पदाधिकारी नहीं हैं बल्कि उनकी जगह नेताओं का कब्जा है.''
दिनेश शर्मा की यह बात सही है कि इस समय RCA सहित अधिकांश जिला क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारी नेता या उनके बेटे हैं. इनमें राजस्व मंत्री हेमंत मीणा प्रतापगढ़ जिला संघ के अध्यक्ष, BJP विधायक जसवंत यादव के पुत्र मोहित यादव अलवर जिला संघ, BJP के राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी के पुत्र आशीष तिवाड़ी सीकर, BJP नेता श्रवण चौधरी सीकर, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर बारां, पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह चूरू, कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा धौलपुर, BJP नेता दीनदयाल कुमावत सवाई माधोपुर, कांग्रेस के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा सिरोही, BJP विधायक जयदीप बिहाणी गंगानगर, BJP नेता रामपाल शर्मा भीलवाड़ा, BJP नेता गौरव वल्लभ डूंगरपुर और पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय के बेटे प्रेम प्रताप मालवीय बांसवाड़ा जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं.
विवादों के दो दशक
RCA और विवादों का यह नाता कोई नई बात नहीं है. RCA में ललित मोदी के आगमन के बाद से इन विवादों को ज्यादा हवा मिली. राजस्थान में 2005 में वसुंधराराजे की सरकार बनने के बाद उनके करीबी ललित मोदी का राजस्थान क्रिकेट में पर्दापण हुआ. ललित मोदी ने नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष के जरिए RCA की राजनीति में प्रवेश किया. राजस्थान के दिग्गज रुंगटा गुट को मात देकर मोदी RCA पर काबिज हुए. 2005 से 2009 तक वे RCA के अध्यक्ष रहे और यही दौर विवादों के साथ ही RCA का स्वर्णकाल माना गया. मोदी के कार्यकाल में RCA अकेडमी का एक बेहतर ग्राउंड और फाइव स्टार सुविधाओं वाला होटल तैयार हुआ.
2008 में राजस्थान में वसुंधराराजे की सरकार जाने के साथ ही ललित मोदी युग भी जाता रहा. हालांकि, तब तक मोदी IPL के सर्वेसर्वा बन चुके थे. IPL में टेलीविजन अधिकारों के उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के चलते ललित मोदी को 2010 में देश छोड़कर भागना पड़ा. 2009 में IAS अधिकारी संजय दीक्षित ने मोदी को हराकर RCA की कमान संभाली मगर कुछ माह में ही उन्हें भी RCA की कुर्सी से हटा दिया गया.
2011 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी जोशी RCA के नए मुखिया बने. 2012 में RCA में तख्तापलट के लिए संजय दीक्षित ने अपने धुर विरोधी ललित मोदी से हाथ मिला लिया. क्रिकेट एसोसिएशन में साल 2013 दिसंबर में चुनाव हुए. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI ने चेतावनी दे रखी थी कि अगर मोदी इस चुनाव में जीते तो RCA की सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी. लेकिन कोर्ट ने चुनाव के परिणाम पर रोक लगा दी थी.
2013 में राजस्थान में फिर से वसुंधराराजे सरकार आ गई. ऐसे में RCA के सारे समीकरण उलट-पुलट हो गए. सीपी जोशी ने मोदी के सामने अपने विश्वासपात्र व भीलवाड़ा जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष रामपाल शर्मा को RCA अध्यक्ष का उम्मीदवार बनाया लेकिन 6 मई 2014 को हुए चुनाव में रामपाल शर्मा लंदन में बैठकर चुनाव लड़ने वाले ललित मोदी से हार गए. हालांकि, ललित मोदी का नाम जुड़ने के बाद BCCI ने RCA को भंग कर दिया.
ललित मोदी ने 2017 में अपने बेटे रूचिर मोदी के जरिए RCA की सियासत पर कब्जा जमाने की कोशिश की. अलवर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष के तौर पर रूचिर की क्रिकेट की सियासत में एंट्री हुई. RCA अध्यक्ष पद के लिए रूचिर और डॉ. सीपी जोशी के बीच मुकाबला हुआ जिसमें जोशी की जीत हुई. 2018 में राजस्थान में फिर कांग्रेस की सरकार बनी. 2019 में अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत RCA की सत्ता पर काबिज हुए. राजस्थान में दिसंबर 2023 में भजनलाल शर्मा सरकार के गठन के साथ ही RCA में बदलाव के प्रयास शुरू हो गए. आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ जिसके चलते अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत को RCA अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा.